आमूलचूल परिवर्तन कर सकता है माणिक्य

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सूर्य सभी ग्रहों का राजा है और माणिक्य सूर्य ग्रह का रत्न। अत: जब सूर्य जन्मकुण्डली में किसी भी कारण से कमजोर हो तो माणिक्य धारण करने की ज्योतिष शास्त्र सलाह देते हैं। वैसे फिर भी योग्य ज्योतिष विद्वान के मार्गदर्शन व परामर्श के अनुसार ही इसे धारण करना चाहिये।

भारतीय ही नहीं वरन समस्त ज्योतिष पद्धतियों में सूर्य ग्रह को सर्वाधिक महत्व दिया गया है। पाश्चात्य ज्योतिषियों का इसे अधिक महत्व देने का कारण इसी के द्वारा समस्त ग्रहों का प्रकाशित होना कहा है, तो भारतीय विद्वानों ने एक शब्द मात्र ‘‘ग्रहों का राजा’’ कहकर इसे सर्वश्रेष्ठ व सबसे प्रभावी सिद्ध कर दिया है। यही कारण है कि सूर्य ग्रह की तरह इस ग्रह का रत्न ‘‘माणिक्य’’ धारण करने पर चमत्कारिक प्रभाव मिलता है।

सूर्य जब जन्मकुण्डली में मेषादि बारह राशियों में से किसी में स्थित हो और नवांश कुण्डली में यह नीच राशि या शत्रु राशि गत, शत्रु नवांश में, बलहीन होकर स्थित हो, तो सूर्य ग्रह से सम्बन्धित श्रेष्ठ फल नहीं मिलते। ऐसी स्थिति में माणिक्य धारण करना श्रेष्ठ होता है। यह समस्त बारह राशियों में सूर्य की स्थिति में भी शुभफल देता है।


