Save 20% off! Join our newsletter and get 20% off right away!
अहंकार रो नतीज़ो
अहंकार रो नतीज़ो

अहंकार रो नतीज़ो

खम्मा घणी सा हुक्म म्है एक राजस्थानी कहावत पढ़ी  कि कुत्ता लड़े दांता सूं, मूरख लड़े लाता सूं और बुद्धिमान लड़े बातां सूं…! हर कोई लड़ने में माहिर है जाणे लड़न में कांई लाडू मिले… ! साधारण व्यक्ति आपस में मिले तो एक दूजे ने राम-राम करे या नमस्कार करे…

लेकिन एक बुद्धिमान दूजे बुद्धिमान सूं मिळै  तो एक दूजे ने हाथ भी नहीं जोड़ें… क्योंकि दोनों ने बुद्धि रो अभिमान हुव्है कि पैली म्हैं क्यों हाथ जोड़ूँ म्है तो ज्यादा बुद्धिमान हूँ।

हुक्म यो अभिमान ही मन में कठोरता, कटुता, कलह, संघर्ष पैदा करे… और मन सूं प्रेम रो सरोबर खत्म कर देवे या युं केव्हा कि सुखा देवे और सुखियोड़ी जमीन में ज्यों दरार पड़ जावे हुक्म अभिमानी रे मन पर भी वेड़ी ही दरारा पड़ जावे। स्नेह री कमी सूं मेलज़ोल में कमी आ जावें।

हुक्म जिणमें व्यक्ति खुद भी दुःखी रेहवे व जढ़े बैठे उण बैठक में साथे बैठा लोगा ने भी दुःखी करें । घमंड दुखों री जड़ है हुक्म। घमंडी व्यक्ति उण व्यक्ति सुं भी ज्यादा रोवे जिने माथे वो घमंड करे।

अभिमान रो अगलो रूप क्रोध है… व्यक्ति आपरे अभिमान व क्रोध सूं खुद भी दंडित हुव्है और दुसरो ने भी दंडित करणी बात सोचतो रेहवे। परशुरामजी इतो क्रोध कियो पर राम री धीरजता रे आगे वाणों अभिमान पाणी-पाणी हुग्यो।

इतिहास गवाह है कि प्रतिशोध री भावना में खुन री नदियां बही है। आपा एतिहासिक राजा-महाराजाओं रो जीवन पढ़ा तो समझ में आवे कि एकमात्र कारण प्रतिशोध री भावना ही है… जिनो परिणाम खून-खराबों ही हुयों है। ‘होडा होड़ गोडा फोड़’ कहावत भी लोकप्रसिद्ध है। 

हुक्म सन्त महात्मा हमेशा केह्वे…
लोगों रे दिल ने जीत सकों तो संस्कार सूं..
और जितोयोड़ी बाज़ी भी हार जावो अहंकार सूं।

मित्रों, आपा मिळने सब जीवन में सरलता लावा, प्रतिशोध ने हटावा और प्रेम री गंगा, यमुना ने ह्दय में बहावा। निर्मल मन में ही सच्चे प्रेम रो  अहसास होवे। भगवान राम भी नवधा भक्ति में एक भक्ति मन री निर्मलता  बताई.. निर्मल मन जन सो मोहि पावा, मोहि कपट छल छिद्र न भावा। बाईबल भी याहीं कैवे हुक्म, blessed are the pure in heart for unto them is given knowledge of god यानी मैं निर्मल मन में ही निवास करूं।

हुक्म संसार रा सारा ग्रन्थ एक ही बात करे पर ओ आदमी कलह, क्लेश , कलुष कोनी छोड़े हुक्म… पछे करम रा लट्ठ पड़े जणे ईश्वर री बात याद आवे, पछतावो हुवे पण जण तक समय निकल जा अर कृषि सुखिया पछे पाणी रो कई काम हुक्म।

-स्वाति जैसलमेरिया

Give us a like on Facebook