योग मुद्रा वह आसान प्रक्रिया है, जिसे किसी भी उम्र में किया जा सकता है। इस बार प्रस्तुत है, सोहम् मुद्रा (Soham Mudra)जो नई ऊर्जा का संचार करती है।
हमारे शरीर में 70 जल ही है। रक्त का 80 से 90 भाग जल ही है। हमारे रक्त का 25 भाग केवल मस्तिष्क को ही चाहिये। रक्त में जल की थोड़ी सी भी कमी होने पर हमारा मस्तिष्क ठीक से काम नहीं करेगा। तब उदासी, अवसाद आरम्भ हो जाता है। इस मुद्रा में जब अंगूठे को जल तत्व वाली उंगली की जड़ में लगाते हैं, तो जल तत्व की पूर्ति होती है। इसका मस्तिष्क पर सीधा सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। साथ ही जब श्वास भरते हुए ओम् की लम्बी ध्वनि करते हैं तो इस ध्वनि की तरंगें मस्तिष्क को बल देती हैं। मानसिक रोगों को दूर करने के लिये यह अद्भुत मुद्रा है।

कैसे करें
अपने दोनों हाथों को जंघाओं पर रखें। अंगूठे को कनिष्ठा छोटी उंगली जो जल तत्व की द्योतक है, उसकी जड़ में लगाकर धीरे-धीरे श्वास भरते हुए अपनी चारों उंगलियों से अंगूठे को घेर लें और ओम् की लम्बी ध्वनि सात बार करें और ध्वनि की गूंज को दाएं कान से सुनें। धीरे-धीरे श्वास बाहर करते हुए पेट की मांसपेशियों को संकुचित करें उड्डियान बन्ध लगाएं। अब अपने हाथ खोलें। और अब कल्पना करें कि आपकी सारी चिन्ताएं, सारी वेदनाएं, सारे भय, सारे दुख दूर हो रहे हैं। इस क्रिया को कम से कम सात बार करें।
लाभ
- यह मुद्रा अवसाद यानि डिप्रेशन तथा तनाव को दूर करती है।
- उदासी को दूर करती है।
- दुर्भाग्य से बचाती है।
- हमारे भीतर एक नई ऊर्जा, एक नया उत्साह पैदा करती है।
- हमारे मस्तिष्क को बल प्रदान करते हुए मानसिक शक्तियों को बढ़ाती है। आत्म विश्वास बढ़ता है।
इस मुद्रा को करने के बाद हाथ-पैरों को तानें तो लाभ बढ़ जायेगा। हम सभी जानते हैं कि सुस्ती को भगाने के लिये शरीर को ताना जाता है। मानसिक कार्य करने वालों को प्रत्येक घंटे बाद एक गिलास पानी पीना चाहिए।














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