पार्वती जी के श्रीमुख से “स्त्री धर्म”
भगवन शिव और पार्वती के दाम्पत्य के चिर आनंदमय होने का रहस्य पति-पत्नी के निरंतर परस्पर संवाद में छुपा है। दोनों के पास जगत...
जिसका चरित्र पारदर्शी वही योग्य ‘राजा’
महाभारत कुल कलह की कथा है। पाण्डु पुत्र युधिष्ठिर आदि पाँच भाई बाल्यकाल से ही प्रतिभावान, गुरुजनों के आज्ञाकारी, व्यवहार में विनम्र और सबके...
नववर्ष का शांतिपर्व
महाभारत का शांतिपर्व शांति के अनमोल सूत्रों का खज़ाना है। अशांति मनुष्य का स्वभाव है और शांति उसके जीवन...
जिसके पास शील, उसके पास लक्ष्मी
लोगों को यह भ्रम है कि लक्ष्मी अर्थात धन केवल परिश्रम, पराक्रम या प्रारब्ध से प्राप्त होता है। सच...
जो बुजुर्गों की सुनेगा वही बनेगा विजेता
घर-परिवार के बड़े-बुजुर्ग हमारे जीवन में ईश्वर की कृपा से ही सुलभ होते हैं। इनका होना सौभाग्य है और...
प्रतिभा और अर्जुन होने का अर्थ
आचार्य द्रोण के 100 कौरव व पाँच पाण्डव सहित 110 से अधिक शिष्यों में अकेले अर्जुन क्यों सबसे अलग,...
महाभारत का पर्यावरण संदेश
महाभारत के आदिपर्व की दो कथाएं आज भी मनुष्य जाति के लिए पर्यावरण संदेश की प्रेरक बनी हुई है।...
सेर भर सत्तू का दान
महाभारत के आश्वमेधिक पर्व के 90वें अध्याय की सुप्रसिद्ध कथा दान की महिमा का बोध कराती है। महायुद्ध में...

