डिप्रेशन एक गंभीर बीमारी है,

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डिप्रेशन – आमतौर पर हमें कोई भी अधिक उदास या चुपचाप दिखा तो हम उसे मात्र उसकी कुछ मानसिक परेशानी मानकर नजर अंदाज कर देते हैं। यह स्थिति लंबे समय तक रहे तो इस पागलपन का नाम दे देते हैं। लेकिन हकीकत देखी जाए तो यह चिकित्सकों की नजर में अपने आप में एक बीमारी है, जिसका नाम है डिप्रेशन।

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट डिप्रेशन एंड अदर कॉमन मेंटल डिसऑर्डर्स ग्लोबल हेल्थ एस्टिमेट्स’ 2017 के हिसाब से इंडिया में 4.5 प्रतिशत लोग डिप्रेशन का शिकार हैं। इसी तरह ‘नेशनल मेंटल हेल्थ सर्वे’ की रिपोर्ट जो बैंगलुरु ने 12 प्रदेशों में की है।

उसके हिसाब से 2.7 प्रतिशत लोग भारत में डिप्रेशन का शिकार है। हमारी प्रैक्टिस में अक्सर यह देखा जाता है, आम लोग यह मान लेते हैं कि डिप्रेशन पागलपन है।

मगर ऐसा मानना सही नहीं है क्योंकि डिप्रेशन भी एक बीमारी है। ठीक उसी तरह जैसे कि डायबिटीज एक बीमारी है, हाइपरटेंशन एक बीमारी है और इन्हीं बीमारियों को तरह डिप्रेशन के भी परिभाषित कारण और लक्षण होते हैं।

लोग अक्सर यह भी मान लेते हैं कि डिप्रेशन होना एक कमजोरी का संकेत है या फिर उस व्यक्ति को जिसे डिप्रेशन है वह समाज के बाकी लोगों से कमजोर है परंतु ऐसा नहीं है क्योंकि यह किसी को भी हो सकता है और किसी भी उम्र में हो सकता है। डिप्रेशन बच्चों व बुजुर्गों और वयस्कों सभी में पाया जाता है।

इसके बारे में अनुसंधान से यह साबित किया जा चुका है कि इसे परिभाषित शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक कारण होते हैं। किसी अन्य बीमारी की तरह ही यह शरीर में कुछ रसायनों में फेरबदल होने के कारण होता है और अगर सही समय पर इसका इलाज लिया जाए तो यह पूरी तरह से ठीक हो सकता है।

लक्षणों से ही होती पहचान :

जिस तरह अन्य बीमारियों के अपने लक्षण होते हैं, वैसे ही डिप्रेशन के कुछ लक्षण होते हैं जो पहचानना बहुत जरूरी है। अगर इन्हें ठीक से पहचाना जाए तो बहुत सी समस्याओं से बचा जा सकता है।

इसके लक्षणों में अत्यधिक उदास रहना या बिल्कुल खुशी महसूस ना करना। किसी भी कार्य में मन न लगना। अत्यधिक थकान महसूस करना। जिन कार्यों में पहले खुशी मिलती थी उनमें खुशी महसूस ना करना। चिड़चिड़ापन महसूस करना। भविष्य के प्रति नकारात्मक सोच आना। अपने आप को बिना कारण दोषी समझना। बहुत कम या बहुत ज्यादा नींद आना। बहुत कम या बहुत ज्यादा भूख लगना। आत्महत्या के विचार आना आदि शामिल हैं।

आत्महत्या का एक प्रमुख कारण:

इसके अलावा डिप्रेशन की और भी जटिलताएं होती हैं और इंसान इनसे भी परेशान हो सकता है जैसे बहुत बेचैनी रहना। शराब का या अन्य किसी पदार्थ का नशा करना, सेक्स संबंधी समस्याएं आदि इससे से उत्पन्न होने वाली सबसे मुख्य परेशानी आत्महत्या है। आत्महत्या ना सिर्फ एक निजी क्षति है बल्कि यह एक सामाजिक क्षति भी है।

हर साल हमारे देश में लगभग 3 लाख लोग आत्महत्या करते हैं और इसका मुख्य कारण डिप्रेशन है। ध्यान देने की बात यह है कि अगर सही समय पर सलाह ली जाए तो इस क्षति से बचा जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि हम सामाजिक तौर पर डिप्रेशन और आत्महत्या के बारे में खुलकर बात करें और इन बीमारियों से संबंधित गलतफहमियां और निषेध खत्म करने का प्रया करें।

चिकित्सक का परामर्श जरूरी:

इनमें से कुछ लक्षण अथवा सभी लक्षण या डिप्रेशन की जटिलताएं किसी भी इंसान को परेशान कर रही हों तो उन्हें तुरंत अपने डॉक्टर या मनोरोग विशेषज्ञ को कंसल्ट करना चाहिए। डिप्रेशन का पूर्ण इलाज दवाइयों एवं काउंसलिंग के माध्यम से संभव है इसलिए इन समस्याओं को टालना नहीं चाहिए और मदद लेनी चाहिए।

डिप्रेशन के इलाज में परिवार सदस्यों, दोस्तों और रिश्तेदारों के समर्थन की भी अहम भूमिका होती है और उनकी मदद भी लेनी चाहिए। अंततः डिप्रेशन को सही समय पर पहचान कर इलाज लिया जाए तो समाज से और देश से इस जटिल बीमारी को मिटाया जा सकता है।


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