योग की शिरोमणि मुद्रा- ज्ञान मुद्रा

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ज्ञान मुद्रा शिरोमणि मुद्रा है। मूर्तियों एवं चित्रों में बहुधा देवताओं को ज्ञान मुद्रा में दिखाया गया है। इसे शिव और शक्ति का मिलाप भी कहा जाता है। अंगूठा बुद्धि का और तर्जनी अग्नि का प्रतीक है।

Shivnarayan-Mundra

मुद्रा करने की विधि

अंगूठे और तर्जनी उंगली के अग्रभाग को मिलाएं। बाकी तीनों उंगलियां सीधी रखें। दोनों हाथों से यह मुद्रा बनाते हुए हाथों का पृष्ठ भाग घुटनों पर रख लें, हथेलियां ऊपर की ओर। इसे कम से कम 10 मिनट तक करें। चलते-फिरते, सोते-जागते, उठते-बैठते भी यह मुद्रा लगाई जा सकती है। जितना अधिक समय लगाएंगे, उतना ही लाभ भी बढ़ जाएगा।

एक बात और समझ लें अंगूठा परमात्मा का प्रतीक है और तर्जनी आत्मा की। ज्ञान मुद्रा से आत्मा का परमात्मा से मिलन होता है। शेष तीनों उंगलियां मिलाकर सीधी रखी जाती हैं ये तीनों उंगलियां हमारे भीतर विद्यमान तीनों गुणों- तमोगुण, रजोगुण व सतोगुण (तमस, रजस व सत्त्व) की प्रतीक है। अतः आध्यात्मिक साधना के लिए यह मुद्रा सर्वोत्तम है।


क्या होता है लाभ

  • नकारात्मक विचार दूर होते हैं। बुद्धि का विकास होता है। एकाग्रता बढ़ती है। स्मरण शक्ति बढ़ती है और मानसिक शक्ति का विकास होता है।
  • इस मुद्रा को करते ही हमारे मन व मस्तिष्क में अद्भुत हलचल सी प्रारम्भ हो जाती है। हल्का सा स्पंदन होता है।
  • मस्तिष्क में स्थित पिट्युटरी ग्रन्थि व पीनियल ग्रन्थि प्रभावित होती हैं। मन शान्त होता है। क्रोध शान्त होता है। तनाव दूर होता है। तनाव से होने वाले सभी रोगों (जैसे उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, सिर दर्द, माइग्रेन, अनिद्रा, मधुमेह इत्यादि) में लाभ होता है। तीनों समय (प्रात:, दोपहर और सायंकाल) इस मुद्रा को करने से बहुत लाभ होता है।
  • सिर दर्द और माइग्रेन में ज्ञान मुद्रा और प्राण मुद्रा साथ-साथ करने से अधिक लाभ होता है।
  • मानसिक रोगों में यह मुद्रा शांति प्रदान करती है। अनिद्रा रोग में भी इस मुद्रा का लाभ है। जब कभी आपको किसी त्वरित आवेग उत्तेजना के कारण नींद न आ रही हो तो इस मुद्रा को लगाने से नींद आ जाती है। जिन्हें नींद ज्यादा आती हो उनकी नींद संतुलित होती है।
  • आध्यात्मिक क्षेत्र में प्रगति के लिए यह मुद्रा अति आवश्यक है। ज्ञानमुद्रा की निरन्तर साधना से मानव का ज्ञान तन्त्र विकसित होता है। छठी इन्द्री का विकास होता है।
  • इस मुद्रा से दांत दर्द, और त्वचा रोग दूर होते हैं तथा यह सौन्दर्यवर्धक भी है। इससे चेहरे के दाग, झाइयां दूर होती हैं और चेहरे की आभा (चमक) बढ़ती है।
  • ज्ञान मुद्रा, मुद्रा विज्ञान की आत्मा है। यह एकमात्र ऐसी मुद्रा है जो लगातार चौबीसों घण्टे लगातार लगाई जा सकती है। ज्ञान मुद्रा आत्मा, मन, बुद्धि व शरीर सभी को प्रभावित करती है। यह रोग प्रतिरोधक भी है और रोगनाशक भी है।
  • हाइपरेक्टिव बच्चों के लिए यह मुद्रा बहुत अच्छी है।

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