गूगल ज्ञान के समक्ष वरिष्ठजनों के “अनुभवी ज्ञान” का तिरस्कार उचित या अनुचित?

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हमारे देश में पर्यावरण संरक्षण को लेकर कानून बने हुए हैं। ऐसे मामलों की त्वरित सुनवाई के लिये ‘‘ग्रीन ट्रिब्यूनल’’ तक हैं। इन्हें देखकर ऐसा वर्तमान की अपेक्षाकृत एक दशक पूर्व परिवार में वरिष्ठ सदस्यों का मान-सम्मान और महत्व बहुत अधिक था। हर छोटी-बड़ी बात के लिए घर-परिवार के बड़े-बुजुर्गों से राय ली जाती थी। आज की पीढ़ी को वरिष्ठजनों के अनुभव अथवा शिक्षा की अपेक्षाकृत गूगल ज्ञान पर अधिक भरोसा है। अपनी हर छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी जिज्ञासा की पूर्ति के लिए हमारी भावी पीढ़ी गूगल पर निर्भर है।

परिवार में वरिष्ठ सदस्यों से कोई बात पूछना आज की पीढ़ी को गवारा नहीं। गूगल में ज्ञान तो मनुष्य ने अपने ज्ञानकोष से ही भरा है, फिर भी गूगल ज्ञान के सम्मुख वरिष्ठजनों के ज्ञान की अहमियत कमतर आंकी जाती है। इस प्रकार वरिष्ठजनों के अनुभव और ज्ञान के अनमोल खजाने का तिरस्कार उचित है अथवा अनुचित? आइये जानें इस स्तम्भ की प्रभारी सुमिता मूंदड़ा से उनके तथा समाज के प्रबुद्धजनों के विचार।


गूगल क्या जाने हमारे संस्कार और हमारी संस्कृति?
सुमिता मूंधड़ा, मालेगांव

पर्यावरण संरक्षण

प्राकृतिक असंतुलन का अर्थ प्राकृतिक आपदाओं को न्यौता देना है। अत: पर्यावरण संरक्षण के लिये सरकारी कानून का सख्ती से पालन जरूरत है और हमारी जिम्मेदारी भी है। भारत सरकार की कोशिश रहती है कि हमारा देश हरा-भरा रहे। इसके लिए भिन्न-भिन्न योजनायें और वास्तविक दुनिया से अधिक हमें आभासी दुनिया प्रिय लगने लगी है। आभासी दुनिया के सम्मुख हम अपनी अनमोल धरोहर यानि हमारे परिवार के वरिष्ठजनों को भी नजरंदाज करते जा रहे हैं।

वरिष्ठजनों की महत्ता और आवश्यकता कमतर होने लगी है और वृद्धावस्था में हमारा हाल तो उनसे भी बुरा होना निश्चित है क्यूंकि हमारे पदचिन्हों पर चलते हमारे बच्चे हमसे एक कदम आगे ही रहेंगे। गूगल में ज्ञान का भंडार भरकर हमने स्वयं को मशीन का गुलाम बना लिया है। निरंतर ज्ञान-विज्ञान-तकनीकी प्रगति होना गर्व की बात है पर इसके लिए मशीनों को सर्वोच्च समझना अज्ञानता है।

गूगल के पास संचित ज्ञान भंडार में शत-प्रतिशत सच्चाई नहीं होती है। साथ ही कभी-कभी तो गूगल स्वयं भ्रमित प्रतीत होता है, जो अपने सीमित ज्ञान से हमें एक ही प्रश्न के भिन्न-भिन्न जबाब देता है। पर अगर हम अपने सवालों को हमारे वरिष्ठजनों के समक्ष रखें तो उनसे अनुभवी और संतोषप्रद जवाब प्राप्त होता है।

