कोरोना महामारी से उत्पन्न हो रही चुनौतियों से क्या हम निपट पाएंगे?

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कोरोना वायरस महामारी ने जनमानस पर स्वास्थ्य के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक प्रहार किया है जिसकी क्षतिपूर्ति आने वाले समय में बरसों-बरस तक पूरी होती दिखाई नहीं दे रही है कोरोना के कारण बढ़ता यह संकट दिनों-दिन और भयावह होता जा रहा है। वर्तमान में स्वास्थ की चुनौती तो है ही, साथ ही साथ ही अपनी आजीविका व अर्थव्यवस्था का संकट भी गहराता जा रहा है। अत: इन विकट स्थितियों में हर किसी के मन में भय मिश्रित प्रश्न क्या हम निपट पाएंगे?

समाज ही नहीं बल्कि मानवता के अस्तित्व के लिये महत्वपूर्ण बन चुके इस विषय पर आपसे आपके बहुमूल्य विचार आमंत्रित हैं। इसमें आप अपने विचारों के साथ भावी-भविष्य की सामाजिक और आर्थिक योजनाओं को भी अवश्य साझा करें। आपके अमूल्य विचार निर्मम कोरोना के भावी दुष्परिणामों से निपटने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं । आईये जाने इस स्तंभ की प्रभारी मालेगांव निवासी सुमिता मुंधड़ा से उनके तथा समाज के प्रबुद्धजनों के विचार।

कोरोना महामारी में अपनी समझदारी:
सुमिता मूंधड़ा, मालेगांव

एक तरफ तो कोरोना महामारी के लॉकडाउन की वजह से परिवार और समाज चारदीवारी में सिमट गए है। परिवार में एक-दूसरे के साथ समय बिताने से आपसी बंधन मजबूत हुए हैं । भाग-दौड़ और व्यस्तता में एक लगने से रिश्तेदारी से भी फोन पर कुशल -क्षेम पूछने का भरपूर समय मिल रहा है। हरेक रिश्ते में नवीनता महसूस होने लगी है। दूसरी तरफ व्यापार और काम-धंधे बंद होने के कारण वर्तमान आय नगण्य है, इसलिए घर के कमानेवाले सदस्य के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हा उसकी मानसिक स्थिति को समझने की कोशिश भी करें। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अनुमानित है कि भविष्य में हमारी पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था पर इसके दुष्परिणाम दृष्टिगोचर होंगे। अगर हम थोड़ा धैर्य, सयम और समझदारी रखें तो भावी विकट परिस्थिति से सरलता से उबर जायेगे। परिवार के छोटे-बड़े हर सदस्य को अपव्यय से बचना होगा। छोटी से छोटी बचत भी आर्थिक रूप से मददगार होती है। मनोरंजन और मौज-मस्ती पर होने वाले खर्चों पर अंकुश लगाना चाहिए। अगर हमारे घर में शादी या कोई कार्यक्रम हो तो अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा से जारी आचार-संहिता का अनुपालन करने से भी हमारी अर्थव्यवस्था डगमगाने से बच जाएगी साथ ही आवश्यक रीति-रिवाजों को छोड़कर बीम पर आधारित दिखावटी अनावश्यक कार्यक्रमों का आयोजन तो यह मेहमान और मेजबान दोनों के लिए श्रेयस्कर होगा। आम दिन हो या खास अवसर हो गैजेट्स, विधुतीय उपकरणों, सोने-चांदी आदि की खरीदारी पर नियंत्रण करना भी हमारी अर्थव्यवस्था को संभालने में सहायक साबित होगा । लॉकडाउन के कारण व्यापार में नकद की आवाजाही बहुत प्रभावित हुई है ऐसे में गृहिणी भी घर-खर्चों से संचित नकद राशि को अपने घरेलू व्यापार में लगाकर कजे पर ब्याज का नुकसान होने से बचा सकती है।

चुनाव उचित या अनुचित

मितव्ययी बन हों तैयार:
सतीश लाखोटिया, नागपुर

संकट के इस समय हर किसी को आनेवाले भविष्य की चिंता होना स्वाभाविक ही है। हम भारतीयों में बड़े से बड़े दुख को झलक, उसे सुख में तब्दील करने का जन्मजात हुनर है, ऊपर में हम मारवाड़ी माहेश्वरी, हम तो दान देने से लेकर वक्त आने पर जमीन पर बैठकर अपना काम निकालने में भी माहीर हैं। हम चाहे बड़े उद्योगपति हो या नौकरीपेशा या मिडल क्लास व्यापारी हम यह संकट आने पर कम में काम कैसे करना, मितव्ययी बनकर किस तरह जीना, यह तो हम हंसते खेलते हुऐ कर लेते हैं। मेरे जैसा आम इंसान न तो ईश्वर की तरह सब त्रिकालदर्शी बनकर सब देख सकता है, न बड़े अर्थशास्त्री की तरह यह बता सकता है कि इस संकट से हमें मुक्ति कैसे मिलेगी? मेरा तो मारवाड़ी दिमाग यही कहने की चाह रख रहा है कि हर इंसान पारिवारिक जयावदारियों का चिंतन कर काम करें, खर्च पर पूरी तरह लगाम लगाये। व्यापार में समय देखकर पूजी लगाये तो] निश्चित रूप हमारा समाज ही नहीं, बचा पूरा देश कुछ समय पश्चात इस संवत से बाहर होगा। हम ही नहीं, पूरा विश कहेगा हम हर परिस्थिति से निपटने में सक्षम है।

