श्मशान का नाम सुनते ही अंदर ही अंदर एक अजीब सिहरन होती है और स्वत: ही एक सन्नाटे की कल्पना हो जाती है। लेकिन यह कल्पना पंचमुखी मुक्तिधाम भीलवाड़ा के लिये सही नहीं है। यह तो कल्पना से परे प्राकृतिक सुंदरता से ओतप्रोत अत्यंत सुन्दर पर्यटन स्थल का रूप ले चुका है। इसके इस कायाकल्प का श्रेय जाता है, ख्यात पर्यावरणविद बाबूलाल जाजू को।
भीलवाड़ा का पंचमुखी मुक्तिधाम एलपीजी शवदाह गृह, पुस्तकालय, योग क्लासेज, भक्ति संगीत, वाटर हार्वेस्टिंग आदि से युक्त होकर आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। भीलवाड़ा का यह मुक्तिधाम देश में अपनी अलग पहचान रखता है। पंचमुखी मुक्तिधाम परिसर देश का सम्भवत: एकमात्र सुरम्य, सुनियोजित एवं सर्वसाधन सुविधायुक्त श्मशान स्थल है जहां पहुंचकर शांति व सुकुन मिलता है।

पंचमुखी मुक्तिधाम में हर तरफ हरियाली, लॉन, फुलवारी, दाह संस्कार में आने वाले आगन्तुकों के लिए बैठने की सुव्यवस्था, आर.ओ. प्लांट का शीतल पेयजल, 5000 पुस्तकों का पुस्तकालय, मधुर भक्ति संगीत व पेड़ बचाने के लिए एल.पी.जी. शवदाह गृह दाह संस्कार में शरीक होने वालों के नहाने के लिए गर्म पानीयुक्त आकर्षक व स्वच्छ स्नानघर तथा मूत्रालय है।
उक्त मुक्तिधाम में प्रातः योगा क्लासेज, एक्सरसाइज, प्रातः भ्रमण के लिए भी अनेक स्त्री पुरूष व छात्र नियमित रूप से आते हैं।
ऐसे हुई कायाकल्प की शुरूआत
यूं तो श्मशान का सन्नाटा देखकर लोग डरते हैं किंतु पंचमुखी मुक्तिधाम में लोग यहां की हरियाली एवं स्वच्छता से मोहित होकर भ्रमण हेतु आते हैं। यह सब संभव हुआ भीलवाड़ा निवासी पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू के अथक प्रयासों से।

श्री जाजू के मन में वर्ष 2000 में पंचमुखी मुक्तिधाम को भयमुक्त बनाने का विचार आया किंतु श्मशान के नाम पर लोगों का साथ व सहयोग नहीं मिल पाया। वर्ष 2007 में पंचमुखी मुक्तिधाम विकास समिति का गठन उद्योगपति रामपाल सोनी की अध्यक्षता में हुआ, जिसके महासचिव श्री जाजू के मित्र तत्कालीन न्यास अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण डाड व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल बने।
श्री जाजू ने पंचमुखी मुक्तिधाम समिति के सचिव के रूप में अपना कार्य प्रारंभ करते हुए सर्वप्रथम रामस्नेही सम्प्रदाय के पीठाधीश्वर आचार्य श्री रामदयालजी महाराज, उदासीन आश्रम के महंत श्री हंसरामजी व अन्य संतो के आतिथ्य में पौधारोपण किया।
फिर सभी बने सहयोगी
जाजू के विशेष प्रयास से मुक्तिधाम की सफाई और हरियाली ने लोगों का मन मोहा व श्मशान को आर्थिक सहयोग भी आसानी से मिलता चला गया। नगर विकास न्यास व नगर परिषद भीलवाड़ा का निर्माण कार्यों में सहयोग मिलता रहा।

इसकी रखरखाव व्यवस्था का खर्च लगभग 10 लाख रूपया सालाना है। यह भी भीलवाड़ा के उद्योगपतियों, समाजसेवियों, व्यापारियों से निरंतर मिलता रहा है। पंचमुखी मुक्तिधाम में स्वच्छता, हरियाली एवं सुरक्षा हेतु लगभग 11 सेवक कार्यरत हैं जो श्मशान भूमि को स्वच्छ रखने में सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
दान पर आयकर की छूट
पंचमुखी मुक्तिधाम विकास समिति में सभी समाज के व्यक्तियों का समावेश करते हुए आयकर अधिनियम की धारा 80जी के तहत छूट हेतु भी समिति को अधिकृत करवाया गया। लगभग 12 बीघा क्षेत्रफल में फैले पंचमुखी मुक्तिधाम में वर्षा के जल संरक्षण हेतु वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी लगा रखा है जिससे जल की समस्या पूर्णतया समाप्त हो चुकी है।
कोरोना महामारी के चलते अत्यधिक दाह-संस्कार होने से घर परिवार के लोगों के अस्थियां ले जाने के बाद बची हुई राख को गोबर में मिलाकर जैविक खाद भी तैयार की जो पौधों की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में कारगर सिद्ध हो रही है।

श्री जाजू ने बताया कि पंचमुखी मुक्तिधाम की रखरखाव व्यवस्था में सकारात्मक सहयोगी के रूप में वास्तुकार रतनलाल दरगड़, मोहनलाल कसारा, मुकेश अजमेरा, ओम सोनी, ईश्वर खोईवाल, शिवलाल डीडवानियां, विद्यासागर सुराणा, कैलाश त्रिवेदी, कृष्णगोपाल जाखेटिया आदि कई साथी समार्पित सेवा दे रहे हैं।










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