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हड्डी जोड़ने की अद्भुत औषधि- अस्थि संहार

हमारी धरती कई ऐसी दुर्लभ औषधियाँ उत्पन्न करती हैं, जो किसी चमत्कार से कम नहीं होती। उन्हीं में से एक है, अस्थि संहार या हड़जोड़। आमतौर पर किसी भी फ्रेक्चर के बाद हड्डी जुड़ने में लम्बा समय लगता है, लेकिन इसका उपयोग कुछ ही दिनों में हड्डी को जोड़ देता है। इतना ही नहीं कई अन्य बीमारियों में भी यह अत्यंत कारगर है। बस इसके उपयोग के लिये आयुर्वेद चिकित्सक का परामर्श जरूरी है।

आयुर्वेद में और स्थानीय लोग में भी अस्थि संहार या अस्थिजोड़ चूर्ण का प्रयोग टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने के लिये करते रहे हैं। इसकी लगभग 8 मी तक लम्बी आरोही पर्णपाती लता होती है। जो देखने में चतुष्कोणीय तथा अस्थि शृंखला जैसी प्रतीत होती है, पुराने तने पत्रविहीन होते हैं। इसका प्रयोग अस्थि संबंधी बीमारियों के चिकित्सा में किया जाता है।

Kailash-Laddha

अस्थिसंहार प्रकृति से मधुर, कड़वा, तीखा, गर्म, लघु, गुरु, रूखी, कफवातशामक, पाचक और शक्तिवर्द्धक होता है। अस्थिसंहार कृमि, अर्श या पाइल्स, नेत्ररोग, अपस्मार या मिरगी, घाव या अल्सर, आध्मान या पाचक तथा दर्दनाशक होता है। अस्थिसंहार के पौधे से प्राप्त ग्लूकोसाइड हृदयपेशी पर नकारात्मक (Negative) क्रोनोट्रापिक (Chronotropic) प्रभाव डालता है। यह परखनलीय परीक्षण में अस्थिजनन क्रियाशीलता (Osteogenic Activities) दिखाता है।


क्या है अस्थि संहार

अस्थिसंहार का वानास्पतिक नाम Cissus Quadrangularis Linn. (सीस्सुस क्वॉड्रंगुलारिस्) Syn-Vitis Quadrangularis (Linn.) Wall. ex. Wight है। अस्थिजोड़ Vitaceae (वाइटेसी) कुल का है। अस्थिजोड़ को अंग्रेजी में Bone Setter (बोन सेटर) कहते हैं। भारत के विभिन्न प्रांतों में अस्थिसंहार को भिन्न-भिन्न नामों से पुकारा जाता है।

जैसे संस्कृत में ग्रन्थिमान्, अस्थिसंहार, वज्राङ्गी, अस्थिश्रृंखला, चतुर्धारा तथा हिन्दी में हड़जोड़, हड़संघारी, हड़जोड़ी, हड़जोरवा आदि कहते हैं। अंग्रेजी में इसे एडिबल स्टेमड वाइन (Edible Stemmed Vine), वेल्ड ग्रेप (Veld Grape), विंग्ड ट्री वाइन (Winged Tree Vine) कहा जाता है।


कैसे करें इसका उपयोग

हड्डियों को जोड़ने में हड़जोड़ बहुत ही लाभकारी होता है लेकिन इसके इस्तेमाल करने का तरीका सही होना चाहिए। भग्न अस्थि या संधि पर हड़जोड काण्ड कल्क का लेप करने से शीघ्र भग्न संधान होता है। 10-15 मिली हड़जोड़ स्वरस को घी में मिलाकर पीने से तथा भग्न स्थान पर इसके कल्क में अलसी तैल मिलाकर बांधने से भग्न अस्थि का संधान होता है।

2-5 ग्राम हड़जोड़ मूल चूर्ण को दुग्ध के साथ पिलाने से भी टूटी हुई हड्डी जुड़ जाती है। अगर रीढ़ की हड्डी के दर्द से परेशान हैं तो हड़जोड़ का औषधीय गुण बहुत फायदेमंद तरीके से काम करता है। हड़जोड़ के पत्तों को गर्म करके सिंकाई करने से दर्द कम होता है। अगर मोच आने पर दर्द कम नहीं हो रहा तो हड़जोड़ का घरेलू उपाय बहुत ही लाभकारी होता है। हड़जोड़ स्वरस में तिल तैल मिलाकर, पकाकर, छानकर लगाने से मोच तथा वेदना में लाभ होता है।


कई बीमारियों में चमत्कारी

ब्रोंकियल अस्थमा में हड़जोड़ का औषधीय गुण लाभकारी साबित हो सकता है। 5-10 मिली हड़जोड़ रस को गुनगुना कर पिलाने से तमक श्वास में लाभ होता है। अक्सर मसालेदार खाना खाने या असमय खाना खाने से पेट में समस्याएं होने लगती है। 5-10 मिली हड़जोड़ पत्ते के रस में मधु मिलाकर पिलाने से पाचन क्रिया ठीक होती है तथा उदर संबंधित समस्याओं से आराम मिलता है। ज्यादा मसालेदार, तीखा खाने आदि से पाइल्स की बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है। उसमें हड़जोड़ का घरेलू उपाय बहुत ही फायदेमंद साबित होता है।

उपदंश मतलब जननांग यानि जेनिटल पार्ट्स में घाव जैसा हो जाता है, लेकिन इस घाव में दर्द नहीं होता है। एक भाग तालमखाना, 1/2 भाग अस्थिसंहार, 1/4 भाग दालचीनी तथा 2 भाग शर्करा के चूर्ण को 14 दिनों तक दूध के के साथ सुबह शाम सेवन करने से उपदंश में लाभ होता है। (इस अवधि में तेल, अम्ल या एसिडिक फूड तथा नमक रहित आहार लेना चाहिए।) इसके अलावा हड़जोड़ तने के रस का लेप करने तथा तने के रस का सेवन करने से उपदंश आदि रोगों में लाभ होता है।


महिलाओं को भी लाभदायक

डिलीवरी के बाद के दर्द से राहत दिलाने में भी हड़जोड़ अत्यंत लाभदायक है। हड़जोड़ के तना एवं पत्तों को पीसकर लेप करने से डिलीवरी के दर्द से आराम मिलता है। महिलाओं के रोग प्रदर या ल्यूकोरिया में भी हड़जोड़ फायदेमंद है। महिलाओं को अक्सर योनि से सफेद पानी निकलने की समस्या होती है। सफेद पानी का स्राव अत्यधिक होने पर कमजोरी भी हो जाती है। इससे राहत पाने में हड़जोड़ का सेवन फायदेमंद होता है।

5-10 मिली हड़जोड़ काण्ड रस का सेवन करने से अनियमित अर्न्तस्त्राव तथा श्वेतप्रदर या सफेद पानी में लाभ होता है। अगर कटने या छिलने पर ब्लीडिंग कम नहीं हो रहा है तो हड़जोड़ का प्रयोग लाभकारी होता है। हड़जोड़ स्वरस को लगाने से क्षतजन्य रक्तस्राव का स्तम्भन होता है। इसके अलावा 2-4 मिली तने और जड़ के रस को पीने से शीताद, दंत से रक्तस्राव, नासिका से रक्तस्राव तथा रक्तार्श या बवासीर में खून आना आदि में लाभ होता है।


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