बिजकॉन ऑनलाइन प्लेटफार्म से भी दिखाई ‘बिजनेस की नई राहें’

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पुणे। गत 5 वर्षों से माहेश्वरी समाज के नवउद्यमियों को व्यवसाय की नई राह दिखाने के लिए एमआईजी पुणे द्वारा संचालित एम सर्कल चैन्नई, एम.एस.एफ. सूरत एवं महेश फाउंडेशन हैदराबाद के सहयोग से प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले बिजनेस कॉन्क्लेव ‘बिजकॉन’ का आयोजन इस वर्ष प्रथम बार ऑनलाईन रूप से ‘जूम एप’ के माध्यम से गत 1 व 2 मई को किया गया। कोरोना महामारी में वर्तमान में चल रहे लॉकडाऊन के कारण सामुहिक आयोजन प्रतिबंधित हैं, ऐसे में इस आयोजन पर खतरा मंडरा रहा था, लेकिन आयोजकों ने भी इसे चुनौती पूर्ण ढंग से लेते हए प्रथम बार इसका आयोजन ऑनलाइन किया। इससे इसकी सफलता पर प्रश्न चिह लगने लगा था, लेकिन इसमें ऑनलाईन रूप से शामिल 2 हजार से अधिक प्रतिभागियों ने सफलता का नया कीर्तिमान स्थापित करवा दिया।

वर्तमान दौर में उद्यमियों व व्यवसायियों का समाज माने जाने वाला माहेश्वरी समाज एक अपनी इस पहचान को खोने के संकट से गुजर रहा है। कारण है समाज की युवा पीढ़ी का व्यवसाय से दूर हटकर नौकरी की ओर कदम बढ़ाना। इसी स्थिति को देखकर समाज के युवा वर्ग को मार्गदर्शित कर बिजनेस क्षेत्र में शिखर की ऊंचाई प्राप्त करने के गुर सिखाने के लक्ष्य को लेकर बिजकॉन का आयोजन लगभग गत 5 वर्षों से किया जा रहा है।

वर्ष 2015 में पुणे में आयोजित कॉन्क्लेव ‘बिजकॉन’ द्वारा इस प्रयास के सुरेश लखोटिया की सोच व नीलेश लद्दड, आशीष डालिया तथा राहुल मोहता के सहयोग से एमआईजी के बैनर तले शुरूआत हुई थी। इसमें मात्र 425 औद्योगिक प्रतिनिधि शामिल हुए लेकिन इसकी उपयोगिता जरूर सामने आयी। वर्ष 2017 में एमएसएफ सूरत के बैनर पर श्याम राठी. नवल राठी, मनीष जाजू के सहयोग से सूरत में आयोजित हुआ, जिसमें 625 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

इसका परिणाम यह रहा कि प्रतिवर्ष इस आयोजन में उत्तरोत्तर वृद्धि होती ही गई। इसके पश्चात हैदराबाद में महेश फाउंडेशन के बैनर तले हरिनारायण राठी, उमेश कुमार राठी तथा लक्ष्मीनारायण बांगड़, दीपक भट्ट के नेतृत्व में साथ ही एमआईजी अध्यक्ष राहुल धूत, आनंद करवा तथा राजेद्र तापड़िया आदि की प्रमुख भूमिका में आयोजित हुआ।

शंख ध्वनि से हुआ शुभारम्भ:

वेबिनार रूप में बिजकॉन का शुभारम्भ प्रथम दिवस 1 मई को जूम एप में मिटिंग जॉइन करने के लिये लॉग इन करते ही बिजकॉन के संस्थापक सुरेश लखोटिया द्वारा शंख ध्वनि के साथ हुआ।

बिजकॉन 2020

कार्यक्रम का संचालन निलेश लद्दड एवं राहुल मोहता ने किया। इस प्रथम दिवस को स्वस्तिक की चार भुजाओं को चारों दिशाओं को शुभ बनाने की क्षमता पर केन्द्रीत धर्म के आधार पर चार समस्याओं का समाधान चार प्रमुख वक्ताओं ने प्रस्तुत किया।

इसमें रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर सुभाष मूंदड़ा ने लिक्विड मनी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान की विपदा की स्थिति में अपने व्यवसाय की रूपरेखा वर्ष 2008 की आपदा को भी मार्गदर्शक मानकर तैयार करने के लिये कहा।

