वर्धा। शासकीय गाईडलाइन एवं सोशल डिस्टेंसिंग के चलते महिलाओं को दो सालों से ‘पीहर’ जाने से कोरोना ने रोक रखा है। किसी भी विवाहित और किसी भी उम्रदराज की महिला के लिए ‘पीहर’ सबसे अनमोल जगह है। इसी से संबंधित ‘एक पाती पीहर के नाम’ जैसे विषय पर जिला मारवाड़ी सम्मेलन की ओर से राज्य स्तर पर पत्र लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था।
पत्र लेखन की कला अब सोशल मीडिया के चलते प्राय: लुप्त हो गई है। ऐसे में एक स्त्री को अपने पीहर की यादों से सुसज्जित सभी रिश्ते नातों को सहेजते हुए सीमित शब्दों में पत्र लिखना था। देश भर में कोई भी महिला जिसका पीहर महाराष्ट्र में हो वह इस प्रतियोगिता का हिस्सा बन सकती थी।
अपने शब्दों से भावनाओं को सहेजते हुए पीहर की हर याद को शब्दों में पिरोते हुए सभी रिश्तों को नमन करते हुए अलका राजकुमार जाजू, ने अपने माता-पिता को पत्र लिखा। इसे सराहते हुए उन्हें प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया। विदित हो कि अलका जाजू को इससे पूर्व कई निबंध एवं लेखन प्रतियोगिता में विदर्भ, राज्य तथा राष्ट्र स्तर पर प्रथम पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।









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