कोई भी सामाजिक गतिविधि हो उसकी सफलता के लिये समर्पित व कुशल नैतृत्व की आवश्यकता होती है। ऐसे ही कुशल नेतृत्व व मार्गदर्शक हैं मेवाड़ (राज.) के ग्राम रुद् निवासी 81 वर्षीय परशुराम मूंदड़ा जिनके नैतृत्व व मार्गदर्शन में अन्य सामाजिक गतिविधियों के साथ ही स्थानीय माहेश्वरी भवन भी साकार रूप ले रहा है।
मेवाड़ का प्रमुख धार्मिक स्थल मातृकुन्डिया की बनास नदी के किनारे पर है। यह मेवाड की गंगा के नाम से विशिष्ट पहचान के साथ मेवाड़ का हरिद्वार भी कहा जाता है। वर्तमान में यह छोटा सा गाँव अपनी विशिष्ट समाजसेवा के लिये भी पहचाना जा रहा है। इसमें शामिल है, सर्वसुविधायुक्त माहेश्वरी भवन भी जो यहाँ आने वाले आगंतुकों को इस छोटे से गाँव में किसी मेट्रो सिटी के होटल की तरह आवासीय सुविधा प्रदान कर रहा है।
इसे मूर्त रूप दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले समाजसेवी हैं, रुद् निवासी 81 वर्षीय परशुराम मूंदड़ा जो वर्तमान में इसके संचालन में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। आपके विशिष्ट आतिथ्य में राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भगवान परशुराम पैनोरमा का शिलान्यास किया था, जो अब बन कर तैयार है।
ऐसे लिया माहेश्वरी भवन ने साकार रूप
इस माहेश्वरी भवन का प्रबंधन सम्भाल रहे श्री मूंदड़ा का जन्म समाजसेवी मूंदड़ा परिवार में श्री गोवर्धनलाल मूंदड़ा के यहाँ हुआ था। बचपन से पारिवारिक माहौल के कारण सेवा भावना संस्कार के रूप में ही मिल गई। इस माहेश्वरी भवन का निर्माण श्री मूंदड़ा के ताऊजी श्री मोहनलाल मूंदड़ा की सोच व सान्निध्य में प्रारम्भ हुआ था।
वर्तमान में यह भवन राश्मि तहसील जिला चित्तौड़गढ़ में स्थित है व इसका संचालन रजिस्टर्ड ट्रस्ट द्वारा हो रहा है। आप 20 अप्रैल 1990 से अध्यक्ष पद पर सेवा दे रहे हैं। ट्रस्ट में मेवाड़ के 41 गाँव-नगर के माहेश्वरी परिवार से प्रतिनिधित्व है। धर्मशाला में 24 कमरे एवं 20 दुकाने हैं। धर्मशाला के तीन दिशाओं में द्वार बने हुए है। इसमें सत्संग भवन भी बना हुआ है तथा 4 एसी रूम अटैच लैटबाथ का निर्माण होना है।
व्यस्तता में भी सेवा अनवरत
श्री मूंदड़ा सीमेंट व्यवसाय से सम्बंधित रहे हैं, इसके बावजूद वे समाज को अपनी सेवा देने में कभी पीछे नहीं रहे। वर्तमान में आपके पास सीमेंट की एजेन्सी है जिसे सुपुत्र भंवर, राधेश्याम, व अभिषेक सम्भालते हैं। आपकी चार पुत्रियाँ हैं- यशोधरा, राधा, कौशल्या, सुशीला। यशोधरा कुवारिया की सरपंच रही है।
वर्तमान में आपका पोते, पोतियों, दोहितों दोहितियों का भरा पूरा परिवार है। यहाँ स्थित माहेश्वरी भवन में कबूतरों के दाना-पानी की व्यवस्था के लिए भी अलग से फंड बना हुआ है, जो सुचारू रूप से दान दाताओं के आर्थिक सहयोग से गतिमान है। श्री मूंदड़ा पूर्व में राश्मी माहेश्वरी सभा के अध्यक्ष व चित्तौड़गढ़ जिला माहेश्वरी सभा के उपाध्यक्ष का दायित्व भी सम्भाल चुके हैं।










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