इस अंक में हम एक ऐसी मुद्रा की बात कर रहे हैं, जो हृदय आघात से बचाती है। यह अत्यन्त लाभकारी होने कारण इसे मृत संजीवनी मुद्रा कहा गया है। इसे अपान वायु मुद्रा भी कहते है।

कैसे करें: तर्जनी उंगुली को मोड़कर अगूंठे की गद्दी में लगाएं (वायु मुद्रा) और मध्यमा और अनामिका के अग्रभाग को अंगूठे के अग्रभाग से मिलाएं (अपान मुद्रा)। सबसे छोटी अंगुली सीधी रखें।
लाभ
- इस मुद्रा का हृदय पर विशेष प्रभाव पड़ता है। हृदयाघात (HEART ATTACK) रोकने में एवं हृदयाघात हो जाने पर भी यह मुद्रा तत्काल लाभ पहुंचाती है। यह मुद्रा SORBITATE की गोली का कार्य करती है।
- हृदय के रोग दूर होते हैं।
- उच्च रक्तचाप और निम्न रक्तचाप दोनों ही में लाभदायक है।
- घबराहट, बेचैनी व स्नायु तन्त्र के सभी रोगों में लाभकारी।
- फेफड़ों को स्वस्थ बनाती है- अस्थमा में लाभकारी है।
- पेट की वायु, गैस, पेट दर्द, गुदा रोग, एसिडिटी, गैस से हृदय की जलन सभी ठीक होते हैं।
- सिर दर्द, आधे सिर का दर्द (MIGRAINE) में इस मुद्रा का चमत्कारी लाभ होता है। अनिद्रा अथवा अधिक परिश्रम से होने वाले रोग भी ठीक होते हैं।
- आंखों का अकारण झपकना भी रुकता है।
- यह रक्तसंचार प्रणाली व पाचन प्रणाली सभी को ठीक करती है।
- शरीर एवं मन के सभी नकारात्मक दबाव दूर करती है।
- भोजन करते समय यदि भोजन का कोई कण सांस को नली में चला जाता है तो सांस उखड़ने लगती है। ऐसी आपात स्थिति में यह मुद्रा अत्यंत कारगर है। ऐसा अनुभव है।










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