मेष- जठराग्नि, लू लगना गर्मी से होने वाले रोग, नेत्र रोग, हृदयरोग, हड्डी संबंधी रोगों में लाभ प्रदान करने के साथ ही उच्चशिक्षा में सफलता, विद्युत संबंधी कार्यक्षेत्र, उच्चशिक्षा में व्याख्याता, सेल्समेनशिप, एजेन्सी व्यापार, प्रशासनिक कार्यों में सफलता प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता, राज्यसत्ता की प्राप्ति, उच्चपद की प्राप्ति, इत्यादि में माणिक्य लाभप्रद होता है।
वृष- त्रिदोष से उत्पन्न रोगों में लाभ, संस्कृति एवं कलाजगत से जुड़े सभी कार्य, कृषिभूमि एवं इससे जुड़े सभी कार्य, बैंक, बीमा और वित्त संबंधी कार्य, जिल्दकारी एवं प्रिंटिग से जुड़े कार्य, कलाकारों एवं चिकित्सा जगत से जुड़े सभी प्रकार के व्यक्तियों को माणिक्य रत्नधारण करना लाभप्रद होता है।
मिथुन- श्वासरोग, दमा से लाभ डाकविभाग, कोरियर सर्विस, रेल्वे में कार्यरत सभी स्तर के कर्मचारी, पत्रकारिता से जुड़े लोग, फोटोग्राफी एवं वीडियो शूटिंग से जुड़े कार्य, कम्प्यूटर क्षेत्र, विज्ञापन एजेन्सी, अखबार विक्रेता, उच्च लेखापाल, सी.ए., आइ.सी.डब्ल्यू.ए., सी.एस., एम.बी.ए में अध्ययनरत विद्यार्थी, सम्पादन से जुड़े लोग आदि को लाभ प्राप्त होता है।
कर्क- भोजन में अरूचि होना वात (वायु) संबंधी रोग, मनोविकार (टेंशन, डिप्रेशन), कमजोर मस्तिष्क, शोधार्थी पानी से बनने वाले उत्पाद, अभिनय एवं रंगमंच से जुड़े सभी कलाकार, कपड़ों के उत्पादक एवं विक्रेता, पुस्तकों के लेखक, प्रकाशक विक्रेता, होटल व्यवसाय से जुड़े लोग, नर्सिंग कार्यों से जुड़े लोगों को यह रत्न धारण लाभप्रदान करता है।
सिंह- प्रत्येक कार्य में सफलता शासकीय सेवारत कर्मचारियों को पदोन्नति, उनकी वेतनवृद्धि, उच्चपदों की प्राप्ति, शासन से सम्मान, उच्चाधिकारियों से मधुर संबंध बनाना, विश्वविद्यालयों में उच्च पदासीन अधिकारी, संस्था एवं अकादमियों के निदेशक आदि को यह लाभप्रद होता है।
कन्या- किराना व्यापार में सफलता, खाद्य पदार्थों के निर्माण एवं विक्रयकर्ता, सब्जी एवं फल व्यवसायी, वनस्पति और औषधि विक्रेता, फूल व्यवसायी, चित्रकार, साईन बोर्ड एवं फ्लैक्स बनाने वाले, वाणिज्य एवं प्रबंधन विषय में अध्ययनरत विद्यार्थी, शिक्षण संस्थान, शिक्षा निदेशक, बैंक एवं बीमा संबंधी परीक्षा इत्यादि क्षेत्रों में माणिक्य रत्न लाभ करता है।
तुला- बुद्धि द्वारा श्रम से लाभ, निर्णयन क्षमता, मजबूत होना, शरीर का संतुलन ठीक रहना, संगीत क्षेत्र से जुड़े सभी प्रकार के लोग, कलाकृतियों का निर्माण, घर दुकान एवं शोरूम की सजावट का कार्य, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्र्रीय संगठनों एवं दलों के प्रमुखों की उन्नति इत्यादि क्षेत्र एवं संबंधित लोगों को माणिक्य रत्न लाभ प्रदान करता है।
वृश्चिक- लोहा, तिल्ली, संग्रहणी और पाण्डुरोग में लाभ, दवाउपकरणों के निर्माता और विक्रेता, सर्जन, दंतरोग विशेषज्ञ, पुलिस के खुफिया विभाग में कार्यरत कर्मचारी, अग्नि और विद्युत विभाग के कर्मचारी, विद्युत उपकरणों के निर्माता और विक्रेता इत्यादि क्षेत्रों के लिये लाभप्रद होता है।
धनु- पैर एवं कमर में चोट लगने से बचाव तथा आंत संबंधी रोगों में लाभ, क्रिकेट, फुटबाल, बेडमिंटन इत्यादि प्रकार के खेलों के खिलाड़ी, शिक्षा विभाग एवं इससे जुड़े सभी संस्थान एवं प्रमुख, संस्कृतभाषा एवं इससे जुड़े सभी लोग धार्मिक एवं संस्कृति विभाग के नेता, अधिकारी, आयुक्त और कर्मचारी, वेधशाला में कार्यरत कर्मचारी अधिकारी, कर्मकाण्डकर्ता, खगोलशास्त्री, धार्मिक साहित्य के प्रकाशक और विक्रेता आदि को लाभप्रदान करता है।
मकर- पेट संबंधी बीमारियों में लाभ, स्नायुविकार, भोजन में अरूचि, भूमि के लेनदेन संबंधी कार्य, शोधकर्ता, ग्रंथों एवं पुस्तकों के लेखक, प्रकाशक, विक्रेता, ठेकेदारी से संबंधित सभी कार्यों को करने वाले प्रत्येक क्षेत्र के डिजाइनर, इन्टरप्राइजेस में कार्यरत लोगों को यह रत्न लाभ करता है।
कुंभ- क्षयरोग, हृदयरोग इन्फ्लूएंजा तथा कफसंबंधी रोगों में लाभ, गायन, वादन एवं नृत्य से जुड़े कलाकार, संगीत क्षेत्र से जुड़े लोग, वाद्ययंत्रों के निर्माता, लकड़ी का कार्य करने वाले कारीगर, वनविभाग के मंत्री, अफसर तथा कर्मचारी, आरामशीन संचालक, पेट्र्रोलियम पदार्थों का कार्य करने वाले लोग, उत्खनन कार्य में लगे सभी लोगों को यह रत्न धारण करना लाभप्रद होता है।
मीन- शीत संबंधी रोग, सर्दी जुकाम में लाभ, जल से होने वाली सभी बीमारियों में लाभ, नौ सेना से जुड़े सभी लोग, चित्रकार, रंगाई पुताई करने वाले लोग, अकाउंटेंट, ग्रंथपाल, उपन्यासकार, संपादक-प्रकाशक एजेंसी संबंधी कार्य करने वाले समस्त लोगों को यह रत्न धारण करना लाभप्रद होता है।


माणिक्य रत्न को खरीदने, बनवाने, लाने और धारण करने का कार्य कृतिका, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, चित्रा, विशाखा, उत्तराषाढा, श्रवण, घनिष्ठा एवं पूर्वा भाद्रपद नक्षत्रों में करें। पूर्णशुद्ध माणिक्यरत्न को उपर्युक्त में से किसी भी एक नक्षत्र में खरीदकर सर्वप्रथम उसे शुद्धजल अथवा कच्चे दूध से अभिषेक करके पूजन वाले स्थान पर रखें।

सात दिन तक पूर्व दिशा में मुख करके 21 बार प्रतिदिन ‘‘ॐ घृणिः सूर्याय नमः।’’ इस मंत्र का जप करें। इसके बाद उपर्युक्त नक्षत्रों में ही रवि, सोम, मंगल, गुरू इन वारों को लाभ शुभ के चौघडिये में शुभ संकल्पित होकर दाएं हाथ की तीसरी अंगुली में स्वर्ण, ताम्र अथवा पंचधातु या त्रिधातु में बना हुआ रत्न धारण करे।


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