प्रिंटिंग व पैकेजिंग के ‘पायोनियर’ – रामविलास हुरकट (माहेश्वरी)

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कमर्शियल प्रिंटिंग हो या फिर सिक्योरिटी प्रिंटिंग अथवा पेपर प्रोडक्ट्स का निर्माण जब भी इस क्षेत्र की बात चलती है, तो देश के शीर्ष उद्योग के रूप में ओरिएंट प्रेस लि. का जिक्र उद्योग जगत में हर किसी की जुबान पर रहता है। माहेश्वरी हमेशा हर क्षेत्र में शिखर पर रहे हैं, तो इस उद्योग द्वारा भी कागज की दुनिया के ‘‘इंडिया स्टार’’ का सम्मान दिलाने वाले भी माहेश्वरी ही हैं, मुंबई निवासी पैकेजिंग क्षेत्र के ‘‘पायोनियर’’ रामविलास हुरकट। उद्यम के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदानों के लिये आपको ‘‘माहेश्वरी ऑफ द ईयर 2021’’ अवार्ड प्रदान करते हुए श्री माहेश्वरी टाईम्स परिवार गौरवान्वित महसूस करता है।


ओरिएण्ट प्रेस लि. कम्पनी बी.एस.ई. तथा एन.एस.ई.में लिस्टेड ऐसी शीर्ष पब्लिक लिमिटेड कम्पनी है, जो कमर्शियल तथा सिक्योरिटी प्रिंटिंग से प्रमुख रूप से सम्बद्ध है, साथ ही फ्लेक्सिबल पेकेजिंग मटेरियल तथा पेपर बोर्ड कॉर्टन उत्पादन के क्षेत्र में भी प्रतिष्ठित नाम बन चुकी है।

वर्तमान में देश की टॉप-10 प्रतिष्ठित कम्पनियों में शामिल यह कम्पनी पेकेजिंग क्षेत्र के ‘‘इंडिया स्टार’’ तथा ‘‘बेस्ट पैकेजिंग कन्वर्टर ऑफ द ईयर’’ आदि कई अवार्ड भी प्राप्त कर चुकी है। कम्पनी का मुम्बई में कार्पोरेट ऑफिस है, तो उसकी उत्पादन ईकाइयाँ महाराष्ट्र, केंद्र शासित प्रदेश दादरा एवं नागर हवेली तथा ग्रेटर नोएडा (उ.प्र.) आदि में कई स्थानों पर स्थापित है।

वर्तमान वर्ष में कम्पनी रामविलास हुरकट (माहेश्वरी) की चेयरमेनशीप में 250 करोड़ के टर्नओवर के लक्ष्य को लेकर चल रही है। इसी प्रकार प्रिंटिंग क्षेत्र की अग्रणी ट्रेड मैगज़ीन प्रिंट वीक ने जब देश के 100 बड़े प्रिंटिंग क्षेत्र के दिग्गजों को अपनी पत्रिका में स्थान दिया तो राम विलास हुरकट और उनके द्वारा स्थापित ओरिएंट प्रिंटिंग प्रेस इस क्षेत्र में देश के शीर्ष प्रिटिंग अग्रदूतों (पायनियर्स) में 21वें स्थान पर थे।


छोटे से व्यवसाय से वटवृक्ष की यात्रा

श्री हुरकट का जन्म 28 अप्रैल 1946 को राजस्थान के छोटे से गाँव तोशिना (नागौर) में स्व. श्री शंकरलाल व श्रीमती रामेश्वरी देवी हुरकट के यहाँ हुआ था। पिताजी हैदराबाद में नौकरी करते थे लेकिन श्री हुरकट के सपने बड़े थे। बस इन्हीं सपनों ने उन्हें उच्च शिक्षा की ओर प्रेरित किया। आपने हैदराबाद की उस्मानिया युनिवर्सिटी से बी.कॉम. की स्नातक उपाधि प्राप्त की और फिर अपने सपनों को साकार करने 21 वर्ष की उम्र में मुंबई चले गये।

Ramvilas Hurkat

जब आप 25 वर्ष की उस अवस्था में थे और करियर के लिये अपनी पूरी उर्जा लगा सकते थे ऐसी स्थिति में पिता श्री का साया सिर से उठ गया। ऐसे में पूरे परिवार को हैदराबाद से मुम्बई ले आये और फिर पूरे परिवार की जिम्मेदारी सम्भालना पड़ी। इन सबके बावजूद हुरकट ने हार नहीं मानी और प्रिंटिंग व्यवसाय द्वारा अपने व्यवसायी साम्राज्य की नींव रख ही दी।

शुरुआत तो छोटे से व्यवसाय के रूप में हुई लेकिन फिर यह कई क्षेत्रों में विस्तारित होते हुए वटवृक्ष की तरह स्थापित होता चला गया। आज देश के शीर्ष 10 उद्यमों में तो यह प्रतिष्ठित है ही साथ ही सिक्युरिटी व कमर्शियल प्रिंटिंग के क्षेत्र में देश में विश्वास तथा उत्कृष्टता का पर्याय भी बन चुका है।

