देश में कोरोना का आना एक ओर सबकी चिंता बढ़ा रहा है, तो वहीं दूसरी ओर कुछ सबक भी सीखा रहा है। इसने इंसान के सारे गर्व और अहंकार की सीमाएं उजागर कर दी। इंसान बेबस होकर आध्यात्म के सामने नतमस्तक हुआ है ओर लड़ने की जो ताकत मिल रही है, वो सब वहीं से मिल रही है। इस छोटे से वायरस ने इंसान को उसकी हैसियत बहुत अच्छे से समझा दी। एक सबक है कोरोना, आइये जाने ‘कोरोना’ के सबक।
धन का अहंकार:
वो लोग जिनकी जेब मे पैसा था, और जिनके लिये बाजार खुले थे, उनको लगता था कि उनको दुनिया में किसी और की क्या जरूरत है? लेकिन कोरोना ने बता दिया कि बाजार कभी भी बंद हो सकते हैं। उस समय धन हो तो भी किसी काम का नहीं है। आज फिक्र किसी ब्रांड की नहीं, फिक्र केवल जान बचाने की है।
वाहन:
जो लोग अपने लाखों करोड़ों की गाड़ियों में बैठ कर इठलाते घूमते थे, वो गाड़ियां बेकार खड़ी है। उनमे बैठ कर घर से निकलने में भी डर लगता है, फिक्र है तो केवल जान की।
रिश्तों का अहंकार:
इस दुनिया में लोग जिन रिश्तों के चलते दम्भ भरकर समाज मे गर्व से बतियाते थे, आज अगर वो ही रिश्तेदार घर आ जाए तो डर जाएंगे और घर को सैनिटाइज करने लगेंगे। रिश्ते एक दूसरे के सामने आने में डरने लगे हैं।
पद का अहंकार:
जो लोग अपने छोटे या मोटे पद को लेकर पूरे जोश और अहंकार में गर्वीली चाल चलते थे। उनको लगता था कि उनकी इज़ाज़त के बिना पत्ता भी नही हिल सकता। उनके चेहरों पर भी छोटे से ना दिखाई देने वाले ‘वायरस का खौफ साफ साफ नज़र आ रहा है, और चेहरा मास्क के पीछे छिपाने के बाद भी डर बाहर झलक रहा है।
ताकत:
आज चाहे कोई कितना भी बड़ा बाहुबली, गैंगस्टर, पहलवान हो या बॉडी बिल्डर, इस वायरस से लड़ने या इसको चुनौती देने की औकात किसी की नहीं है, बचाव ही उपाय है, इसलिए घरों में अपनी पूरी ताकत सहित छिपे बैठे हैं।
विज्ञान:
वह विज्ञान जो अंतरिक्ष की गहराई को नाप कर लाखों मील दूर मंगल ग्रह पर मानव बस्ती बसाने को तैयार है उस के पास इस मामूली वायरस का कोई जवाब नहीं है। वो विज्ञान जो लाखों साल बाद होने वाली खगोलीय घटनाओं की सटीक जानकारी दे सकता है, वो इस वायरस का जानकारी नही दे पाया। नासा हो या इसरो सब बेबस।
तकनीक:
दुनिया के विकसित देश जो अपने मेडिकल और तकनीकी विकास पर मूंछ मरोड़ कर पूरी दुनिया में चौधराहट करते थे, घुटने टेक कर इस वायरस के आगे हाथ जोड़े खड़े हैं। सब विकास फैल हो गया है। सारी तकनीक का निचोड़ ये निकला कि अपने अपने घर में छुप जाओ, इलाज तो कोई है नहीं। इन सब में अगर कुछ नहीं बदला तो वो है इंसान और भगवान का सम्बंध । इंसान बेबस होकर अंदर: उन्हीं के सामने नतमस्तक हुआ है और लड़ने की जो ताकत मिल रही है वो सब वहीं से मिल रही है।
एक सबक है कोरोना -जयकिशन झंवर
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