श्री झीण माताजी माहेश्वरी समाज की सोढानी खांप की कुल माता है। इसके अलावा सोमानी, जाजू, बजाज, काबरा, राठी, बिड़ला, तोषनीवाल, छापरवाल, तापड़िया, खांपें वाले भी इन्हें मानते हैं।
झीण माताजी का भव्य अति प्राचीन मन्दिर राजस्थान के सीकर जिले के ‘झीणधाम’ में स्थित है। श्री झीणमाताजी दुर्गा की नौ देवियों में प्रथम जयन्ती देवी का अवतार हैं। यह मन्दिर कई हजार वर्ष पुराना है। झीणमाताजी के सम्बन्ध में राजस्थान में लोकोख्यान प्रसिद्ध है कि यहाँ हर्ष और झीण ने कठोर तपस्या की थी।
यह मंदिर केवल पूर्व दिशा में खुला हुआ है, बाकि तीनों दिशाओं में यह पर्वत शृंखलाओं से घिरा हुआ है। मंदिर में स्थित माता की प्रतिमा अष्ट भुजाओं वाली है और सामने घृत और तेल के दो अखण्ड दीपक कई हजार वर्षों से प्रज्जवलित हैं।
इस मंदिर का प्राचीन इतिहास है। इसके इतिहास के बारे में पुजारी कमलकुमार पाराशरजी ने बताया कि मुस्लिम बादशाह औरंग़जेब सेना के साथ कई मंदिरों को खंडित करते हुए यहाँ भी इसी उद्देश्य से आया था परंतु माताजी के चमत्कार के कारण ऐसा कुछ कर नहीं पाया और भवनेश्वरी माताजी मंदिर के यहाँ पर स्थित मधुमक्खी के छत्ते द्वारा आक्रमण कर सेना को वापस जाने को मजबूर होना पड़ा।
इस चमत्कार से औरंग़जेब भी हतप्रभ रह गया। बाद में उसने यहाँ पर छत्र चढ़ाकर अखंड ज्योत जलाई जो आज भी जल रही है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहाँ पर कभी ताले नहीं लगे हैं। मंदिर पर कई मुस्लिम परिवार भी आस्था रखते हैं तथा सेवा करने आते रहते हैं।
यहाँ पर कई धर्मशालाएँ हैं जहाँ पर यात्रियों के लिए निःशुल्क सेवाएँ उपलब्ध रहती हैं। भोजन के लिए शुद्ध शाकाहरी ढाबा भी उपलब्ध है। मंदिर में पूर्व सूचना देने पर न्यूनतम दर पर भोजन व्यवस्था की जाती है तथा बर्तनों का किराया नहीं लिया जाता है।
झीण माताजी आरती व प्रसाद:
जीणधाम में माँ झीण की आरती तीन समय होती है:
प्रथम आरती : मंगला आरती सुबह ४ बजे होती है जिसमें माँ को सम्पूर्ण वाद्य यंत्रों द्वारा जगाया जाता है।
द्वितीय आरती : प्रातः ८ बजे मुख्य आरती के पश्चात भात (चावल) प्रसाद लगाकर यात्रियों में बांटा जाता है। इस प्रसाद को ढाई किलो चावल, आधा किलो घी, आधा किलो चीनी के साथ झीण कुण्ड के अमृत समान जल से बनाया जाता है।
तृतीय आरती : सायं ७ बजे आरती पश्चात दुर्गा सप्तशती के मंत्रोचारण के पश्चात चावल का भोग लगाया जाता है। (आरती के समय में फेरबदल सूर्य उदय व अस्त होने के अनुसार किया जाता है) । मंदिर के बारे में पुजारी बताते हैं कि यहाँ पर पहले कभी बलि एवं मदिरा का भोग लगाया जाता था परंतु आजकल यह नहीं होता है।
मंदिर के पुजारी श्री कमलकुमारजी पाराशर, श्री पूरणमलजी पाराशर, श्री रामअवतारजी पाराशर, श्री मातादीनजी तथा श्री दिनेशजी हैं। वर्तमान में श्री कमलकुमारजी पाराशर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। हर शरद पूर्णिमा को पुजारी बदल जाते हैं। यहाँ के मंदिर का दूरभाष नं.०१५७६-२२७१५६ है।
झीण माताजी कैसे पहुँचे:
राजस्थान के सीकर जिले में वाया कोछोर (सीकर) से ३० किलोमीटर दक्षिण की ओर जयपुर हाईवे पर गौरियां जंक्शन से १५ किलोमीटर दूर अरावली गिरी में स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग से जाना होता है। लेकिन रेलमार्ग से पहुंचने के लिए गौरियां रेल्वे स्टेशन उतरना होता है। रेल या वायु मार्ग द्वारा जयपुर पहुंच कर यहां से बस या स्वयं के निजी वाहन द्वारा झीणधाम पहुंचा जा सकता है।










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