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इंडिया बुक ऑफ़ रिकार्ड्स में दर्ज हुआ अद्वित

मात्र 2 वर्षीय बालक की जब बात होती है तो हर कोई अत्यंत अबोध बालक की कल्पना ही करता है। यदि कहा जाए की एक 2 वर्षीय बालक वह सब याद कर सकता है, जो युवाओं के लिए भी असंभव है, तो आपको वाकई आश्चर्य होगा, लेकिन यह वरंगल निवासी अद्वित जैसे अद्वितीय बालक के लिए सत्य ही है।

वरंगल निवासी अद्वित अपनी अद्वितीय याददाश्त से परिवार ही नहीं बल्कि क्षेत्र की शान बन चुका है। अद्वित की उम्र तो मात्र दो साल है लेकिन वह अपनी याददाश्त के मामले में बड़ो को भी बहुत पीछे छोड़ता है। इसी विशेषता के कारण डॉ संतोष व डॉ श्रुति मोदानी के सुपुत्र अद्वित का नाम “इंडिया बुक ऑफ़ रिकार्ड्स 2019 ” में दर्ज किया गया है। लगभग अधिकांश समाचार पत्रों ने उसकी इस विलक्षण क्षमता को सराहा है।

कंप्यूटर की तरह तेज याददाश्त:

लगभग 2 वर्ष उम्र के अद्वित की विलक्षणता पर नज़र डालेंगे तो आश्चर्यचकित रह जाएंगे। वह देश के हर राज्य की राजधानी, 70 देशो की राजधानी व उनके राष्ट्रीय प्रतीक, राष्ट्रगान, आदि की जानकारी रखता है। विभिन्न जानवरों के बच्चों की आवाज़ पहचानता है है तथा ट्विंकल-ट्विंकल, जॉनी-जॉनी आदि लगभग 30 छोटी-छोटी कविताएं जनता है। शरीर के सभी बॉडी पार्ट्स पहचानता है तथा सभी रंग, सप्ताह के दिवस, 12 महीने के नाम जनता है। प्लैनेट्स व महाद्वीप आदि के बारे में भी जनता है। महत्वपूर्ण पुरातात्विक धरोहर जैसे आगरा का ताजमहल, नई दिल्ली के इंडिया गेट, दिल्ली की कुतुबमीनार व जयपुर के हवा महल आदि की जानकारी रखता है। ऐसी ही और भी कई जानकारी उसे है।

पूरा परिवार प्रतिभा से परिपूर्ण:

अद्वित के पिता डॉ संतोष मोदानी हृदयरोग विशेषज्ञ व माँ डॉ श्रुति मोदानी पैथोलोजिस्ट है। पिता अपनी पूरी शिक्षा के दौरान प्रतिभावान रहे है। उन्होंने नागपुर से एमबीबीएस पूर्ण कर प्रथम प्रयास में ही एमडी व डीएम की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण कर के मुंबई से ये उपाधि प्राप्त की।वे हृदय रोग के क्षेत्र में ट्राईसिटी वरंगल में एनजीओलास्टि, एनजीओग्राफी, पेसमेकर आदि के विशेषज्ञ है।

अकोला निवासी अशोक हेड़ा अद्वित के नानाजी हैं तथा शैलू (महाराष्ट्र) निवासी मोहनलालजी व सरला मोदानी दादाजी-दादीजी है। भाई ऋतिक डीपीएम वरंगल में अध्ययनरत है।


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