भव्य रूप में मनाएं महेश नवमी पर्व

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महेश नवमी पर्व माहेश्वरी समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है क्योंकि इसी दिन माहेश्वरी समाज की वैश्य रूप में उत्पत्ति हुई थी। इन सबके बावजूद उल्लास की कमी से यह पर्व अभी तक वह सम्मान प्राप्त नहीं कर सका जिसका वह अधिकार रखता है। इसके लिए हमें संकल्पित होकर दीपावली-दशहरा की तरह ही पूरे उल्लास के साथ यह महापर्व मानना होगा। जब हम इसे महत्त्व देंगे तभी तो दूसरे देंगे, यह न भूलें।

पूरे देश में तथा विदेशों में भी अपने समाज के स्थानीय संगठन महेश नवमी समारोह आयोजित करते हैं। कार्यकर्ताओं के उत्साहपूर्ण प्रयास से महेश नवमी के कार्यक्रमों में समाजबंधुओं की भागीदारी बढ़ी है। कार्यक्रमों की गुणवत्ता में निखार स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होता है। विविधता के साथ-साथ कार्यक्रम के माध्यम से कोई न कोई संदेश देने की दृष्टि विकसित हो रही है। इस सराहनीय उपलब्धि के बावजूद महेश नवमी अपने घरों में एक त्योहार के रूप में स्थापित नहीं हो पाई है।

परिवार के सभी सदस्य महेश नवमी मनाने के लिए समाज द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने नहीं जाते हैं, कुछ जाते हैं, कुछ घर पर ही रुक जाते हैं। लगता है महेश नवमी मनाने की परंपरा समाज के संगठनों ने शुरू की और हम लोग उसी में रम गए। इसलिए अनजाने ही घर में महेश नवमी मनाने का विचार अंकुरित नहीं हो पाया।


वास्तव में परिवार के किसी सदस्य का जन्मदिन मनाने से अधिक महत्व हमें अपने समाज के प्रादुर्भाव दिवस मनाने को देना चाहिए। जिस तरह होली-दिवाली-विजयादशमी के त्योहार अपने घरों में मनाए जाते हैं, उसी तरह महेश नवमी को भी एक त्योहार के रूप में प्रत्येक माहेश्वरी के अपने-अपने घरों में मनाया जाना चाहिए। राज-तंत्र अथवा संगठनों द्वारा जो उत्सव मनाए जाते हैं, किसी भी कालखंड में उनमें शिथिलता अथवा व्यवधान आने की आशंका को नकारा नहीं जा सकता।

इसके कई उदाहरण इतिहास व वर्तमान में मौजूद हैं। एक त्योहार के रूप में महेश नवमी घर में मनाने से सभी सदस्यों की इसमें भागीदारी होगी। इससे माहेश्वरी भाव अधिक पुष्ट होगा। इस पावन दिवस को त्योहार के रूप में अंगीकार करने से यह परिवार में सामाजिक संस्कार की नींव को मजबूत करेगा। अन्य त्योहारों की भांति घर में महेश नवमी को एक त्योहार के रूप में स्थापित करने के लिए होली, दीपावली व विजयादशमी जैसे उत्साह की जरूरत है।


अपने मित्रों-रिश्तेदारों को तथा समाजबंधुओं को इस अवसर के उपलक्ष्य में शुभकामना संदेश प्रेषित किए जाएं। घर के प्रवेश द्वार पर फूल पत्ती, सजावटी वंदनवार, रंगोली, बिजली से सजावट करें। स्थानीय संगठन इसके लिए प्रतियोगिता आयोजित कर सकते हैं। व्हाट्अप द्वारा उनके चित्र मंगवाकर पुरस्कृत किया जा सकता है। परिवार के सभी सदस्य मिलकर एक साथ घर में महेश वंदना करें, प्रसाद वितरित करें। अन्य त्योहारों की भांति महेश नवमी पर भी रसोई में कुछ विशिष्टता रखी जाए।

घर के सभी सदस्य अपने से बड़ों को प्रणाम करें। परिवार में अर्थोपार्जन करने वाले सदस्य बड़ों को उनकी आवश्यकता/अभिलाषा के अनुरूप उपहार भेंट करें। परिवार प्रमुख छोटों को अन्य त्योहारों की भांति इस दिन भी त्योहारी दें। परिवार के सदस्यों के साथ अपने आवास-प्रतिष्ठान के कर्मचारियों व सेवकों को भी त्योहारी दी जाए। बच्चों को उपहार दिया जाए जिससे उनके मन में महेश नवमी के लिए आकर्षण जागृत हो, उनमें माहेश्वरी भाव का बीजारोपण हो।


किसी रिश्तेदार को सहयोग की आवश्यकता हो तो इस दिन उसका सहयोग करें, किसी कारण से तत्काल सहयोग संभव न हो तो उसका सहयोग करने का संकल्प करें। यह अवश्य ध्यान रखना चाहिए कि जिनका सहयोग किया जा रहा है उनका स्वाभिमान आहत न हो। समाज के किसी प्रकल्प अथवा सेवा निधि को आर्थिक सहयोग भेंट करें। भेंट राशि की संख्या से अधिक महत्व इस भाव का है कि हमने सेवा राशि अर्पित की।

महेश नवमी के उपलक्ष्य में इस दिन अथवा महेश नवमी के पूर्व किसी सुविधाजनक दिन सामूहिक रूप से कारसेवा की जाए। सिख समाज की इस अनुपम परंपरा को निभाते हुए अपने समाज द्वारा स्थापित भवन / धर्मशाला / अतिथिगृह, समाज के किसी प्रकल्प, किसी मंदिर अथवा किसी सार्वजनिक स्थल का कारसेवा हेतु चयन किया जा सकता है। अपने परिवार के पुरखों का श्रद्धा स्मरण करते हुए परिवार के प्रति उनके योगदान को याद किया जाए।

स्थानीय संगठन के माध्यम से अपने क्षेत्र के श्रद्धा-पुरुष, प्रादेशिक व राष्ट्रीय संगठन के माध्यम से प्रादेशिक व राष्ट्रीय स्तर पर श्रद्धा पुरुषों का स्मरण किया जाए। समाज के प्रति इनके समर्पण, योगदान से वर्तमान पीढ़ी को अवगत कराया जाए। व्यक्तिगत स्तर पर अथवा संगठनों के माध्यम से पौधोरापण भी किया जाए। वर्तमान में जब सम्पूर्ण राष्ट्र कोरोना महामारी से जूझ रहा है, ऐसे में अनिवार्य है कि हम मानवता की सेवा में अपना योगदान देकर अपने आपके माहेश्वरी होने का परिचय भी दें।


Sri Maheshwari Times
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