कैसे करें अखरोट का सेवन

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अखरोट आम भाषा में कहा जाए तो एक ड्राईफ्रूट है, जिसका लोग स्वाद के कारण उपयोग करतें है। बहुत कम लोग जानते हैं की अखरोट का सेवन कैसे करें? यदि तरीका सही हो तो अखरोट अमृत की तरह सेहत का कारण बन सकता है।

हमारे जीवन के आसपास बहुत सी चीज़ें विद्यमान हैं लेकिन जब तक हम उसके गुण और प्रभाव से अनजान हैं तब तक उसका लाभ नहीं उठा पाते हैं। अखरोट भी हमारे लिए बहुत ही फायदेमंद है। इसकी दो जातियां पायी जाती है।

जंगली अखरोट 100 से 200 फ़ीट तक ऊंचाई पर अपने आप उगते हैं और इसके फल का छिलका मोटा होता है, लेकिन कृषिजन्य अखरोट का पेड़ 40 से 90 फ़ीट ऊँचा होता है और इसके फलों का छिलका पतला होता है इसे हम कागज़ी अखरोट कहतें हैं।

पर्वतीय देशों में होने वाले पीलू को ही अखरोट कहते हैं इसका नाम कर्पपाल भी है। इसकी मींगी मीठी बादाम के सामान पुष्टकारक और मज़ेदार होती है।

क्या छिपा है अखरोट में:

अखरोट में मौजूद तत्व हमारी सेहत के लिए काफी फायदेमंद है। साथ ही इसमें ओमेगा 3 भी पाया जाता है जो हमारे दिल को स्वस्थ रखता है। अखरोट में mangenese, phosphorus, vitamin तथा iron भी पाया जाता है।

अखरोट की तुलना चिलगोजा और चिरोंजी से की जा सकती है। अखरोट गरम व शुष्क प्रकृति का होता है। अखरोट पित्त प्रकृति वालों के लिए हानिकारक होता है, लेकिन अनार का पानी अखरोट के दोषों को दूर करता है। अखरोट बहुत ही बलवर्धक है। हृदय को कोमल करता है।

हृदय और मस्तिष्क को पुष्ट करके उत्साही बनाता है। इसकी भुनी हुई गिरी सर्दी से उत्पन्न खांसी में लाभदायक है और यह वात, पित्त, टीबी, हृदय रोग, रुधिर, दोष वात, रक्त और जलन का नाश करता है। आप अखरोट का सेवन 10 ग्राम से 20 ग्राम तक की मात्रा में कर सकतें हैं।

कैसे करें अखरोट का सेवन:

20 ग्राम अखरोट को एक ग्लास दूध में डालकर उबाल लें, उबलने के बाद मिश्री डालकर अच्छी तरह से मिला लें, फिर थोड़ी देर बाद मिश्रण का सेवन करे। इस सही विधि से सेवन करने से स्मरण शक्ति बढ़ती है।

इसमें मौजूद विटामिन ई, ओमेगा 3 तथा एंटीऑक्सीडेंट तत्व मस्तिष्क को स्वस्थ बनाने में मदद करतें है। अगर आपको पथरी की शिकायत है तो साबुत अखरोट को कूट-छानकर एक चम्मच सुबह-शाम ठन्डे पानी में कुछ दिनों तक नियमित रूप से सेवन कराने से पथरी मूत्र-मार्ग से बाहर निकल जाती है।

जिन माँ में दूध की कमी होती है तो गेहूँ की सूजी, अखरोट के पत्ते 10 ग्राम को एक साथ पीसकर दोनों को मिलाकर गाय के घी में पूरी बनाकर सात दिन तक खाने से दूध की वृद्धि होती है।


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