अच्छे स्वास्थ्य का आधार है- उचित खानपान

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कोरोना महामारी ने हमे एक बहुत बड़ा सबक दिया है, वह यह कि हम पैसा कमा सकते हैं, लेकिन उसका सुख भोगने के लिए अच्छा स्वास्थ्य भी जरूरी है। अच्छे स्वास्थ्य की प्रथम सीढ़ी है, उचित खानपान। यदि खानपान बिगड़ा तो सब कुछ बिगड़ जाऐगा। आईये देखें कैसा रखें अपना खानपान कि हमारा तन-मन रहे चुस्त दुरूस्त?

स्वास्थ्य का एक बहुत ही महत्वपूर्ण पहलू है फूड। मेरे आफिस में डायबिटीज की फ्री आयुर्वेदिक दवा दी जाती है तो मैं पेशेंट से यही कहता हूँ कि उसके ठीक होने के लिए तीन चीजों का रोल होगा, अकेली दवा काम नहीं कर पाएगी। 33 प्रतिशत फूड, 33 प्रतिशत मॉर्निंग वॉक, 33 प्रतिशत दवा असर करेगी। इसलिए हमें भोजन करने से पूर्व तथा भोजन करते समय मांगलिक वस्तुओं का दर्शन करना चाहिए।

भोजन करते समय टीवी देखना एवं मोबाइल पर बात करना ठीक नहीं है। खाना खाते समय बिजनेस डिस्कशन भी अवॉइड करें। अगर सारी फैमिली साथ बैठकर खाना खा सके तो बहुत ही अच्छा है। बुजुर्गों ने कहा है कि ‘‘जैसा खाओगे अन्न, वैसा होगा मन।’’ शुद्ध एवं क्वालिटी फूड का हमार जीवन में बहुत रोल है।

अत: भोजन की शुद्धता के लिए किचन में पूर्णतया साफ सफाई हो, जैसे आजकल फंगस कोरोना में आ रहा है तो फ्रिज या सिंक में किसी भी कोने में किंचित मात्र भी फंगस नहीं होना चाहिए।


फास्ट फूड आदि से रहें दूर

खाना बनाते समय का भाव भी खाने में आता है। वैसे तो परिवार की महिलाएं खुद ही खाना बनाए तो बहुत ही श्रेयस्कर है, पर नौकर भी बनाए तो भगवान का भजन किचन में चलते रहना चाहिए। भोजन सामने आने पर सबसे पहले उसे परमात्मा को अर्पण करें तो वह भोजन प्रसाद के रूप में बन जाएगा।

भोजन में अगर फास्ट फूड, मैदा, तली हुई चीजें, अचार एवं पापड़ का उपयोग कम करें तो अच्छा रहेगा। तली हुई चीजें, मैदा, फास्ट फूड को पचाने में शरीर की ज्यादा शक्ति लगती है। पापड़ एवं अचार में नमक की मात्रा अधिक होने से बीपी बढ़ने का डर रहता है।

स्प्राउट सप्ताह में दो बार अवश्य खाएं, खाना एक निश्चित समय पर खाएं, इससे भी आपकी बॉडी ठीक रहेगी। प्रोटीन एवं कैल्शियम भी हमारे फूड का अंग होना चाहिए।


डायबिटीज वाले अपनाएं यह तरीका

डायबिटीज आजकल 40 से ऊपर वाले 50 प्रतिशत लोगों में हो जाती है। इसे भी आप ठीक कर सकते हैं। आप अपने वजन के हिसाब से, जैसे आप 80 किलो के हैं तो 800 ग्राम, 70 किलो के हैं तो 700 ग्राम फल आपको सुबह नाश्ते में खाना है। नाश्ता केवल फलों का ही होगा, ना चाय, न दूध, न पराठे।

कोशिश करें कि एक दिन में एक तरह का ही फल लें। उसके 2 घंटे बाद सभी तरह के ड्राई फ्रूट 5-5 पीस खाएं। दोपहर में 350 ग्राम सलाद ही खाना है, इसमें आप ड्राई फ्रूट व नारियल मिला सकते हैं, इसमें नमक व नींबू ना डालें, क्योंकि नमक नींबू डालने से सलाद पानी छोड़ देता है और हमारे भोजन पचाने वाले जूस डाइल्यूट हो जाते हैं।

