Wednesday, April 1, 2026
11 C
London

प्रशासनिक क्षमता के महारथी- IAS Gopal Daad

इंदौर निवासी आईएएस गोपाल डाड अपने पद से तो सेवानिवृत्त हो गये लेकिन फिर भी उनकी प्रशासनिक क्षमता के मुरीद म.प्र. शासन ने उनकी विशिष्ट क्षमताओं को देखते हुए उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद भी मुख्यमंत्री के विशेष कत्र्तव्य अधिकारी की जिम्मेदारी सौंप दी। श्री डाड इससे पूर्व वर्ष 2016 में उज्जैन में आयोजित सिंहस्थ महाकुम्भ में अतिरिक्त मेला अधिकारी का पदभार संभाल चुके हैं। वर्तमान में विशेष कत्र्तव्य अधिकारी के रूप में पूर्ण क्षमता के साथ कार्य करते हुए आगामी सिंहस्थ महाकुम्भ 2028 की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। श्री गोपाल डाड की शून्य से शिखर की यात्रा भी अपने आप में एक मिसाल है। श्री माहेश्वरी टाईम्स श्री गोपाल डाड (Gopal Daad)को प्रशासनिक क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदानों को नमन करते हुए अवार्ड ‘‘माहेश्वरी ऑफ द ईयर-2024’’ प्रदान करते हुए गौरवान्वित महसूस करती है।


वर्तमान में विशेष कत्र्तव्य अधिकारी के रूप में सेवानिवृत्ति के बाद भी अपनी सेवा दे रहे आईएएस गोपाल डाड की प्रशासनिक क्षमताओं के सामने प्रदेश का पूरा ही प्रशासनिक महकमा कायल है। लेकिन जो उनकी जीवन यात्रा को जानता है, वह हर आम व्यक्ति भी उनके जुझारू व दृढ़निश्चयी व्यक्तित्व के सामने नतमस्तक हुए बिना नहीं रहता।

श्री डाड का जन्म 23 नवम्बर 1964 में भीलवाड़ा (राज.) के मंगरोप नामक ग्राम में स्व. श्री कन्हैयालाल व श्रीमती जानबाई डाड के यहाँ हुआ था। बचपन से ही श्री डाड प्रतिभावान रहे और कक्षा 8वीं की परीक्षा अपने पैतृक ग्राम से ही प्राप्त की। इस परीक्षा के दौरान ग्रामीण प्रतिभावान छात्र के रूप में चयनित हुए और 9वीं कक्षा से आगे सम्पूर्ण शिक्षा भीलवाड़ा से ही ग्रहण की। भीलवाड़ा आने के बाद उनका रिजल्ट थोड़ा गिर गया लेकिन हायर सेकेण्डरी के बाद पुन: अपनी कमियों को दूर करते हुए विज्ञान विषय के साथ कॉलेज की शिक्षा ग्रहण करने लगे और वह भी अंग्रेजी माध्यम से।


जीवन की विडम्बना यह थी कि उन्होंने कॉलेज में शिक्षा ग्रहण करना प्रारम्भ ही किया था तभी पिताजी को लकवा हो गया। इससे उनके सामने आर्थिक संकट भी उत्पन्न हो गया। फिर भी वे किसी तरह अपने खर्चे की व्यवस्था करते हुए आगे बढ़ते रहे। फिर वर्ष 1985 में जब वे अपनी इस संघर्ष यात्रा में भौतिक विषय से एम.एससी. द्वितीय वर्ष में अध्ययनरत थे, तभी मामूली से बुखार के बाद माँ का साया सिर से उठ गया।

नियति का क्रूर आघात यहीं नहीं थमा, माँ के देहांत के 11वें दिन पिताजी का भी असामयिक देहावसान हो गया। उस समय आपकी आयु लगभग 20 वर्ष थी और परिवार में छोटे भाई श्री रमेशचंद्र डाड 18 वर्ष के थे। इस विकट स्थिति में दोनों भाई ही एक दूसरे का सहारा बने। इन स्थितियों के बावजूद एम.एससी. की परीक्षा उन्होंने मैरिट के साथ उत्तीर्ण की।

श्री डाड को ही खुद जॉब, खाना, पढ़ाई सबकी व्यवस्था करनी थी। वर्तमान में छोटे भाई रमेशचन्द्र डाड मंदसौर के शासकीय महाविद्यालय में भौतिक शास्त्र के ख्यात प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। आपकी दोनों बेटियां अदिति एवं आस्था भी डॉक्टर हैं।