हमारी हर जिज्ञासा का निवारण भी वरिष्ठजनों से अनेकानेक उदाहरणों के साथ मिलता है। गूगल हमारे परिवार के संस्कार और संस्कृति को पीढ़ी दर पीढ़ी नहीं ले जाता, अपने परिवार के संस्कार और संस्कृति को आनेवाली पीढ़ी तक पहुंचाने की नैतिक जिम्मेदारी हमें स्वयं ही निभानी होगी और इसके लिए परिवार में हर पीढ़ी को एक-दूसरे से जुड़ाव और लगाव बनाये रखना आवश्यक है।

ध्यान रखें कि पश्चिमी संस्कृति की तरह पराये गूगल को सर आंखों पर बैठाकर अपनों का तिरस्कार, हम भारतीयों के संस्कार न बन जायें। हमारे वरिष्ठजनों का मान-सम्मान हमारे लिए सर्वोपरी है तो उनका अनुभवी-ज्ञान है, हमारी अक्षुण्ण धरोहर।


अनुभव को भी महत्व दें
स्वाति मानधना ‘सुहासिनी’ बालोतरा

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो गूगल ज्ञान अनुभवी ज्ञान पर हावी होता जा रहा है। आधुनिक पीढ़ी छोटी से छोटी जिज्ञासा या समस्या के समाधान के लिए गूगल ज्ञान का ही सहारा लेती है और वरिष्ठजनों का अनुभवी ज्ञान उपेक्षित रह जाता है जो कि उचित नहीं है। गूगल ज्ञानी बाबा है, उसके पास ज्ञान का भंडार अवश्य है, लेकिन अनुभव नहीं।

अनुभव तो इंसान को कर्म करके ही प्राप्त होता है। हमारे बुजुर्गों ने जीवन में जो कुछ भी कर्म किए सही या गलत, उन्होंने उस अनुभव से सीखा। उन्हें पता है कि कौन सा काम कैसे करना है? उसके क्या परिणाम होंगे? उन्हें यह भी पता है कि अगर काम गलत हो गया तो अब उसे सही कैसे करना है? यह आपको कभी गूगल नहीं बता पाएगा।

काम के दौरान आपको जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा वह भी आपको गूगल नहीं बता पाएगाा। उन चुनौतियों से कैसे बाहर निकलना है। किसी भी कार्य को करने पर उसके मापदंड होते हैं सफल या असफल। असफलता की स्थिति में व्यक्ति का समय, पैसा सब कुछ दांव पर लग जाता है व दिमाग पर संयम कर विवेकपूर्ण निर्णय लेने में गूगल कतई आपकी मदद नहीं कर सकता।

उन परिस्थितियों में तो आपको आपके अपने वरिष्ठजन ही अनुभवी ज्ञान के आधार पर उस चक्रव्युह से बाहर निकाल पाएंगे। अत: गूगल बाबा से ज्ञान जरूर लें लेकिन अनुभवी ज्ञान को कमतर न आंकें।


प्रथम सम्मान वरिष्ठों के ज्ञान को मिले
राजश्री राठी, अकोला

वरिष्ठों के ज्ञान की बुनियाद अनुभव मजबूत नींव से बनी होती है, जो हर परिस्थिति में उनके साथ होती है और उसके लिए उन्हें किसी अन्य बाहय वस्तु के आश्रय की जरूरत नहीं रहती। वे हर समय हर स्थिति में तुरंत समस्या अथवा प्रश्न का हल सुलझाने में समर्थ होते है और उनके द्वारा समझाई हुई बात हमें लंबे अंतराल तक स्मरण रहती है क्योंकि वे हमारे प्रश्न को गहराई से समझते हुए उससे संलग्न अन्य बातों की उदाहरणों द्वारा पुष्टि करते हैं।