नए चिंतन का किया शुभारम्भ:
पूजा नबीरा काटोल, नागपुर

कोरोना महामारी की बिभीषिका ने सारे विश्व को नये सिरे से चिंतन को मजबूर किया है। सबसे पहले तो कोरोना ने ये अहसास कराया कि मानव को अपने सर्वशक्तिमान होने के दम्भ से बाहर आ कर प्रकृति के प्रति नजर और नज़रिया बदलना ही होगा। ये एक तरह से तृतीय जैविक विश्व युद्ध ही है, जिसमें हमें बड़ी आर्थिक एवम मानसिक तैयारी के साथ लड़ना होगा। निराश होकर नहीं हौंसलों के साथ अपने नैतिक एवम आध्यात्मिक बल को कवच की तरह संबंध बनाना होगा। एक सदी पहले भी महामारी ने करोड़ों को अपना ग्रास बनाया पर दर्द और निराशा के अत्यंत गहरे जख्मों से सही रणनीति अपना कर उबर ही गये थे। आने वाला समय निश्चित ही चुनौती पूर्ण है किन्तु चुनौतियाँ ही इंसान को नये द्वार तक ले जाने की राह भी दिखाती है। हमें समय की लय और रफ्तार के हिसाब से परिवर्तन करने ही होंगे। चिंता के स्थान पर चिंतन आवश्यक है। कितनी भी गहरी रात हो सबेरा होगा किन्तु पहले स्थान पर स्वास्थ्य का ध्यान और निर्देशों का पालन जरूरी है। फिर धीरे धीर जीवन गाड़ी पटरी पर लौटेगी। वक्त की एक खासियत है दोस्तों, कितना भी बुरा हो गुजर जाए है, लेकिन उसके पदचिन्ह हमें अनेक तरह के सबक सिखाते हैं। उनसे ही सीख कर अपने आचरण को नये साँचे में ढाल लेना ही समझदारी है।

कर्म व ईश्वर पर भरोसा जरूरी:
भगवती-शिव प्रसाद बिहानी, आसाम

कोरोना महामारी से जो भी चुनौती हमारे सामने आई है और आगे आने वाली है, उनसे निपटने के लिए हमें अपने आत्मविश्वास व हिम्मत को संजोए रखना होगा और हमें अपने भगवान पर पूरा भरोसा रखना होगा। यदि हमारे अंदर यह भावना होगी, तो हम खुद के साथ दूसरों की भी हिम्मत बढ़ा सकते हैं। भगवान ने हमें यदि ऐसी परिस्थिति दी, तो उससे निपटना भी हमें सिखाया है। पहले हम कभी इस तरह घर की चार दीवारी में नहीं रहे है पर आज हम सब सरकार व खुद का सहयोग कर रहे हैं। याद रखें रात के बाद सवेरा आता है, उसी प्रकार दुःख के बाद सुख आएगा ही। ऐसा हम सब ने अनुभव किया है, तो इस संकट के समय में हम सबको अपना धैर्य बनाए रखना चाहिए, शांति और संतोष व सरलता से जीवन यापन करना होगा। हमें अपने खर्चों पर लगाम लगानी होगी, जिससे अर्थव्यवस्था ठीक रहे। एक दूसरे की सहायता करनी होगी। देखा-देखी को छोड़कर जो भी बन सके अपना कर्म खुद को करके अपना व सरकार का सहयोग करना चाहिए।

चुनाव उचित या अनुचित

धन के साथ अपनी ऊर्जा को भी बचाएँ:
राजकुमार मूंधड़ा, मालेगांव

कोरोना के बाद का जीवन आज देखते है तो काफी भयावह प्रतीत होता है क्योंकि जहां देखो वहां से अनगिनत सूचनायें जो कि नकारात्मक है, हमारे मस्तिष्क से टकरा रही है। हमने खुद को इतना विवश कर लिया है कि सकारात्मकता हमारे आस पास भी नहीं आ रही है। इसलिए इस सोच में बदलाव लाना होगा ताकि कोरोना के बाद का हमारा जो पुनर्जन्म होगा, उसमे हम उसी उत्साह और उमंग के साथ जीवन जिये और खुद को और देश की अर्थव्यवस्था को एक नई ऊंचाई वे सके। मेरा ये मानना है कि जो आर्थिक मापदंड इस समय विश्व के गड़बड़ा गए है, काफी जल्दी हम उसे मर सकते हैं । वैश्विक मांग भी बढ़ेगी और रोजगार भी, बसते आज हम हमारी जमा पूंजी को सोना समझ कर खर्च करे जैसे कि युद्धकाल में हुआ करता है। किसी ने सच ही कहा है कि 2020 के साल में आप अपने आप को बचाकर रखना, भविष्य को उज्जवल होने वाला है। आज की परिस्थिति में अगर हम उज्वल भविष्य के सपने देखने है तो आज के खाली भक्ति का हमें सदुपयोग करना होगा और अपने आप को ऐसे काम में व्यस्त रखना होगा, जिससे हमें सकारात्मक ऊर्जा मिले। जैसे कि हम योगाभ्यास, धार्मिक धारावाहिक देखना, ऐसे वक्ताओ के वेबिनार सुनना जो सकारात्मक सोच को बढ़ावा देवे, महान व्यक्तित्व की किताब पढ़ना आदि। अपने ऐसे शौक पूरे करना जिसके लिए हमने कभी वक्त ही नही दिया। इन्ही सब कार्यों से आप अपनी ऊर्जा को बनाये रख सकते हैं, तो कोरोना के बाद होने वाली अस्थायी परेशानियों से लड़ने में यह मददगार होगी।


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