गरीब परिवारों में बेटियों की इच्छा अक्सर इसलिये पूरी नहीं की जाती क्योंकि उनके विवाह का खर्च उनके लिये एक बड़ी चुनौती होती हैं इस स्थिति में गरीब ब्राह्मण परिवारों की बेटियों के विवाह की जिम्मेदारी वहन कर बालिका संरक्षण को संबल दिया है, रोडा (जिला बीकानेर) की विद्या डागा ने।
ऐसा ही एक इतिहास रचा है, श्रीमती विद्या किशनजी डागा सुपुत्री बंशीलाल राठी ने। बीकानेर जिला की नोखा तहसील में एक छोटा सा गाँव है रोडा, इसमें माहेश्वरी समाज की बेटियों द्वारा छ: ब्राह्मण कन्याओं व तुलसी जी का विवाह 8 नवम्बर 2019 को सुव्यवस्थित रूप से संपन्न करवाया गया। इसमें करीब 2500 लोगों की उपस्थिति रही। कन्या परिणय उत्सव के इस पुनीत कार्य को करने की हिम्मत जो विधा डागा ने दिखाई वो तारीफे काबिल है। श्रीमती डागा ने छह महिने से ज्यादा समय मेहनत की थी, इस कार्यक्रम को मूर्तरूप देने के लिए। यह उन्हीं की मेहनत का परिणाम है कि यह कार्यक्रम इतना सफल रहा।
स्वयं ने किया तीन कन्याओं का दान:
विद्या ने इनमें से ही 3 ब्राह्मण कन्याओं का कन्यादान किया। इतना ही नहीं पूरे गाँव को जोड़कर एक-एक बेटी के नम्बर ढूँढकर उनसे बात करके उन्हें तैयार किया। पूरे रोडा की 285 बेटियों को जोड़कर उनको साथ लेकर चलना बहुत बड़ी बात है। इसमें से करीब 225 बेटियां इस कार्यक्रम में आईं व सभी ने साथ मिलकर इस कार्यक्रम को खुशी व प्रेम से पूरा किया। रोडा के सभी सदस्यों का भी सहयोग रहा। अपने इस प्रयास से उन्होंने सभी को समाजसेवा की एक नई राह दिखाई।
घर की शादी जैसी व्यवस्था:
एक साल की कड़ी मेहतन के फलस्वरूप इस 3 दिवसीय विवाह समारोह में सबसे महत्वपूर्ण व खास बात यह रही कि सारे मांगलिक कार्यक्रमों में माहेश्वरी परिवारों के रीति रिवाजों को अपनाया गया। घी पावना, गीत गाना, मायरा, चिकनी कोथली, मेल-मुद्दा, फेरा व केसरियो लाडो जैसे नियम पालन को देख कर ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो किसी अपने खास की शादी में ही शामिल होने गए हो। सभी 6 जोड़ों के रिश्तेदारों के आदर सत्कार के लिए अलग-अलग सुंदर टेंट व रिसेप्शन की व्यवस्था भी की गई। देश-विदेश में रहने वाली रोडा गांव की बहनों,बेटियों, बुआ-भतीजी सब को एक छत के नीचे इकट्ठा कर इस विवाह उत्सव का आयोजन करवाकर श्रीमती डागा ने सामंजस्य की एक नई मिसाल कायम की।


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