श्री महेश सेवा समिति के गत 7 फरवरी को चुनाव संपन्न हुए। इसमें 12 पदों पर पदाधिकारी मतदान द्वारा चयनित हुए। इस चुनाव में दो पैनलों के मध्य चुनाव हुए जिसमें एक पैनल जय महेश गु्रप था जिसका नेतृत्व ओम प्रकाश नरानीवाल के पास था । इनका उद्देश्य साथ चलेंगे- तभी बढ़ेंगे। दूसरा पैनल महेश विकास ग्रुप था, जिसका नेतृत्व निर्वतमान अध्यक्ष राधेश्याम चेचानी के पास था, जिनका उद्देश्य ‘‘विकास किया है- विकास करेंगे’’ था। मुख्य चुनाव अधिकारी राधेश्याम सोमानी व चुनाव अधिकारी जगदीश प्रसाद कोगटा के साथ करीब 45 जनों ने चुनाव प्रक्रिया सम्पन करवाई। कुल 656 मतदाता में से 585 मतदाताओ ने मतदान किया। जय महेश ग्रुप के श्री नरानीवाल 76 मतो से विजय हुए व अध्यक्ष चुने गए। श्री नरानीवाल को 324 व चेचानी को 248 वोट प्राप्त हुए। सचिव पद पर राजेन्द्र कचोलिया 155 मतो से विजय रहे। इसमें प्रत्याशी के जी सोनी को 211 व कचोलिया को 366 मत प्राप्त हुए। उपाध्यक्ष पद पर सत्यनारायण मूंदड़ा ,रमेश चंद्र बाहेती, कृष्ण गोपाल जागेटिया व फूलचंद दरक उम्मीदवार थे, जिसमें सर्वाधिक मत सत्यनारायण मूंदड़ा व कृष्ण गोपाल जागेटिया को प्राप्त हुए और उपाध्यक्ष चुने गए। कोषाध्यक्ष पद पर राजेश बाहेती 55 वोटों से विजय रहे। श्री बाहेती को 312 व प्रत्याशी पुरुषोत्तम गगरानी को 257 मत प्राप्त हुए। सह सचिव पद पर प्रहलाद हिंगड़ को 301 व गोपाल सोमानी को 256 वोट प्राप्त हुए। श्री हिंगड़ 48 वोटों से विजय रहे। संचालक सदस्यों में केदार जागेटिया, ओम प्रकाश मालू, दिलीप (अखेराम) तोषनीवाल , सुरेश काबरा को सर्वाधिक मत प्राप्त हुए व संचालक सदस्य चुने गए।
इन्हें लेकर चुनाव में रही सुर्खी:
जब से श्री महेश सेवा समिति के चुनाव घोषित हुए तब से सोशल मीडिया पर कमैंट्स की भरमार थी। वोटिंग के समय में राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारियों का बने रहना व सामान्य समाजजनों की तरह सबके साथ समय व्यतीत करना। महेश विकास ग्रुप के 9 सदस्यों का जीतना जबकि अध्यक्ष राधेश्याम चेचानी का हारना जिसमें भीतरगात की आशंका की चर्चा रही। दो राधेश्याम का अध्यक्ष पद पर खड़ा होना, निर्दलीय राधेश्याम चेचानी का असर बेअसर रहा उनको मात्र 8 वोट प्राप्त हुए। इनके के खड़े होने से महेश विकास ग्रुप को प्रचार के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी। इसके लिए सोनी जी के नाम से मेसेज का होल्डिंग व महेश विकास ग्रुप के राधेश्याम चेचानी के नाम से भी होडिंग्स गेट पर लगाया गया। दोनों ग्रुपों द्वारा समिति की प्रगति के लिए घोषणा पत्र बनाकर प्रचार किया व अलग अलग चुनाव कार्यालय खोले व मतदाताओ को अपने पक्ष में करने का पूरा प्रयास किया।
नजर महेश सेवा समिति पर:
वर्ष 2008 में श्रीमहेश सेवा समिति की कमान चेचानी के हाथ आई तब कर्मचारियों को भुगतान करने का पेमेंट भी नही था।लेकिन लोन लेकर अपने श्रेष्ट मैनेजमेंट से संस्था को आज फर्श से अर्श तक पहुंचाया।आज संस्था ने वटवृक्ष का रूप ले लिया है। यह समाज की एकमात्र ऐसी संस्था है जो पिछले 10 वर्षों से बिना किसी के आर्थिक सहयोग के व बगेर किसी दानदा`ताओ के द्वारा संचालित है ओर बहुत अच्छी स्थिति में है। समाजजनों की जानकारी के बिना लगभग 150 नए सदस्य बनाये गए। वर्ष 2008 से पूर्व इस संस्था में निर्विरोध ही चयन हुए।










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