घर खर्च चलाने के लिए श्री डाड ने नाथद्वारा में शासकीय विद्यालय में व्याख्याता के रूप में नौकरी कर ली लेकिन उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी। लोग उनकी सिविल सर्विस की पढ़ाई का मजाक उड़ाया करते थे, लेकिन वे दृढ़ता के साथ अपने लक्ष्य पर डटे रहे। आखिरकार वे म.प्र. लोकसेवा आयोग से सिविल सर्विस परीक्षा उत्तीर्ण करके ही माने और इसके द्वारा उनकी सर्वप्रथम नियुक्ति डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुई।

इसके साथ ही उनके जीवन में खुशी का मौका आया और वे श्री राधेश्याम एवं श्रीमती बदामदेवी दरगड़ की सुपुत्री नीलिमा के साथ वर्ष 1991 में परिणय सूत्र में बंध गये। वर्ष 1992 में प्रथम पुत्र अनिरुद्ध का जन्म हुआ जो वर्तमान में एचडीएफसी बैंक में चीफ मैनेजर हैं।

अनिरूद्ध का विवाह कोरोना काल में श्री राजकुमार कोठारी, अलीराजपुर, की सुपुत्री पूनम (सीए, सीएस) के साथ हुआ। द्वितीय पुत्र अभिमन्यू का जन्म 1995 में हुआ और वे सीए, सीएफए तथा आईएसबी हैदाराबाद से एमबीए कर एक प्रतिष्ठित कंपनी में सेवारत हैं। अभिमन्यु का विवाह डिकेन (नीमच) निवासी श्री सत्यनारायण गगराणी की पौत्री अदिति के साथ हुआ है।


श्री डाड वर्ष 1991 में डिप्टी कलेक्टर मंदसौर के रूप में एमपीपीएससी के माध्यम से प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए। परिवीक्षा अवधि पूरी होने के बाद, मंदसौर, भीकनगांव, कसरावद (खरगोन) और रतलाम जैसे शहरों में एसडीएम के रूप में काम करते हुए जमीनी स्तर पर अनुभव प्राप्त किया। पर्याप्त अनुभव प्राप्त करने के बाद उन्हें एडीएम के रूप में मंदसौर पदस्थ किया गया। फिर म.प्र. के प्रमुख शहरों रतलाम-सतना-खंडवा में नगर निगम आयुक्त के रूप में शहरी विकास का दायित्व सम्भाला।

म.प्र. विशाल ग्रामीण विकास संभावनाओं वाला राज्य है। सौभाग्य से उन्हें एक ऐसे शहर नीमच में सीईओ जिला पंचायत के रूप में ग्रामीण विकास में नेतृत्व का अवसर मिला, जो पुरानी यादों को ताजा करता है, जो कि उनके मूल स्थान का सीमावर्ती जिला है। इस दायित्व के दौरान उन्होंने अपनी पूर्ण क्षमता के साथ ग्रामीण क्षेत्रों के विकास का प्रयास किया।


जैसे-जैसे श्री डाड अनुभवी होते गये वैसे-वैसे प्रशासनिक तंत्र भी डाड की कार्यशैली का मुरीद होता गया। इसके परिणामस्वरूप उन्हें कई बड़ी जिम्मेदारियाँ प्राप्त होने लगी। उन्हें म.प्र. की ‘‘मिनी मुंबई’’ माने जाने वाले इंदौर शहर का एडीएम बना दिया गया। एडीएम के रूप में उन्हें अस्थिर और गंभीर कानून व्यवस्था की स्थितियों को संभालने का अनुभव मिला।

क्षेत्रीय सचिव माध्यमिक शिक्षा मंडल, उपायुक्त और सचिव एमपीपीएससी सहित विभिन्न विभागों में भी स्थानांतरित हुए। सीईओ जिला पंचायत, इंदौर के रूप में ग्रामीण और शहरी विकास कौशल का लाभ उठाने का अवसर मिला। वे 6 वर्षों से अधिक समय तक इन प्रमुख पदों पर रहे।

फिर 2013 में अतिरिक्त मेला अधिकारी, उज्जैन के रूप में देश के सबसे बड़े आयोजनों में से एक, सिंहस्थ 2016 का प्रभार सौंपा गया। उन्होंने इसे प्रारम्भ से पूरा होने तक सम्भाला व इस कर्तव्य में 3 साल से अधिक समय तक लगे रहे। इस आयोजन ने कई विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिये थे।


एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखने वाले श्री डाड के लिये आईएएस बनने का सपना सिर्फ उनका नहीं बल्कि सभी प्रियजनों का भी था। बाबा महाकाल की कृपा से, उन्हें 2008 बैच का आईएएस पुरस्कार मिला। फिर आईएएस अधिकारी के रूप में कई प्रतिष्ठित पदों पर कार्य किया। उप सचिव शहरी विकास के रूप में शुरुआत की। फिर कलेक्टर और डीएम बने। 2017 से 2018 तक सिवनी जिले का नेतृत्व किया। 2018 से 2020 में खरगोन एवं 2020-21 में रतलाम सेवारत रहे।

खरगोन और रतलाम जिले का नेतृत्व करते हुए सदी की सबसे भीषण महामारी कोरोना देखी। यह जीवनकाल का सबसे कठिन अनुभव था। इसमें कई लोगों की जान बचाने का उन्होंने प्रयास किया। रतलाम मेडिकल कॉलेज में नजदीकी 6-7 जिलों के सैकड़ों मरीजों की सेवा एवं जान बचाने का सर्वोत्तम प्रयास किया। रतलाम के बाद भोपाल में अपर सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास और अपर सचिव लोक निर्माण विभाग जैसे विभिन्न पदों पर रहे।

वर्ष 2021 के अंत में आयुक्त के रूप में पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का नेतृत्व करने का मौका मिला, साथ ही आयुक्त चिकित्सा शिक्षा के रूप में भी काम किया। जनवरी 2024 में सेवानिवृत्ति के नजदीक रीवा संभाग एवं शहडोल संभाग के संभाग आयुक्त बनाये गये जहाँ 9 जिलों के जिला कलेक्टर का पर्यवेक्षण किया। अंत में रीवा संभागायुक्त पद से अपना कार्यकाल समाप्त किया।


जिला पंचायत सीईओ इंदौर के पद पर रहते हुए श्री डाड के प्रयासों ने भारत सरकार से वर्ष 2013 में जिला पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कार प्राप्त हुआ, जिसमें जिला पंचायत को 40 लाख रुपये की राशि पुरस्कार में प्राप्त हुई। इसके साथ ही वर्ष 2014 में मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार भी प्राप्त हुआ।

यह उनकी सेवाओं का पुरस्कार ही है कि अब उन्हें उज्जैन में आयोजित होने वाले आगामी सिंहस्थ महाकुम्भ-2028 की जिम्मेदारी भी प्राप्त हुई है। इसके अंतर्गत श्री डाड मुख्यमंत्री के ओएसडी अर्थात् विशेष कत्र्तव्य अधिकारी के रूप में विश्व के इस सबसे बड़े आयोजन का नेतृत्व करेंगे। इस पद पर रहते हुए श्री डाड म.प्र. के मुख्यमंत्री को सिंहस्थ 2028 की तैयारी व व्यवस्थाओं को लेकर सीधे रिपोर्ट करेंगे।


Hot this week

Sri Maheshwari Times- March 2026 Edition

Check out Sri Maheshwari Times March 2026 'Mahila Visheshank'...

Varshika Gaggar को अमेरिका मे गोल्ड मेडल

नागौर। स्व. श्री महादेवजी एवं स्व. श्रीमती गीता देवी...

Sri Maheshwari Times- February 2026 Edition

Check out Sri Maheshwari Times February 2026 Edition on...

Ashva Ratna Mudra for Concentration

अश्व रत्न मुद्रा (Ashva Ratna Mudra) का अभ्यास एकाग्रता...

साझा संस्कृति के आधार- National Festivals

आप सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। हमारा...

Topics

Sri Maheshwari Times- March 2026 Edition

Check out Sri Maheshwari Times March 2026 'Mahila Visheshank'...

Varshika Gaggar को अमेरिका मे गोल्ड मेडल

नागौर। स्व. श्री महादेवजी एवं स्व. श्रीमती गीता देवी...

Sri Maheshwari Times- February 2026 Edition

Check out Sri Maheshwari Times February 2026 Edition on...

Ashva Ratna Mudra for Concentration

अश्व रत्न मुद्रा (Ashva Ratna Mudra) का अभ्यास एकाग्रता...

साझा संस्कृति के आधार- National Festivals

आप सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। हमारा...

Kale Til Ke Kachuriya

यह गुजराती डिश है पारंपरिक और ठंड में, उत्तरायण...

Aarav Daga बने चैंपियन ऑफ चैंपियंस

बठिंडा। आरव डागा (Aarav Daga) सपुत्र राजेश डागा ने...

Pallavi Laddha को शक्ति वंदनम पुरस्कार

भीलवाड़ा। अखिल भारतीय माहेश्वरी महिला अधिवेशन अयोध्या में आयोजित...
spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img