Save 20% off! Join our newsletter and get 20% off right away!
kati yoga mudra

Kati Mudra For Creativity

योग मुद्रा में कटि मुद्रा (Kati Mudra) एक ऐसी मुद्रा है, जो आत्मविश्वास व रचनात्मकता को बढ़ाती है। वैसे तो यह सभी के लिये लाभदायक है, लेकिन कलाकारों के लिये विशेष लाभदायक है।

Shivnarayan-Mundra

कटि मुद्रा योग और प्राणायाम की एक विशेष हस्त मुद्रा है। ‘कटि’ संस्कृत में कमर या नाभि क्षेत्र को कहते हैं। यह क्षेत्र हमारे स्वाधिष्ठान चक्र से जुड़ा होता है, जो भावनाएँ, सृजन शक्ति और जीवन ऊर्जा (प्राणशक्ति) का केंद्र है। इसलिए कटि मुद्रा करने से शरीर में संवेदनशील ऊर्जा संतुलित होती है, जिससे आत्मविश्वास, भावनात्मक स्थिरता और रचनात्मकता बढ़ती है। यह मुद्रा उन लोगों के लिए भी अधिक कारगर है, जो लंबे समय तक बैठे रहने या भारी सामान उठाने के कारण पीठ दर्द से पीड़ित हैं। यह तीव्र और पुराने, दोनों तरह के पीठ दर्द से राहत दिलाती है।

सबसे पहले सुखासन या पद्मासन में बैठ जाएं। दोनों हाथों को जांघों पर रखें। दाहिने हाथ की मध्यमा और अनामिका अंगुली को अंगूठे से मिलाएं। बाकी दो उंगलियाँ (तर्जनी और कनिष्ठा) सीधी रखें। बाएँ हाथ की तर्जनी उंगली के नाखून वाले भाग को अंगूठे से ढकें और बाकी तीन उंगलियों को सीधा रखें। आंखें बंद कर, गहरी सांस लेते हुए ध्यान नाभि या कमर के आसपास केंद्रित करें। कम से कम 10 मिनट तक इस मुद्रा को करें।


इससे कमर दर्द, साइटिका, या कटि क्षेत्र के तनाव में राहत मिलती है। यह पाचन तंत्र को मजबूत करती है। पेट की गैस, कब्ज दूर करने में सहायक तथा स्वाधिष्ठान चक्र को सक्रिय करती है। शरीर में ऊष्मा और स्थिरता बढ़ाती है। महिलाओं में मासिक धर्म संबंधी असुविधा में राहत देती है। मोटापा और पेट की चर्बी घटाने में भी सहायक है। यह रीढ़ के लचीलेपन में वृद्धि तथा तनाव और थकान दूर करती है। शरीर में ऊर्जा और स्थिरता का अनुभव होता है।

यदि बहुत तीव्र दर्द या रीढ़ की गंभीर समस्या है तो चिकित्सक की सलाह लें। मुद्रा करते समय रीढ़ सीधी और शरीर शांत रखें।