मुलाहिजा फरमाइये
पढ़िए इस माह का "मुलाहिजा फरमाइये" ज्योत्सना कोठारी की कलम से।'ना फिसलो इस उम्मीद में, कि कोई तुम्हे उठा लेगा,सोच कर मत डूबो...
मैं इत्र से महकूँ ये आरज़ू नहीं…
मैं इत्र से महकूँ ये आरज़ू नहीं…कोशिश है मेरे किरदार से खुशबू आये !!दर्द दुल्हन का किसी ने समझा ही नही साहब…हिचकियाँ खो गयी...
फुर्सत में करेंगे तुझसे हिसाब-ए-ज़िन्दगी?
पढ़िए इस महीने का मुलाहिजा फरमाइये- फुर्सत में करेंगे तुझसे हिसाब-ए-ज़िन्दगीअभी तो उलझे है खुद को सुलझाने में?कभी इसका दिल रखा और कभी उसका...
“तू क्या-क्या कर रहा है” – ज्योत्सना कोठारी
ख़्वाईशो के बोझ में बशीर..तू क्या क्या कर रहा है..इतना तो जीना भी नहीं…जितना तू मर रहा है…तूँ भी खामख्वाह, बढ रही है,...

