श्री आमज माताजी माहेश्वरी जाति के काकाणी खाँप की कुल देवी हैं।
राजस्थान चार भुजाजी से केलवाड़ा-उदयपुर मार्ग पर ७ कि.मी. ग्राम ‘रीछेड़’ एवं ‘रीछेड़’ से ३ कि.मी. की दूरी पर बायीं ओर एक पहाड़ी पर स्थित है ‘आमज माताजी’ का मंदिर। मंदिर पर पहुँचने हेतु लगभग ३०० सिढ़ियाँ चढ़ना पड़ती है।
सबसे पहले ‘गणेश जी’ का मंदिर आता है, इसके पश्चात् ‘आमज माताजी’ का छोटा मंदिर एवं यहाँ से लगभग १५-२० फिट ऊपर ‘आमज माताजी’ का बड़ा मंदिर स्थित। छोटे मंदिर के पास हो एक मनोरम झरना एवं छोटा कुंड है जहाँ १२ महीने स्वच्छ पीने योग्य ठंडा जल उपलब्ध रहता है। दोनों ही मंदिर सुंदर हैं एवं विशेष रूप से बड़ा मंदिर अत्यंत ही सुंदर है। माताजी की मूर्ति अत्यंत मनोरम एवं आकर्षक है।
विशेष आयोजन:
ज्येष्ठ माह के शुक्लपक्ष की ९ (नवमी) के दिन दोपहर बाद मंदिर पर ध्वजा चढ़ती है एवं मेला लगता है जिसका समापन ध्वजारोहण के पश्चात् होता है। इसी प्रकार भाद्वा माह के शुक्लपक्ष को ९ (नवमी) के दिन ‘माताजी’ की मीठी पूजा होती है एवं ‘खीर’ का भोग लगता है। पूरे रीछेड़ गाँव का इस दिन उत्पादित होने वाला दूध माताजी के मंदिर को जाता है एवं सिर्फ खीर का भण्डारा होता है।
माताजी की उत्पत्ति:
ऐसा माना जाता है कि माताजी का यहाँ आगमन ग्राम ऊनवाँ से हुआ एवं वे पहाड़ी पर स्थित बाँस के पौधे से प्रगट हुई थी।प्रतिदिन दोनों समय सुबह व संध्या को माताजी की आरती पुजारी खेमराज पण्डित द्वारा सम्पन्न की जाती है। नवरात्रि में विशेष रूप से हवन होता है।
‘आमज माताजी’ की आस पास के क्षेत्र एवं दूरस्थ क्षेत्र में बहुत ख्याति एवं प्रसिद्धि है। मान्यता है कि माताजी के दरबार में सच्चे मन से रखी गयी प्रार्थना स्वीकार होती है। इसी वजह से क्षेत्र के सभी जाति के लोगों में माताजी की प्रसिद्धि है।
कैसे पहुँचें:
नाथद्वारा से ६० कि.मी. की दूरी पर चारभुजा मंदिर है। यहाँ से केलवाड़ा-उदयपुर मार्ग पर ७ कि.मी. दूर ग्राम रीछेड़ है जहाँ से ३ कि.मी. की दुरी पर एक पहाड़ी पर मंदिर स्थित है। नाथद्वारा से वहाँ सड़क मार्ग से पहुँचा जा सकता है। अजमेर से उदयपुर वाया चारभुजा आमज होकर जाती है। जोधपुर से कुम्भलगढ़ के रास्ते में गाँव रीछेड़ आता है।









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