श्री मूंदड़ा ने कहा कि हमें शहरी और ग्रामीण दोनों भारत की आवश्यकता को सामने रखते हुए योजना तैयार करनी चाहिये।


आरआर ग्लोबल के एमडी व ग्रुप चेयरमेन गोपाल काबरा ने कहा कि वर्तमान में चल रहे लॉकडाऊन को वास्तव में व्यावसायिक सोच के लॉक ओपनिंग के रूप में लें।

वर्तमान में देश की विश्व स्तर पर व्यावसायिक रूप से नवी छवि बनी है, इसका लाभ लेने के लिये अपने आपको तैयार करें।


भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्याम जाजू ने कहा कि सरकार सतर्कता के साथ देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती और स्थायित्व देने में जुटी है।

‘मेक इन इंडिया’ की सोच व चीन के घटते प्रभाव के कारण भारतीय उद्योग-व्यवसाय के लिये प्रगति का अच्छा अवसर आने वाला है।


एम.के. वेंचर्स के मधुसूदन केला ने कहा कि वास्तव में ‘बनिया’ शब्द का अर्थ है, सृजनशील।

वास्तव में भी हम अपनी सकारात्मक सोच के साथ सृजनशीलता की ओर बढ़ते हैं। वर्तमान दौर में समय की आवाज को समझे और सही व्यवसाय की पहचान कर उसमें निवेश करें।


द्वितीय दिवस को मार्गदर्शन के बाद हुआ समापन:

इस वेबीनार के अगले दिन 5 प्रेरक मार्गदर्शकों के व्याख्यानों ने प्रतिभागियों में नयी ऊर्जा उत्पन्न कर दी। इसमें आईसीएसआई की पूर्व अध्यक्ष सीएस ममता बिन्नानी ने कहा कि वर्तमान दौर में प्राथमिकता के क्रम में स्वास्थ्य सबसे उपर है, इसके बावजूद व्यवसाय की अनदेखी भी नहीं की जा सकती।

याद रखें पैसे का व्यवसाय में वही महत्व है, जो हमारे शरीर में रक्त का। अत: हर निवेश के पहले पूरी योजना बनाऐं। विषमताऐं अपने साथ विकास के कई अवसर भी लाती हैं। अत:सकारात्मक बने रहें।


नेस्पर्स फिनटेक एंड पे यू नीदरलैंड के ग्लोबल सीएफओ आकाश मूंदड़ा ने नवीन तकनीकों से कार्यकुशलता विकास पर सम्बोधित करते हुए कहा कि तकनीकी यह एक मात्र ऐसा सशक्त शब्द है, जो वर्तमान में सहयोगी बन सकता है।

प्रत्येक क्षेत्र की भिन्न – भिन्न तकनीकें हैं, जिनके द्वारा हम व्यवसाय में वर्किंग, प्रमोशन और मार्केटिंग आदि का खर्च कम कर अपने लाभ को बढ़ा सकते हैं।


सुपम माहेश्वरी ने स्टार्टअप कैसे शीर्ष पर पहुंचता है और कैसे पतन की ओर इस पर प्रकाश डाला। श्री माहेश्वरी ने कहा कि प्रकृति ने हमें जन्मजात उद्यमी के रूप में पैदा किया है। अत: हम में विशिष्ट क्षमता हैं। यह समय वास्तव में हमारे उत्पाद के सही विश्लेषण का समय है। आज हमें मजबूत सुरक्षात्मक व्यावसायिक आधार को भी तलाशना होगा।


नीरज बिहानी ने मार्केटिंग की क्षमता के विकास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमें सबसे पहले क्या, कौन और कब पर विचार करना चाहिये।

संचार के साथ ही उत्पाद के वितरण व्यय पर चिंतन के साथ रिसर्च करें।


दामोदर मल्ल ने कहा कि वर्तमान समय को ऐसे मंथन के समय के रूप में लें, जिससे ऐसी सोच सामने आ सके, जो हमें लाभ दिलवा सके।

बदलते समय की मांग होती है समयानुकूल प्रयासों में भी बदलाव। यह समय वास्तव में किराना जैसे ही स्थायीत्व वाले व्यवसाय का है। हमें इसके लिये नई तकनीकों के साथ तैयार रहना होगा।

अंत में आशीष डालिया के आभार प्रदर्शन से आयोजन का समापन हआ।


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