जब कैरियर चुनने का अवसर आता है तो बहुत बड़ी चुनौती सामने खड़ी होती है, सही कैरियर चयन की। आखिर हम चुनें तो क्या चुनें और क्यों चुनें? क्या है जिसमें हमें मिल सकती है, विशिष्ट सफलता।

माहेश्वरी समाज को विश्व में अपनी योग्यता, सूझ-बूझ, कार्यकुशलता, ईमानदारी एवं संस्कारों के लिए जाना जाता है। माहेश्वरी समाज के लोगों ने स्वतंत्रता आन्दोलन, देश के औद्योगिक विकास, देश के लोगों के कल्याण के लिये स्कूल, हॉस्पीटल एवं शिक्षण संस्थाओं की स्थापना करने में अपना अभूतपूर्व योगदान दिया है।
इन्हीं योग्यताओं के साथ माहेश्वरी समाज की युवा पीढ़ी भी उद्योग-व्यवसाय के साथ-साथ अपना कैरियर बनाने की ओर चल पड़ी है। जब हम कैरियर की बात करते हैं तो कुछ प्रमुख कैरियर हमारे सामने आते है इनमें राजनीति एवं सिविल सर्विस आदि भी शामिल है, जहाँ पर हमारे बच्चे देश की नीति निर्धारण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है।
राजनीति
राजनीति में जाने के लिए संख्या बल बहुत आवश्यक है। ऐसे सुझाव कई तरफ से आ रहे है कि सब माहेश्वरी अपने नाम के आगे माहेश्वरी लिखें जैसे माहेश्वरी अनिल राठी, माहेश्वरी सुनील भुतड़ा इत्यादि इत्यादि।
इन सब से जब जनगणना होगी तो जाति वर्ग की संख्या उठायी जायेगी एवं सारे माहेश्वरी एक जगह होने से हम एक बडे़ समूह में नजर आएंगे एवं पोलिटिकल पार्टीज को हमारे संख्या बल का टिकट वितरण में ध्यान रखना होगा। माहेश्वरी कैंडिडेट के साथ पूरा समाज वैश्य समुदाय से भी जुड़ा हुआ है क्योंकि हमारे कई माहेश्वरी भाई वैश्य समुदाय के संस्थानों से जुड़े हुए हैं।
सिविल सर्विस
नौकरी में सिविल सर्विस के मुकाबले में कोई नौकरी नहीं गिनी जाती, क्योंकि सिविल सर्वेंट का मान-सम्मान और इसकी पावर अतुलनीय रहती है। प्रति वर्ष करीब 6 लाख से 8 लाख बच्चे सिविल सर्विस में अपीयर होते हैं और करीब 1000-2000 बच्चे सिविल सर्विस में चुने जाते है और इनमें भी आईएएस में आने वालों की संख्या तो 160-200 के बीच ही रहती है।
आइएएस में आना मुश्किल होता है लेकिन असंभव नहीं होता। श्रीकांत बालदी से लेकर अनेकों नाम हमारे सामने हैं जिन्होंने आईएएस बनकर समाज का एवं देश का गौरव बढ़ाया है। इसी उद्देश्य को लेकर मेरे पोते दिव्य चांडक की दिल्ली में मुखर्जी नगर में यूथ डेस्टिनेशन के नाम से आईएएस की कोचिंग पिछले 3 वर्षों से कार्यरत है।
मुझे बताने में खुशी है कि दिव्य माहेश्वरी युवाओं में जो कोचिंग करना चाहते हैं उनको फीस में 25 प्रतिशत की रियायत (छूट) देने के लिए तैयार हैं। इच्छुक युवा उनसे सम्पर्क कर सकते हैं।
फिल्म
युवाओं को कैरियर के बहुत ऑप्शन हैं जैसे-आईटी, आईएम, मास कम्युनिकेशन, पत्रकारिता, आईआईटी एवं अन्य, जिन पर विस्तृत चर्चा की जा सकती है। पर विशेषकर मेरा ध्यान एक अन्य उद्योग की तरफ गया जहाँ नाम है एवं पॉपुलैरिटी है। पिछले दिनों में इसी संदर्भ में मेरी मुलाकात राजस्थान के मेड़ता के रहने वाले हमारे अपने प्रिय के. सी. बाकोडिया जी से हुई जो कि बहुत सीनियर फिल्म प्रोड्यूसर एवं डायरेक्टर हैं।
उनके बारे में कहते हैं वे जिसके ऊपर हाथ रख देते है वो देश का महानायक एवं कलाकार बन जाता है। जब मैंने हमारे माहेश्वरी युवाओं के बारे में जिक्र किया तो उन्होंने सहर्ष मेरे प्रस्ताव को स्वीकार किया एवं बताया कि जिन माहेश्वरी युवा में अभिनव की या गाने की विलक्षण क्षमता हो उन्हें आप मेरे पास भेज सकते है।
हालांकि इस उद्योग में भी सफलता पाना बहुत मुश्किल होता है पर जिन युवाओं में दृढ़ निश्चय, संकल्प शक्ति और जज्बा हो तो वो बच्चे अपनी मंजिल पर पहुंच सकते हैं।










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