परिचय

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श्री माहेश्वरी टाईम्स आज आम समाजजनों के लिए सिर्फ एक पत्रिका नहीं बल्कि समाज की वह ‘बुलंद आवाज’ है, जो समाजहित के मुद्दे पर दबाई नहीं जा सकती। अपनी इस सेवा यात्रा में श्री माहेश्वरी टाईम्स 18 वर्षों की यात्रा सफलतापूर्वक पूर्ण कर चुकी है। उसकी सफलता की इस यात्रा का श्रेय उन सभी स्नेहील पाठकों व सहयोगियों को जाता है, जिनके स्नेह ने इसे सदैव संबल दिया। परिचय:

श्री माहेश्वरी टाईम्स

श्री माहेश्वरी टाईम्स की 18 वर्षों की यह यात्रा कुछ भिन्न हैं। इसमें संघर्ष तो है, लेकिन इसके साथ इसमें अपनों का स्नेह व संबल भी समाहित है। यह स्नेह व संबल ही वह शक्ति है, जिसने मात्र 18 वर्षों की इस अल्पावधि में श्री माहेश्वरी टाईम्स को देश की शीर्ष सामाजिक पत्रिकाओं में प्रतिष्ठित कर दिया है।

लगभग 3.5 लाख से अधिक पाठकों का स्नेहील पाठक परिवार इस उपलब्धि की कहानी स्वयं कहता है। उत्कृष्ट संपादन व तथ्यपूर्ण उच्चस्तरीय पाठ्य सामग्री यही श्री माहेश्वरी टाईम्स की विशिष्ट पहचान बन चुकी है। इनको सराहे बिना कोई नहीं रहता। आकर्षक कलेवर में बहुरंगी रूप में यह इस तरह प्रकाशित हो रही है कि प्रथम दृष्टि में भी हर माहेश्वरी इस पर गर्व कर सकता है।


‘समाज की सेतु’ वाली सोच से शुरुआत

माहेश्वरी समाज अत्यंत कर्मशील समाज है। अतः समाजजन अपने मूल स्थल राजस्थान से निकलकर देश के कोने-कोने और फिर विश्व के कोने-कोने में स्थापित होते चले गए। वे जहां भी गए अपनी तीक्ष्ण बुद्धि व व्यवसाय कौशल का परचम फहराने में पीछे नहीं रहे। यह इसका अच्छा पक्ष है लेकिन इसका दूसरा पक्ष यह भी है कि इससे बढ़ती व्यस्तता के कारण समाजजनों के परस्पर संपर्क समिति होते चले गए और उनके बीच परस्पर संवाद भी सिमटते चले गए। इससे समाज की एकता प्रभावित हो रही थी। अतः भगवान महाकालेश्वर की नगरी उज्जैन के ख्यात प्रकाशन समूह ‘ऋषि-मुनि’ ने प्रबुद्धजनों के परार्मशनुसार इन स्थितियों में ‘संवाद सेतु’ तैयार करने का निर्णय लिया।

इसके लिए प्रकाशक पुष्कर बाहेती के संपादन व श्रीमती सरिता बाहेती के प्रबंध संपादन में सामाजिक पत्रिका ‘श्री माहेश्वरी टाईम्स’ के प्रकाशन की योजना बनाई गई। दीर्घावधि की सोच तथा योजनानुसार तैयारी के बाद ‘श्री माहेश्वरी टाईम्स’ की शुरुआत अगस्त 2005 में प्रथम प्रवेशांक के प्रकाशन से हुई। इसके प्रेरणास्रोत स्व. श्री बंशीलाल बाहेती थे। इसके प्रथम अंक का विमोचन मप्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री बाबूलाल गौर ने किया था। शुरुआत तो अत्यंत सीमित प्रतियों से हुई लेकिन पाठकों का जो स्नेह व संबल मिला, उससे इसे वटवृक्ष की तरह वृहद स्वरूप लेने में समय नहीं लगा। आज जो स्थिति है, सबके सामने है। 


सभी के स्नेह को नमन- श्री बाहेती

श्री पुष्कर बाहेती

श्री माहेश्वरी टाईम्स संपादक पुष्कर बाहेती का कहना है कि आज श्री माहेश्वरी टाईम्स जो भी है, वह पाठकों के आशीर्वाद व उनके स्नेह का परिणाम है। जब इसकी शुरुआत हुई तब सभी ने कहा था कि यह 2-3 महीनों में बंद हो जाएगी। जब इस दौर में बड़ी पत्रिकाएं भी नहीं टिक पा रही तो यह क्या चलेगी? लेकिन हुआ कुछ और ही। कहते हैं कि हर अच्छे कार्य में ईश्वर सहयोगी बनता है, बस वही सबकुछ यहां भी हुआ।

लक्ष्य समाज के लिए कुछ अच्छा करना था लगा जैसे भगवान महेश साक्षात सहयोगी बनते चले गए। कई बार विकट परिस्थितियां बनीं लेकिन उनका समाधान कैसे निकला, यह भी समझ से परे ही रहा। कई बाधाएं आई लेकिन इसके कदम थमने की जगह और भी तेज गति से बढ़ते ही चले गए। जिस तरह कई प्रबुद्ध कलमकारों और विज्ञानपदाताओं का संबल मिला, सब ईश्वर का आशीर्वाद ही है।


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Sri Maheshwari Times
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2 COMMENTS

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