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बाल साहित्य की सृजनकर्ता डॉ. विमला भंडारी

बेंजामिन फ्रैंकलिन की पंक्तियां हैं कि ऐसा कुछ लिखे जो पढ़ने लायक हो। इससे भी बेहतर है के ऐसा कुछ करें जिस पर कुछ अच्छा लिखा जा सके। उक्त पंक्ति ख्यात बाल साहित्य की सृजनकर्ता डॉ. विमला भंडारी पर खरी उतरती है। डॉ. भंडारी ने न सिर्फ ऐसा लिखा जिसे पढ़ा जा सके बल्कि अपने कर्म से इतना कुछ करके भी दिखाया है, जिस पर कोई भी साहित्यकार बहुत कुछ लिख भी सकता है।

राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त व बाल साहित्य का पर्याय बन चुकी डॉ. विमला भंडारी वर्तमान में किसी परिचय का मोहताज नहीं हैं। डॉ भंडारी की बाल साहित्य की बहुआयामी देन हिन्दी साहित्य को समृद्ध भी कर रही है, तो भावी पीढ़ी को नई राह भी दिखा रही है।

बालक और बाल साहित्य उनके मन प्राण में रचा बसा है। उन्होंने बहुत पहले समझ लिया था कि यदि एक समृद्ध राष्ट्र का निर्माण करना है तो उस देश के बच्चों को बहुआयामी विकास करना होगा। उन्हें अपने राष्ट्र की गौरवशाली संस्कृति से परिचित कराना होगा।

इसीलिए डॉ विमला भंडारी बालकों के हित में निरंतर चिंतन रत रहकर नित्य ही कुछ नया व ठोस करने में विश्वास रखती हैं। मन की सरल, मनमोहक मुस्कान लिए जब वे बच्चों के विषय में बात करती हैं या बच्चों से बोलते हैं, एक बाल सुलभ भाव उनके चेहरे पर सहज ही दिखाई पड़ता है। दूसरे शब्दों में उनके चेहरे से उनका बचपन जागता नजर आता है।

सतत चलती रही लेखनी:

अपने विपुल साहित्य लेखन से वे समय-समय पर अपनी लेखनी से बाल साहित्य को समृद्ध करती रही हैं। इसके लिए वे भारत सरकार व राजस्थान सरकार से पुरस्कृत सम्मानित हो चुकी हैं। बाल साहित्य की विविध विधाओं में उन्होंने अब तक 16 कृतियां एक से बढ़कर एक प्रदान की हैं।

वे अत्यंत संवेदनशील हैं तथा उनकी बाल कहानियां में कल्पना व मनोरंजन के तत्व सहज ही दृष्टव्य हैं। उनकी बहुत सी कहानियां जैसे ‘पृथ्वी ने मांगी चप्पल’, ‘उड़ने वाले जूते’, ‘आत्मकथा एक सोसाइटी की’ इत्यादि कई कहानियां राष्ट्रीय बाल पत्रिकाओं में चर्चित रही है उनके लिखे बाल उपन्यास ‘कारगिल की घाटी’ का अंग्रेजी अनुवाद भी हुआ है। इसके अलावा आपकी लिखी बाल कहानी ‘स्वाद का रहस्य’ महाराष्ट्र के पाठ्यक्रम में शामिल हुई है।

डॉ. विमला भंडारी
डॉ. विमला भंडारी

साहित्यिक क्षेत्र में विशिष्ट योगदान:

डॉ. भंडारी राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त ‘सलिला’ संस्था, सलूंबर की आप संस्थापक अध्यक्ष हैं, जिसके तहत सन 2010 से सलूंबर में निरंतर भव्य राष्ट्र स्तरीय साहित्यिक आयोजन करा रही हैं। सम्मेलन से पूर्व प्रतिवर्ष आप बच्चों की पांच दिवसीय लेखन कार्यशाला आयोजित करती हैं। इस कार्यशाला में बच्चों की नैसर्गिक प्रतिभा को निखारने का काम बखूबी किया जाता है।

बच्चों को सहज ही निबंध लेखन, यात्रा वृतांत, जीवन की घटना, कहानी, नाटक, जीवनी, कविता, पत्र लेखन व ओरिगामी के तहत अखबार के मोड़ से सरल भाषा में रेखागणित समझाया जाता है। बच्चे अपने नाम से अपनी-अपनी हस्तलिखित पुस्तक तैयार करते हैं। बच्चों से दीवार अखबार भी तैयार करवाया जाता है। इस प्रकार उनकी बहुआयामी विकास में इन लेखन कार्यशालाओं का महत्वपूर्ण योगदान है।

