हमारे देश का रहस्यपूर्ण शब्द है बोधिसत्त्व। बोधि का अर्थ है- अन्तर्ज्ञान, परमज्ञान, अव्यक्त ज्ञान। सत्त्व का अर्थ है निर्भयता, निडरता, वीरता। उक्त परिभाषा के अनुसार इस मुद्रा का अभ्यास अन्तर्ज्ञान की प्राप्ति एवं निर्भय दशा की उपलब्धि निमित्त किया जाता है।

कैसे करें
बोधिसत्त्व मुद्रा बनाने के लिए पहले दाहिने हाथ से ज्ञान मुद्रा करके हृदय के पास (समभाग) रखें। फिर बायें हाथ से ज्ञान मुद्रा बनाकर दाहिने हाथ के ऊपर इस तरह रखें कि दोनों हाथों के अंगूठे और तर्जनी एक दूसरे से युक्त हों इस तरह बोधिसत्त्व ज्ञान मुद्रा होती है। सुखासन या वज्रासन में स्थित होकर इस मुद्रा का 15 मिनट नियमित रूप से प्रयोग करना चाहिए।
लाभ
ज्ञान मुद्रा में बताये गये सभी तरह के अच्छे परिणाम इस मुद्रा के प्रयोग से भी हासिल होते हैं। इसके अतिरिक्त ध्यान साधना में अपेक्षाधिक प्रगति होती है। इसी के साथ अभ्यास के अनुरूप वैचारिक निर्मलता, बौद्धिक क्षमता एवं ज्ञानावरणी कर्म का क्षयोपशम होता है। अनुभवियों के मतानुसार ज्योति केन्द्र (ललाट के मध्यभाग) पर श्वेत प्रकाश बिखरता दिखाई देता है।
इस मुद्रा द्वारा ये शक्ति केन्द्र भी सक्रिय
चक्र- स्वाधिष्ठान एवं मणिपुर चक्र तत्त्व-जल एवं अग्नि तत्त्व ग्रन्थि-प्रजनन, एड्रीनल एवं पैन्क्रियाज ग्रन्थि केन्द्र-स्वास्थ्य एवं तैजस केन्द्र विशेष प्रभावित अंग-प्रजनन अंग, मल-मूत्र अंग, पाचन तंत्र, नाड़ी तंत्र, यकृत, तिल्ली, आँतें आदि।














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