समय के साथ-साथ कंपनी ने कार्यक्षेत्र का विस्तार करते हुए पैकेजिंग मटेरियल व पेपर बोर्ड कार्टन उत्पादन क्षेत्र में कदम रखा और इस क्षेत्र के प्रतिष्ठित ‘इंडिया स्टार’ तथा ‘‘बेस्ट पैकेजिंग कनवर्टर ऑफ़ दी ईयर’’ आदि अवार्ड हासिल किये हैं।


समाज सेवा का पर्याय बना हुरकट ट्रस्ट

व्यावसायिक उन्नति तभी सार्थक है जब इसका लाभ समाज को भी मिले। ओरिएंट के माध्यम से असंख्य लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के अलावा सामाजिक मोर्चे पर भी श्री हुरकट ने अपनी छाप छोड़ी है। 1987 में आपने रामेश्वरी देवी शंकरलाल हुरकट चेरिटेबल ट्रस्ट का गठन कर समाजसेवा के क्षेत्र में कदम रखा और इस ट्रस्ट के बैनर तले राजस्थान में चार गेस्ट हाउस और एक अस्पताल बनाकर समाज की सेवा में अपना योगदान दिया।

वर्ष 1995 में सालासर के प्रसिद्ध सालासर हनुमान मन्दिर के पास श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए सेठ शंकरलाल हुरकट गेस्ट हाउस का निर्माण कराया। अपने पैतृक गाँव तोशिना में भी एक गेस्ट हाउस व हनुमानजी का एक मन्दिर बनवाया जिसका लोकार्पण बालव्यास श्री राधाकृष्णजी महाराज द्वारा 26 अप्रैल 2012 को किया गया।

नागौर के ही खियाला में राम मन्दिर का जीर्णोद्धार व असावा गेस्ट हाउस का निर्माण समाज की सुविधा के लिए कराया। नागौर के ही तुकलिया गाँव में हुरकट परिवार की कुलदेवी विशाथ माता का मन्दिर स्थित है। 2018 में आपने कुलदेवी के दर्शनार्थ आने वाले हुरकट परिवारों के सेवार्थ गेस्ट हाउस का निर्माण कराया।

इसके साथ भारत में पहली बार करीब चार सौ हुरकट परिवारों को हुरकट सम्मेलन के माध्यम से एक मंच पर लाने का श्रेय भी आपके नाम है। आपके मार्गदर्शन में अखिल भारतीय स्तर की पहली हुरकट डायरेक्टरी भी प्रकाशित की गई।

निकट भविष्य में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली मेधावी छात्राओं के लिए महिला छात्रावास बनाने की योजना पर काम जारी है जिसके लिए गोरेगांव से कांदिवली के बीच जमीन की तलाश जारी है।


समाज सेवा में सतत योगदान

पारिवारिक ट्रस्ट के अलावा भी विभिन्न सामाजिक, सांस्कतिक, साहित्यिक व धार्मिक संस्थाओं से जुड़कर आप समाज सेवा में अपना सक्रिय योगदान दे रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान में अपना निजी योगदान देकर जरुरतमंदों को नि:शुल्क शौचालय बनवाकर दिए हैं।

सालासर प्रचार मंडल (मुंबई), सालासर विकास समिति सालासर (राजस्थान), श्री कृष्ण गौशाला तोशिना, ए.बी. माहेश्वरी एजूकेशनल ट्रस्ट (जेसीकेएम हॉस्टल दिल्ली), अखिल भारतीय माहेश्वरी एजूकेशनल एवं चेरिटेबल ट्रस्ट (मोदी हॉस्टल, कोटा), बद्रीलाल सोनी माहेश्वरी शिक्षा सहयोग केंद्र भीलवाड़ा, श्रीकृष्णदास जाजू स्मारक ट्रस्ट भीलवाडा, ए.बी.एम. माहेश्वरी एजूकेशनल ट्रस्ट (बॉम्बे-सोनी हॉस्टल), आदित्य विक्रम बिड़ला मेमोरियल व्यापार सहयोग केंद्र जैसी अनेक प्रतिष्ठित संस्थाओं से जुड़कर विभिन्न क्षेत्रों में आप योगदान दे रहे हैं।

मुंबई की अग्रणी सामाजिक संस्था परमार्थ सेवा समिति के संस्थापक ट्रस्टी व जॉइंट चेयरमैन, माहेश्वरी प्रगति मंडल (मुंबई) के ट्रस्ट बोर्ड सदस्य, भारत विकास समिति फिल्म सिटी शाखा गोरेगांव के संरक्षक, वनवासी समाज के उत्थान को समर्पित श्री हरि सत्संग समिति मुंबई के आजीवन सदस्य हैं। भारत विकास परिषद् महाराष्ट्र की मुम्बई कोस्टल शाखा द्वारा आपकी सेवाओं के लिए विशेष सम्मान प्रदान किया गया है।


