भारतीय शास्त्रों में ऐसी कई महत्वपूर्ण मुद्राएं हैं, जो समग्र स्वास्थ्य के लिए कई तरह से लाभदायक हैं। उनमें से क्षेपण मुद्रा एक वरदान है क्योंकि यह हमारे शरीर, आत्मा और दिमाग पर सकारात्मक प्रभाव डालती है। रोजाना इस मुद्रा का अभ्यास करना हर उम्र के व्यक्ति के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।

कैसे करें
दोनों हाथों की तर्जनी उंगली को आपस में मिलाकर हाथ सीधे रखें और शेष तीनों उंगलियों और अंगूठों को आपस में फंसाकर इस प्रकार रखें कि उंगलियों का अग्रभाग दूसरे हाथ के पृष्ठ भाग से सट जाएं। जब बैठें तो तर्जनी उंगलियों की दिशा नीचे की ओर करें और लेटे हों तो पैरों की ओर। इस स्थिति में हाथों को ढीला छोड़ दें। इस मुद्रा में अपने श्वासों को देखें और ध्यान श्वास की रेचक क्रिया पर हो। इस मुद्रा के अभ्यास के दौरान उंगलियों को अधिक न दबाएं, बल्कि सामान्य रूप से मुद्रा रखें।
क्या है इसका लाभ
शरीर में जमी गंदगी को निकालने के लिए इस मुद्रा का विशेष महत्व है। कब्ज नहीं होती। बड़ी आंत ठीक से काम करती है। पसीना अच्छे से निकलता है। फेफड़ों से कार्बन डायआक्साईड अच्छी प्रकार से बाहर निकलती है।
यह मुद्रा सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा, क्रोध, अटपटे विचार, मानसिक तनाव को समाप्त करती है और हमारे भीतर सकारात्मक सोच भरती है। सकारात्मक उर्जा का प्रवेश होता है। पांचों तत्त्वों का मल बाहर निकलता है। इसे उज्जायी प्राणायाम के साथ करने से अधिक लाभ होता है।
क्या रखें सावधानी
इस मुद्रा को अधिक देर तक न करें। केवल 7 से 8 श्वास प्रश्वास तक ही करें। क्योंकि अधिक देर तक करने से सकारात्मक ऊर्जा भी बन्द हो जाती है। अगर किसी की हाल ही में कोई सर्जरी हुई है तो उसे इस मुद्रा को नहीं करनी चाहिए। इस मुद्रा का अभ्यास करते समय नाक से ही सांस लें।










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