यदि आप बार-बार छींकने और उबासी आने से परेशान हैं, तो इससे छुटकारा पाने के लिए अदिति मुद्रा करें। यह समस्या शरीर में पृथ्वी तत्व की कमी के कारण पैदा होती है। इसका कारण एलर्जी, संक्रमण, मौसम परिवर्तन या फिर प्रदूषण भी हो सकता है।
अदिति मुद्रा पृथ्वी और अग्नि तत्व के मिलन से निर्मित होती है। हमारी अनामिका उंगली पृथ्वी तत्व का प्रतिनिधित्व करती है और हमारा अंगूठा अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। यह मुद्रा पृथ्वी और अग्नि तत्वों की वृद्धि में मदद करती है।

कैसे करें: अगूठे के अग्रभाग को अनामिका के मूल पर रखकर, तर्जनी, मध्यमा, अनामिका और कनिष्ठिका, इन चारों अंगुलियों को एक दूसरे के पास सीधी रखते हुए अदिति मुद्रा बनती है। अंगूठा थोडा सा तिरछा रहेगा।
लाभ: उबासी और छींक रोकी जा सकती है। साधना करते समय आये आलस को दूर करती है। इस मुद्रा से गहरे ध्यान में जाया जा सकता हैं, इसलिए इसे तीर्थकर मुद्रा भी कहते हैं। यह मुद्रा करके हथेली के पीछे के हिस्से को आसमान की ओर रखने से स्थापिनी मुद्रा बनती है।
भगवान की प्रतिमा की स्थापना करते समय इस मुद्रा का प्रयोग किया जाता है। आदिति मुद्रा, दोनों हाथ पास में रखकर भी बनायी जाती है यानि कि दोनो हाथो से अदिति मुद्रा करके अंजलि बनाकर देवों का आवाहन किया जाता है। यह मूलाधार चक्र (रूट चक्र) को उत्तेजित और संतुलित करता है।
इसके नियमित अभ्यास से शरीर की पाचन अग्नि बढ़ती है और चयापचय नियंत्रित होता है। यह कब्ज, पेट फूलना और पाचन संबंधी समस्याओं में मदद करती है। इससे व्यक्ति में दया, करुणा, क्षमा, कृतज्ञता जैसे भाव जाग्रत होते हैं। कातर भाव से अपने इष्ट देव के समक्ष इस मुद्रा का करने से व्यक्ति के समस्त कष्ट दूर होते हैं।










Got a Questions?
Find us on Socials or Contact us and we’ll get back to you as soon as possible.