साहित्य के सृजनकर्ताओं को प्रोत्साहन:

प्रत्येक वर्ष वे बाल साहित्य के विविध विषयों पर अखिल भारतीय स्तर की प्रतियोगिता आयोजित करती हैं। तदुपरांत विजेताओं को अखिल भारतीय सम्मेलन में पुरस्कृत किया जाता रहा है। जिससे नवोदित व वरिष्ठ बाल साहित्यकारों को अपनी प्रतिभा निखारने व परखने का अवसर मिलता है।

सम्मेलन में बाल साहित्य आधारित विभिन्न पुस्तकों का लोकार्पण भी किया जाता है। पत्र वाचन, वार्ता और परिचर्चा जैसे विभिन्न सत्रों में नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया, राजस्थान साहित्य अकादमी जैसी सरकारी संस्थाएं भी सहभागी होती हैं। विभिन्न प्रदेशों से बाल साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हेतु ‘सलिला साहित्य रत्न सम्मान’ सहित अनेक सम्मान प्रदान किए जाते हैं। गत वर्ष ‘सलिला’ संस्था की स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण करने पर रजत जयंती महोत्सव मनाया गया था।

एक सफल संपादक की पहचान भी:

डॉ. भंडारी संपादन के क्षेत्र में भी पीछे नहीं हैं। वे प्रतिवर्ष बाल साहित्य की विविध विधाओं यथा बाल कहानी, यात्रा वृतांत, पत्र लेखन आदि में पुरस्कृत व चयनित रचना का संपादन कर पुस्तक प्रकाशित करवा रही हैं। सन 2017 में ‘हमारे समय की श्रेष्ठ कहानियां, 2018 में ‘देख लो जग सारा’, 2019 में ‘पत्र तुम्हारे लिए’ संपादित हो चुकी हैं।

इसके अतिरिक्त प्रति वर्ष ‘सलिल प्रवाह’ पत्रिका का भी संपादन किया जाता है, जिसका लोकार्पण राष्ट्रीय बाल साहित्यकार सम्मेलन में किया जाता है। पत्रिका का प्रत्येक अंक किसी विशिष्ट बाल साहित्यकार की रचनाओं पर केंद्रित होता है। राजस्थान साहित्य अकादमी की विशिष्ट पत्रिका ‘मधुमति’ के बाल साहित्य का संपादन भी वह 2013 में कर चुकी हैं।

डॉ. भंडारी अकादमी की सरस्वती सभा की सदस्य भी रहीं। शोधकर्ताओं ने आपके लेखन पर शोध कार्य किए हैं। आपके समग्र साहित्य लेखन पर दिनेश कुमार माली, उड़ीसा द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘डॉ विमला भंडारी की रचना धर्मिता’ यश प्रकाशन दिल्ली से प्रकाशित हो चुकी है।

बाल साहित्यकार पटल की संयोजक:

डॉ भंडारी के संयोजन में एक अनुशासित, नियमबद्ध कार्यशाला व्हाट्सएप पर चल रही है, जिससे देशभर के तिष्ठित व नवोदित साहित्यकार जुड़े हैं। यह देश की सोशल मीडिया पर पहली ऐसी कार्यशाला है, जिससे अनेकानेक नवोदित व वरिष्ठ बाल साहित्यकार लाभान्वित हो रहे हैं।

विभिन्न दिवस के संचालक व पाठक विधा विशेष पर प्रस्तुत रचनाओं पर अपनी टिप्पणियों व प्रतिक्रियाओं से रचना को पुष्ट करते हैं। पटल के माध्यम से कविता, कहानी, लेख, समीक्षा के अतिरिक्त विस्मृत कर दी गई विधाओं यथा रेखाचित्र, जीवनी, संस्मरण, यात्रा वृतांत, पत्र लेखन, सूचनात्मक साहित्य का पुनर्लेखन भी हो रहा है है। हाल ही में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा पूरे देश में सर्वप्रथम बाल साहित्य अकादमी की स्थापना की घोषणा की गई, इसमें भी डॉ. भंडारी के विशिष्ट प्रयास रहे हैं।


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