विघ्नों को दूर भगाती- गणेश मुद्रा

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हमारे सनातन धर्म में कोई भी शुभ कार्य आरम्भ गणेश जी की पूजा से करते हैं, ताकि कार्य में कोई विघ्न नहीं पड़े। गणेश को इसीलिये विघ्नेश्वर कहते हैं। जो काम हम पूजा अर्चना से करते हैं, वही काम हम दोनों हाथों की मुद्रा बनाकर भी कर सकते हैं। गणेश मुद्रा वह है, जिससे तन और मन दोनों स्वस्थ अर्थात् निर्विघ्न होते हैं।

Shivnarayan-Mundra

विधि

बायां हाथ हृदय के सामने लाकर हथेली बाहर की ओर रखें। दूसरे हाथ की हथेली को हृदय की ओर करते हुए दोनों हाथों की उंगलियों का आपस में फसायें। श्वास भरते हुए अपने हाथों को हृदय के सामने की ओर तानें। श्वास छोड़ते हुए ढीला छोड़ें, 5 बार ऐसा करें। फिर हाथों की दिशा पलटते हुए अर्थात् दायीं हथेली बाहर की ओर और बायीं हथेली हृदय की ओर करते हुए हाथों को खींचे। शक्ति के साथ श्वास भरते हुए अंगूठे भी उंगली के साथ मिलाइये, अलग न हों। कोहनियों को तिरछा करते हुए भी इस मुद्रा को कर सकते हैं। इस प्रकार से करने के बाद इसी मुद्रा में हाथों को छाती से लगाएं।


लाभ

  • इस मुद्रा से अनाहत चक्र (हृदय चक्र) प्रभावित होता है और चूंकि हृदय चक्र नीचे के तीनों चक्रों पर नियंत्रण करता है, इसीलिये मणिपुर चक्र, स्वाधिष्ठान चक्र और मूलाधार चक्र भी प्रभावित होते हैं।
  • इस मुद्रा से आत्मविश्वास बहुत बढ़ता है, स्फूर्ति आती है और हिम्मत बढ़ती है और हम कठिन से कठिन काम भी आसानी से कर सकते हैं।
  • हृदय की मांस पेशियां मजबूत होती है, हृदय की धमनियों में रक्त, बढ़ता है और हृदय रोग नहीं होते हैं। हृदय की रक्त पम्पिंग प्रणाली सुचारु रूप से काम करती है और रक्त संचार ठीक से होता है।
  • हमारे हाथों की उंगलियों के अग्रभाग में साईनस के बिन्दु हैं। जब हम उंगलियों का ग्रिप बनाकर खींचते हैं तो ये सारे बिन्दु क्रियाशील हो जाते हैं। इससे साईनस, नजला, जुकाम और श्वास नलिकाएं भी साफ हो जाती हैं। उनमें जमा श्लेष्मा बाहर निकलता है।
  • जब हाथों का ग्रिप बनाकर हाथों को दाएं-बाएं, ऊपर-नीचे छाती चौड़ी होती है, फेफड़ों का विस्तार होता है और श्वास रोग नहीं होते है।
  • हाथों को खींचने से हाथों और भुजाओं की नस नाडियां, कन्धों की मांसपेशियां भी सबल होती हैं।
  • इस मुद्रा से अग्नि तत्व बढ़ता है। शरीर में गर्मी उत्पन्न होती है तथा हम उदारवादी बनते हैं। जिन लोगों के हाथ-पैर ठंडे रहते हैं, वे कफ प्रकृति के होते हैं। ऐसे व्यक्तियों के लिये गणेश मुद्रा बहुत लाभदायक है।

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