मन में इच्छा हो और दृढ़ संकल्प हो तो क्या नहीं हो सकता? बस इसी को सिद्ध कर रहीं है, मुम्बई की नेहा बिन्नाणी, जो पेशे से बैंकिंग से जुड़ी रहीं लेकिन उनकी लेखनी अनवरत चलती ही रही।
मुंबई प्रवासी बीकानेर की बहू नेहा बिन्नाणी की कहानियां व कविताएं इन दिनों नामचीन एप ‘‘मॉम्सप्रेस्सो’’ पर धूम मचा रही है। नेहा की एक नवीन रचना ‘वे दिन जब सारा पड़ोस अपना घर होता था’ को इस एप पर एक लाख से अधिक लोग पढ़ चुके हैं जबकि इनकी पहली वाली रचना ‘ॐ इग्नोराय नमः’ को बारह लाख पच्चीस हजार से ज्यादा लोग अब तक पढ़ चुके हैं। उन्हें अब बधाइयां देने वालों का तांता लग गया है। इनकी रचनायें माहेश्वरी पत्रिकाओं के साथ दैनिकों में भी लगातार छप रही हैं।
ऐसे बड़े लेखन की ओर कदम
नेहा के पति सुरजकुमार बिन्नाणी मुम्बई में कल्पतरू नामक कंपनी में डीजीएम हैं जबकि नेहा खुद बैंकिंग व्यवसाय से जुड़ी रही हैं। नेहा बिन्नाणी का जन्म कोटा में हुआ था। कोटा से कॉमर्स में कॉलेज शिक्षा पूरी करने के दौरान ही उनका साहित्य से जुड़ाव हुआ। वे एम.कॉम तथा एम.बी.ए. करने के पश्चात् बैंकिग व्यवसाय से जुड़ गई। फिर इस व्यवसाय से हटने के बाद गिफ्ट आयटम के क्रिएटिव व्यवसाय से जुड़ गई।
उन्होंने कई रचनाएं लिखी मगर उनको नाम / ख्याति हिन्दी डॉट मॉम्सप्रेस्सो नामक एक एप से मिली। इस एप पर नेहा ने दर्जनों रचनाएं पोस्ट की हैं। अब उनको पढ़ने वालों की संख्या का आंकड़ा एक करोड़ बत्तीस लाख को पार कर गया है। नेहा ने बताया कि वे कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की कहानियों से बहुत प्रभावित हुई। मुंशी जी की कहानी लिखने की शैली ने ही उन्हें कहानियां लिखने के लिए प्रेरित किया।
वे मुंशी प्रेमचंद की अधिकांश कहानियों व उपन्यासों को पढ़ चुकी हैं। खाली समय होने पर उन्हें कहानियां लिखने व पढ़ने का भी शौक है। श्रीमती बिन्नाणी ने बताया कि वे जल्द ही अपना एक कहानी संग्रह प्रकाशित करवाना चाह रही हैं।
परिवार से भी मिला प्रोत्साहन
नेहा बिन्नाणी पहले कोटा व बाद में मुंबई में बैंकों में सेवाएं दे चुकी हैं। मगर इन दिनों वे पूर्णतया कहानियां लिखने में व्यस्त है और उनकी कहानियां हमारे समाज के ईद गिर्द माहौल पर ही लिखी हुई है। यही वजह है कि उनकी कहानियों को लोग ज्यादा से ज्यादा पसन्द कर रहे हैं।
उनके ससुर गोवर्धनदास बिन्नाणी उर्फ राजा बाबू स्वयं एक लेखक हैं। वे बरसों तक कोलकाता में रहे व नामचीन आर्थिक सलाहकार व वित्तीय सलाहकार हैं तथा कोलकाता स्थित एक बिरला कम्पनी से लेखापाल पद से सेवा निवृत हुये हैं। वे स्वयं समय-समय पर आर्थिक सुधार हेतु, सामाजिक, धार्मिक, समसामयिक विषयों पर आलेख लिखते रहते हैं।










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