दीवाली और कोविड के बाद उभरी मानसिकता में “पाजिटिविटी का तड़का”

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दीवाली धूमधाम से मनी, बाजार में रौनक त्यौाहर में धूमधाम और मन में उत्साह। जीवन सामान्य से होने लगा है। ब्याह शादी का मौसम भी गरमाने लगा है। कोविड का भय धीरे-धीरे मिटने लगा है और सब कुछ पहले जैसा होने के आसार से नजर आ रहे हैं। यद्यपि तीसरी वेव कोविड की विश्व में अपनी दस्तक कहीं-कहीं सुना भी रही है। आनंद और भय के बीच का यह समय समझने, जानने, बुझने और उस आधार पर नये सिरे से अपने आपको कुछ दिशा निर्देश देने का है।


दीपावली में उठता आत्मविश्वास

इस दीपावली के दौरान आपने जिससे भी बात की होगी एक जवाब जरुर सुना होगा, ‘‘इस बार तो भाई दीवाली, दीवाली जैसी लगेगी।’’ दिल के इस दर्द को समझने की कोशिश कीजिये। किसी चीज के न मिलने पर उसकी कीमत समझ में आती है, जीवन में उसकी आवश्यकता समझ में आती हैं। ‘‘आज फिर वही दाल, चाँवल, सब्जी, रोटी’’ कहने वाले को उपवास के दिन दाल रोटी का स्वाद आनंदमयी लगता हैं। लोगों के इन जबावों ने स्वयं सिद्ध कर दिया कि ये त्यौहार जीवन के लिये स्फूर्तिदायक होते हैं।


कोविड से पनपी भयावह मानसिकता

कोविड काल का अकेलापन और उस पर हर दिन किसी अपने के जाने की खबरें, विश्व भर में फैला मौतों का मंजर, दिन- रात, टीवी चैनलों पर परोसा गया प्रमाद, व्हाटसएप पर फारवर्डेड ज्ञान, जीवन की नश्वरता को नशीले जहर की तरह जेहन में डाल रहा है। मौत का भय अब नये सिरे से दिलों दिमाग पर छा गया है। संक्रमण काल है, इसमें अपने आप की सुरक्षा अपने आप करनी होती है।

अपने आप अपनी मदद के लिये दिमाग का आपे में रहना बहुत जरुरी है। और दिमाग आप में तब रहता है, जब आपकी सोच सकारात्मकता हो। निराशा में आशा आप खुद जगा सकें, अंधेरे में रोशनी का दीया आप खुद लगा सकें। दीवाली मना कर आए है। अभी-अभी देखा है कि छोटे-छोटे माटी के दीये हों या आधुनिक बिंदु बराबर बल्ब की मालाएँ कार्तिक की काली रात को रोशन कर देती हैं। ठीक उसी प्रकार छोटी-छोटी सकारात्मक सोच और क्रियाएँ जीवन के नैराश्य को खुशियों में बदल देती हैं। ये आप पर निर्भर है कि दीवाली पर रोशनी के लिये आप एक दीया मंदिर में एक दीया परिंडे पर लगाते हैं या पूरे घर में ढेर सारे दीये लगाकर बल्बों की मालाएं बिछाकर घर या पूरे मोहल्लें को ही नहीं पूरे आकाश को जगमग कर दें। मन को जगमगाने वाले कुछ दीयों के प्रकार हम आपको दिखा देते हैं। बिन पैसे खरीद लीजिये, बस बत्ती आपको ही जलानी होगी।


ये सदैव याद रखें

  • मौत एक शाश्वत सत्य हैं उससे घबराये मत। मौत यदि आनी ही है, जिंदगी जानी ही है, तो जब तक जिंदगी आपके पास है तो उसे भरपूर जियें।
  • जिंदगी जीने का अर्थ है, जिंदादिली से जीना,जीने का आनंद हर पल उठाना।
  • आनंद हर कार्य, हर विचार में सकारात्मकता देखने से प्राप्त होता है। सकारात्मकता तब उत्पन्न होती है जब आप हर चीज को वर्तमान में जीने का प्रयास करते हैं।
  • वर्तमान में जीने का अर्थ है कि भविष्य की चिंता में आज के आनंद को खत्म न करें और बुजुर्ग अपने बीते हुए कल को आज पर हावी न होने दें।
  • कोरोना के प्रकोप ने ये तो समझा ही दिया है कि उत्तम स्वास्थ्य किसी भी आपदा का सामना करने के लिये कितना जरूरी है, तो स्वस्थ रहें।
  • स्वस्थ रहने के लिये आवश्यक है, संतुलित भोजन एवं नियमित व्यायाम।
  • शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ बहुत जरूरी है, मानसिक स्वास्थ्य को संभलना। मानसिक स्वास्थ्य संभलता है, हर विपरीत परिस्थिति में मानसिक संतुलन बनाये रखने से मानसिक संतुलन बलवती होता है, खुश रहने से, व्यस्त रहने से, आश्वस्त रहने से।

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