नारी जीवन का शत्रु सर्वाइकल कैंसर

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स्तन कैंसर की तरह ही सर्वाइकल कैंसर अर्थात गर्भाशय मुख का कैंसर भी नारी जीवन की ऐसी बीमारी है, जो सुखी जीवन में जहर घोल देती है। वैसे वर्तमान में इससे बचाव व इसका उपचार असंभव नहीं है, बस सही समय पर सही कदम उठाने भर की जरूरत है।

स्तन कैंसर ( BREAST CANCER ) के बाद महिलाओं में होने वाली दूसरी बड़ी बीमारी है सर्वाइकल कैंसर। यह ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) के कारण होता है, जो कि यौन संक्रमण से फैलता है। इसे न केवल रोका जा सकता है अपितु इसे बहुत जल्दी पकड़ा जा सकता है। समय रहते इसका उपचार किया जाए तो बचा जा सकता है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या है, जागरूकता का अभाव। बच्चेदानी से गंदें पानी का रिसाव, महावारी का अनियमित होना, महावारी के बीच असामान्य रक्तस्त्राव होना, संभोग के समय या बाद में खून जाना, संभोग के दरम्यान् दर्द होना, रजोनिवृत्ति के बाद असामान्य रक्तस्राव होना, कमर या पैर में अधिक दर्द होना या पेशाब में रूकावट इसके प्रारंभिक लक्षण हैं।


सतर्कता ही बचाव

धूम्रपान, कम उम्र में अधिक बच्चे, कमजोर प्रतिकारक शक्ति, कई पुरूषों से यौन संबंध, गुप्तांगों की सफाई में कमी, एड्स का होना, 5 साल के ऊपर मौखिक गर्भनिरोधक गोली का इस्तेमाल व मोटापा आदि इसके खतरे को बढ़ा देते हैं। अगर महिलाएं नियमित रूप से अपना पैप टेस्ट करवाती हैं तो पूरी तरह से इस बीमारी से बच सकती हैं। 21 से 29 वर्ष की महिलाओं को प्रत्येक 3 साल में एक बार पैप टैस्ट करवाना चाहिए। उन्हें एचपीवी टैस्ट की सलाह नहीं दी जाती। 30 से 65 साल की महिलाओं को पैप टैस्ट और एचपीवी टैस्ट (को-टेस्टिंग) प्रत्येक 5 साल में करवाना चाहिए। प्रत्येक 3 साल में एक बार पैप टैस्ट करवाना भी सही रहता है। पेल्विक अल्ट्रासाउंड, एमआरआई, कोलपोस्कोपी और बायोप्सी से निदान होने लगता है।


एडवांस स्टेज में भी इलाज संभव

खुशखबरी यह है कि इससे बचाव के लिए वैक्सीन उपलब्ध है जो 9 साल की उम्र से लेकर 45 वर्ष तक की महिलाओं को दी जानी चाहिए। नियमित पैप टेस्ट स्मीयर द्वारा इसको पहली स्टेज से भी पहले पकड़ा जा सकता है। पहली स्टेज में आपरेशन या रेडियोथेरेपी से इलाज संभव है। अगर कैंसर पहली स्टेज से ऊपर है तो रेडियोथेरेपी के साथ कीमोथेरेपी से इलाज संभव है। एडवांस स्टेज में भी रोगी के लक्षणों को काबू किया जा सकता है और उम्र बढ़ा पाना संभव है। रेडियो थैरेपी में किरणों द्वारा बिना किसी दर्द के इसका इलाज किया जाता है। टेलीथेरेपी और ब्रेकीथेरेपी दोनों के प्रयोग से महिला पूरी तरह स्वस्थ होकर सुखमय जीवन व्यतीत कर सकती है। आखिरी स्टेज में भी इम्यूनोथेरेपी से इसको काबू किया जा सकता है।


इन बातों का रखें ख्याल

कैंसर के लक्षणों को थोड़ा भी नजरअंदाज ना करिए। एक यौन साथी से वफादारी रखिए। गुप्तांगों की सफाई का विशेष ध्यान रखें। नियमित पेप स्मीयर टेस्ट करवाएं। वैक्सीन लगवाएं। कोई कैंसर का लक्षण हो तो उसे अनदेखा न करें। कैंसर स्पेशलिस्ट से तुरंत इलाज करवाएं। अच्छा भोजन खाएं। भोजन में सलाद, फल, सूखे मेवे, हरी सब्जियां, संपूर्ण अनाज, एंटीऑक्सीडेंट, फोलिक एसिड, विटामिन ई आदि का पर्याप्त प्रमाण रखें। व्यायाम करें। अपना वजन कंट्रोल में रखें। धूम्रपान से बचें। सही समय पर सही परिवार नियोजन साधन अपनाएं। हंसते-खेलते, मुस्कुराते हुए सकारात्मकता से अपने परिवार के साथ आनंदित जीवन व्यतीत करें। मानसिक तनाव से दूर रहे। सदा स्वस्थ रहें। याद रखें हमें कैंसर से हरदम दो कदम आगे रहना है कैंसर से हारना नहीं है, कैंसर को हराना है।


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