वैसे ही शास्त्रों में एक वृक्ष को 100 पुत्रों के समान नहीं माना गया है। नीमड़ी के रूप में पूजे जाने वाले नीम को ही ले लें। यह यूं ही नहीं पूजा जाता, यह न सिर्फ पर्यावरण को शुद्ध करता है बल्कि इसकी जड़, छाल, पत्ती आदि सभी अवयव औषधीय गुणों से भरे हैं। तभी तो कहते हैं, 100 हकीम = एक नीम।
चरक संहिता और सुश्रुत संहिता जैसे प्राचीन चिकित्सा ग्रंथों में भी इसका उल्लेख मिलता है। इसे ग्रामीण औषधालय का नाम भी दिया गया है। यह पेड़ बीमारियों वगैरह से आजाद होता है और उस पर कोई कीड़ा-मकौड़ा नहीं लगता इसलिए नीम को आजाद पेड़ कहा जाता है।
भारत में नीम का पेड़ ग्रामीण जीवन का अभिन्न अंग रहा है। लोग इसकी छाया में बैठने का सुख तो उठाते ही हैं, साथ ही इसके पत्तों, निंबौलियों, डंडियों व छाल को विभिन्न बीमारियां दूर करने के लिए प्रयोग करते हैं। आयुर्वेद ग्रंथों में नीम के गुण के बारे में चर्चा इस तरह है-
‘‘निम्ब शीतों लघुग्राही कतुर कोअग्नि वातनुत। अध्यः श्रमतुटकास ज्वरारुचिक्रिमी प्रणतु।।
अर्थात – नीम शीतल, हल्का, ग्राही, पाक में चरपरा, हृदय को प्रिय, अग्नि, परिश्रम, तृषा, अरुचि, क्रीमी, व्रण, कफ, वमन, कोढ़ और विभिन्न प्रमेह को नष्ट करता है।
अमेरिका भी नीम का मुरीद
भारतीय संस्कृति में नीम का विशेष महत्व है। हमारे यहां आम धारणा रही है कि जहां नीम है, वहां रोग व मृत्यु नहीं आती। अमेरिका सहित कई देश इसे पेटेंट कराने में वर्षों से जुटे हैं। विदेशों में नीम को एक ऐसे पेड़ के रूप में पेश किया जा रहा है जो मधुमेह से लेकर कैंसर और न जाने किस-किस तरह की बीमारियों का इलाज कर सकता है। कारण यही है कि नीम के औषधीय गुणों को घरेलू नुस्खों में उपयोग कर स्वस्थ व निरोगी बना जा सकता है। नीम एक चमत्कारी वृक्ष माना जाता है, जो प्रायः सर्व सुलभ मिल जाता है। यह पूरे भारत में फैला है और हमारे जीवन से जुड़ा है। नीम एक बहुत ही अच्छी वनस्पति है जो भारतीय पर्यावरण के अनुकूल है और भारत में बहुतायत में पाया जाता है। भारत में इसके औषधीय गुणों की जानकारी हजारों सालों से रही है। यही कारण है कि नीम हमारे लिए अति विशिष्ट व पूजनीय वृक्ष है। नीम को संस्कृत में निंब वनस्पति कहते हैं।
कई बीमारियों में कारगर
यह वृक्ष अपने औषधि गुण के कारण पारंपरिक इलाज में बहुपयोगी सिद्ध होता आ रहा है। नीम स्वभाव से कड़वा जरूर होता है परंतु इसके औषधीय गुण बड़े ही मीठे होते हैं। तभी तो नीम के बारे में कहा जाता है कि एक नीम और सौ हकीम दोनों बराबर हैं। इसमें कई तरह के कड़वे परंतु स्वास्थ्यवर्धक पदार्थ होते हैं। इनमें मार्गोसी, निम्बिडीन, निम्बेस्टेरोल प्रमुख हैं। नीम सर्वरोगहारी गुणों से भरा पड़ा है। यह हर्बल आर्गेनिक पेस्टिसाइड साबुन, एंटीसेप्टिक क्रीम, दातुन, मधुमेहनाशक चूर्ण, कॉस्मेटिक आदि के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। नीम की छाल में ऐसे गुण होते हैं, जो दांतों और मसूढ़ों में लगने वाले बैक्टीरिया को पनपने नहीं देते हैं। इससे दांत स्वस्थ व मजबूत रहते हैं।










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