डिनर में आप ग्रीन चपाती, हरी सब्जी इत्यादि लें। आपका डिनर 7 बजे तक हो जाए तो बेहतर रहे, क्योंकि खाने एवं सोने में 3 घंटे का समय होना चाहिए। इस प्रक्रिया को करें तो आपकी डायबिटीज कम होती चली जाएगी।


खाने में स्वास्थ्य से समझौता नहीं

कोशिश करें बाहर का खाना न खाएं या कम से कम खाएं। शादी या अन्य कार्यक्रम में घर से ही खाना खाकर जाएं, क्योंकि वहां का खाना हाइजीनिक नहीं होता है। हम खाने की लाइन में लगने से अच्छा अधिक लोगों में मेलजोल एवं नेटवर्किंग पर ध्यान देंवें।

खाने में ऑर्गेनिक अन्न एवं सब्जियों का बड़ा रोल है। अगर बालकनी या छत पर कुछ सब्जियां उगा सकते हैं तो घर की सब्जियां खाएं। बाजार की सब्जियों में केमिकल प्रचुर मात्रा में होता है। आप जो कैंसर के बढ़ते हुए केस देख रहे हैं वो केमिकल का ही दुष्परिणाम है।

उचित खानपान

पंजाब में जो हरित क्रांति आई थी, उसमें गेहूं अनाज का प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए केमिकल का बहुत मात्रा में उपयोग किया गया। नतीजा यह हुआ कि उनकी मिट्टी बिल्कुल खराब हो चुकी है एवं 30 में से एक व्यक्ति को कैंसर हो रहा है।


अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ने दें

थोड़ा अस्वस्थ होते ही हम तुरंत एलोपैथी डॉक्टर की दवा की ओर भागते हैं। पर वास्तव में देखें तो हमारी बॉडी में ही रिपेयर सिस्टम है, जो स्वयं भी बॉडी को ठीक करती है, पर थोड़ा समय लगता है एवं हमें थोड़ा बर्दाश्त करना पड़ता है।

इसके साथ अगर आप घरेलू या आयुर्वेदिक उपचार करेंगे तो साइड इफ़ेक्ट से बचेंगे। आपका प्रयास एलोपैथी को कम से कम यूज करने का होना चाहिए। दवाइयां एवं उपचारों के साथ आपके अपने पास भी एक शक्ति छिपी हुई है, उसका नाम है इच्छा शक्ति।

हमें बीमारियों से बचना है या सामना करना है तो इच्छा शक्ति को स्ट्राँग रखना होगा। यह सोचना होगा कि मैं बिल्कुल ठीक हूँ।


शरीर को भी दें “रिलैक्सेशन”

हेल्थ को ठीक रखने के लिए और भी कुछ चाहिए- जैसे मशीन को रेगुलर रिलेक्स करते रहना पड़ता है, उसी तरह हमारी बॉडी को भी साल में दो-तीन बार करके 15 दिन हॉलीडे पर जाना चाहिए, इससे आपकी बैटरी चार्ज होती रहेगी, पारिवारिक मेलजोल बढ़ेगा, फैमिली भी रोग की भागदौड़ की दिनचर्या से हटकर रिलैक्स कर पाएगी।

उचित खानपान

कहते हैं ‘ट्रैवल मेक यू रिच’, क्योंकि ट्रैवलिंग से जो एक्सपीरियंस मिलता है, वह किताबों में नहीं होता। जब आप दो-तीन फैमिली बाहर जाते हैं तो सब के बच्चों में बहुत मेलजोल भी बढ़ता है।

हमने अन्न एवं खाने की बहुत चर्चा कर ली और खाने से भी ज्यादा शरीर के लिए जो चाहिए वह है जल। जल ही जीवन है, तो हम वॉटर थैरेपी पर भी थोड़ी बात कर लेते हैं। हमारे बुजुर्गों ने कहा है कि ‘जैसा पीवे पाणी, वैसी होवे वाणी’’। अत: हमेशा शुद्ध जल पीना चाहिए, खुला रखा हुआ जल नहीं पीना चाहिए।


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