जीवन रक्षा में भी सतत सहयोग

श्री हुरकट यद्यपि समाजसेवा के विभिन्न आयामों में आपकी सक्रिय भागीदारी रहती है तथापि स्वास्थ्य क्षेत्र में जरुरतमंदों की मदद हो सके यह भी हुरकटजी की प्राथमिकता रही है। इसलिये अपने जन्मस्थल तोशिना में पिता स्व. श्री शंकरलाल हुरकट की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए सभी आधुनिक सुविधाओं से युक्त अस्पताल का निर्माण करवाकर नगरवासियों व आसपास के गाँववासियों के हितार्थ वर्ष 1997 में राजस्थान सरकार को सौंप दिया।

इधर मुंबई में परमार्थ सेवा समिति के बैनरतले मालाड (प.) स्थित महेशनगर में रामेश्वरी देवी शंकरलाल हुरकट चेरिटेबल ट्रस्ट पोलीक्लिनिक की स्थापना सामान्य जनता के लिए की जो क्षेत्र में सबसे सस्ते इलाज के लिए मशहूर है। यहाँ नाम मात्र के शुल्क पर मेडिकल जाँच व दवाएं जरुरतमंदों को दी जाती हैं।

मुंबई में कैंसर रोगियों के लिए इलाज तो उपलब्ध है मगर उनके ठहरने के लिए जगह की अब भी कमी है। इस कमी को दूर करने के लिये परमार्थ सेवा समिति के जरिये टाटा कैंसर अस्पताल से कुछ दूरी पर ही एक गेस्ट हाउस का निर्माण किया गया जिसका प्रबंधन आपके द्वारा किया जा रहा है।

फ़िलहाल 60 शायिकाओं की व्यवस्था इस गेस्ट हाउस में है, साथ ही मरीज और उसके साथी के नाश्ते, भोजन आदि की भी व्यवस्था नाम मात्र के शुल्क पर की जा रही है। इस गेस्ट हाउस के विस्तार की योजना पर आपका ध्यान है और इसी के तहत एक एप का निर्माण जल्द ही किया जा रहा है जिसके जरिये पूरे देश से जरुरतमंद कैंसर रोगी संपर्क कर सकेंगे।

मुंबई में उन्हें स्टेशन से अस्पताल तक पहुँचाने और रजिस्ट्रेशन कराने की भी व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा उन्हें दवाएं भी उपलब्ध कराने में मदद की जाएगी। आप कोणार्क कैंसर फाउंडेशन के भी सक्रिय सदस्य हैं।


मानवता की सेवा में ‘‘मुक्तहस्त’’

श्री हुरकट ने व्यक्तिगत स्तर पर भी जरूरतमंदों के सहयोग में कोई कसर नहीं रख छोड़ी। यही कारण है कि हर कोई उनके योगदानों की सराहना में पीछे नहीं रहता। परमार्थ सेवा समिति के 30 अक्टूबर 2021 को आयोजित दीपावली स्नेह मिलन समारोह में मुख्य अतिथि मथुरा सांसद व अभिनेत्री हेमा मालिनी सहित मुंबई उपनगर कलेक्टर निधि चौधरी ने भी आपके योगदानों की सराहना की।

Ramvilas Hurkat

सुश्री चौधरी ने तो अपना व्यक्तिगत अनुभव ही कह सुनाया कि उन्हें उनके पैतृक ग्राम में 10-12 ऐसी बालिकाऐं दिखीं जो खेल के क्षेत्र में राज्य या राष्ट्र स्तर पर उपलब्धि हासिल कर सकती है। अनायास ही एक भेंट में उन्होंने इसका जिक्र श्री हुरकट के सामने कर दिया। तो श्री हुरकट ने उनके लिये उनके स्कूल में 10 लाख रुपये की लागत से खेल उपकरण स्थापित करके ही चैन लिया। श्री हुरकट के मानवता की सेवा के इस अभियान में उनका परिवार भी उनके साथ है।


पूरा परिवार ‘‘साथ-साथ’’

श्री हुरकट दिसंबर 1965 में शांताजी के साथ परिणय सूत्र में बंधे और तीन पुत्रों के पिता बने। राम विलासजी अपनी सफलता में अपने छोटे भाई राजाराम हुरकट की भूमिका को भी बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं। व्यवसाय के विस्तार में राजारामजी अपने बड़े भाई के साथ एक प्रबल सहयोगी की भूमिका में रहे और अब भी उसी भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं।

आज जब भौतिकतावाद की चपेट में परिवार संस्था दिन पर दिन छोटी होती जा रही है, ऐसे में श्री हुरकट एक आदर्श कहे जा सकते हैं जो अब भी पूरे परिवार को एक साथ रखे हुए हैं।

संयुक्त परिवार का आदर्श अगर देखना हो तो रामविलासजी का घर अवश्य देखना चाहिए जहाँ दोनों भाइयों के परिवार, पुत्र-पुत्रवधु, पौत्र-पौत्री सभी एक साथ रहते हैं। ‘‘हम साथ-साथ हैं’’ का मुहावरा इस घर में सार्थक सिद्ध होता है।

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