सपने तो सभी देखते हैं, बस सच उन्हीं के होते हैं, जिनमें उन्हें सच करने का हौंसला होता है। इन्हीं पंक्तियों को चरितार्थ कर रही हैं, चित्तौडगढ़ निवासी 20 वर्षीय अक्षी पुंगलिया, जो समाज की सबसे कम उम्र पायलट तो बनी ही हैं, साथ ही चित्तौड़गढ़ जिले को यह उपलब्धि दिलाने वाली पहली बेटी है।
चित्तौड़गढ़ के माहेश्वरी समाज ही नहीं, बल्कि जिले के हर निवासी के लिये अक्षी एक आदर्श बन चुकी है। बेटियों को दोयम दर्जे का स्थान देने वालों के लिये तो वे किसी सशक्त प्रत्युत्तर से कम नहीं हैं।
आखिर चित्तौड़गढ़ जिले की सबसे कम उम्र पायलेट बनने का गौरव उन्होंने जिले को दिया है। अभी तक 20 वर्ष का कोई युवक भी चित्तौड़गढ़ से पायलट नहीं बना है। ऐसी स्थिति में समाज का सिर यदि गर्व से ऊँचा हो जाऐ, तो स्वाभाविक ही होगा।
बचपन से देखा सपना किया साकार
अक्षी का जन्म चित्तौड़गढ़ में समाज सदस्य शिवकुमार व हेमा पुंगलिया के यहाँ हुआ था। दादा-दादी श्री जमनालाल व शांतादेवी पुंगलिया सहित भरे पूरे परिवार में स्नेह के साथ बचपन से पायलट बनने का सपना भी सौगात के रूप में मिला।
बस यही स्वप्न आज माता के प्रोत्साहन व पिता के सहयोग तथा परिवार के सम्बल से साकार रूप ले चुका है और वह भी मात्र 20 वर्ष की अवस्था में। एक बेटी के लिये इस क्षेत्र में कदम रखना तथा सफलता प्राप्त करना आसान नहीं था लेकिन उन्होंने यह कर दिखाया।
ऐसे पूर्ण की सफलता की यात्रा
अक्षी की स्कूल शिक्षा चित्तौड़गढ़ के यूरोपियन किड्स स्कूल से प्रारम्भ हुई फिर आदित्य बिड़ला स्कूल से 10वीं तक की पढ़ाई की। हायर सेकेण्डरी कक्षा 11वीं व 12वीं की पढ़ाई साईंस मैथ्स के साथ डी.पी.एस. उदयपुर से 90 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की।
इसके बाद परिवार की प्रेरणा से पायलेट ट्रेनिंग की ओर उनके कदम बढ़ गये। अक्षी ने एम.पी. फ्लाइंग क्लब इंदौर से पायलट ट्रेनिंग पूर्ण की।












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