Readers Column

दीवाली और कोविड के बाद उभरी मानसिकता में “पाजिटिविटी का तड़का”

दीवाली धूमधाम से मनी, बाजार में रौनक त्यौाहर में धूमधाम और मन में उत्साह। जीवन सामान्य से होने लगा है। ब्याह शादी का मौसम...

हंसी कहाँ खो गई?

एकाकीपन या एकरस जीवन दोनों के मायने लगभग एक ही हैं, खुशियों से विहीन जिंदगी। बदलते दौर और उस पर भी कोरोना की मार...

मत रोको बहते हुए आँसू

आपको लग रहा होगा कि दीपावली जैसे पावन पर्व की बेला में भला आंसूओं का क्या काम? हम महालक्ष्मी का पूजन सुखी जीवन के...

पर्व पॉसिटिविटी का- दीपावली

जेब टटोल कर प्लानिंग कीजिये, चार दोस्तों के साथ घर पर मस्ती कीजिये, पति पत्नी बच्चे मिल कर घर में ही खेल का माहौल...

बदलता वानप्रस्थ

इस स्तम्भ में अ.भा. माहेश्वरी महिला संगठन की पूर्व अध्यक्ष तथा मुम्बई विश्वविद्यालय की सेवानिवृत्त प्रोफेसर कल्पना गगडानी ‘‘जिन्दगी की नई राह’’ दिखाएंगी। इसके...

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