इसलिए उनके ज्ञान का सम्मान होना ही चाहिए। वरिष्ठों से हमें अपनी जिज्ञासा के अतिरिक्त कुछ अन्य बातें भी पता चलती हैं जो व्यवहारिक जीवन हेतु महत्त्वपूर्ण होती हैं। वर्तमान युग गूगल पर निर्भर रहता है, गूगल में ज्ञान की पूर्ति का माध्यम मानव ही होता है किसी का अनुभव कम तो किसी का ज्यादा रहता है।

ऐसे हालात में कई बार हमें गूगल से गलत जानकारी मिलने की भी संभावना रहती है। साथ ही गूगल नेटवर्क वाय फाय पर अवलंबित रहता है। किसी कारणवश अगर नेटवर्क में तकनीकी बाधा आती है तो हमारे सारे कार्य ठप्प हो जाते है। अत: प्रथम प्राधान्य तो वरिष्ठों के अनुभवी ज्ञान को ही मिले। घर में बड़े बुजुर्गो की अनुपस्थिति में गूगल का सहयोग लेना पड़े तो बात अलग है।


जो सही और जल्दी जानकारी मिले वह ठीक
पूजा काकाणी, इंदौर

गूगल एक तकनीकी ज्ञान है। वह तथ्यों के साथ वेबसाइट में फिट किया जाता है। उसमें शत प्रतिशत सत्य की संभावना है। वह मानव द्वारा विभिन्न रिसर्च के डाटा के आधार पर गूगल तक कम्युनिकेट किया जाता है।

इस प्रक्रिया में कई विद्वानों का सहयोग रहता है और पूरे विश्व में यह जानकारी पहुंचाई जाती है। कोई भी व्यक्ति अपने समय अनुकूल इससे कम्युनिकेट कर सकता है। बात रही वरिष्ठ जनों की, वह तो हमारे आदरणीय है। उनके अनुभव उनके जीवन में घटित घटना के अनुरूप हैं।

उनकी कार्यशैली उनके रीति रिवाज के अनुरूप है। आज सभी नई पीढ़ी पढ़ी लिखी हैं। वह कंप्यूटर और गूगल एक्सेस बहुत अच्छे और सरल तरीके से कार्य में लेते हैं। जीवन में जो कार्य सरल और जल्दी तथा सर्वमान्य हो, वह अपनाना चाहिए, क्योंकि जीवन बहुत छोटा है और कार्य अधिक हैं।


दोनों के ज्ञान का सामंजस्य जरूरी
ममता लखाणी, बीकानेर

जैसा कि सर्वविदित है कि परिवर्तन सदैव प्रभावशाली रहता है। वर्तमान का दौर तकनीकीकरण का दौर है। आज बच्चे हों या जवान या फिर वृद्ध सभी का ज्यादातर समय सदैव मोबाईल के इर्द-गिर्द घूमता है। ऐसे में ‘‘गूगल ज्ञान’’ को जीवन में उतारना स्वाभाविक है, परंतु वरिष्ठजनों का ‘‘अनुभवी ज्ञान’’ भी अपने आपमें बहुत अधिक महत्वपूर्ण होता है।

अनुभव से मिला ज्ञान ऐसा ज्ञान होता है, जो कि जीवन के हर एक उतार-चढ़ाव में आगे बढ़ता हुआ हमें प्राप्त होता है। अत: अनुभवी ज्ञान को नकारना मेरे हिसाब से उचित नहीं है, यदि सम्भव हो सके तो ‘‘गूगल ज्ञान’’ और ‘‘अनुभवी ज्ञान’’दोनों का उचित सामंजस्य बैठाकर यदि हम उसे अपनायें तो सदैव हमारे लिए सार्थक सिद्ध होगा।

गूगल ज्ञान भी कुछ विशेषज्ञों के ज्ञान पर आधारित है और वरिष्ठजनों का ज्ञान उनके द्वारा अपने जीवन से प्राप्त ज्ञान है। अत: उन्हें नकार कर नहीं अपितु सामंजस्य बैठाकर ज्ञान प्राप्त करना तथा अपने जीवन में उतारना हमें सफल बनायेगा।



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