श्री पाढ़ाय माताजी माहेश्वरी समाज के मानधनियाँ, मानुधणा, चौधरी, देवपुरा, बिदादा, खटौड़, गगराणी, बजाज, कलंत्री, बाहेती, कचोल्या, चेचाणी, नौलखा, खांप की कुलदेवी हैं।
नागौर (राजस्थान) से ९० कि.मी. दूर पश्चिम में डीडवाना की सबसे पुरानी बस्ती कोट मोहल्ला में श्री पाढ़ाय माताजी का मंदिर स्थित है। मंदिर पुजारी श्री सुरेश श्रीराम व्यास के अनुसार यह मंदिर लगभग ११२५ वर्ष पूर्व स्थापित होने से अति प्राचीन है। माहेश्वरी समाजजनों के साथ ही डीडवानावासी भी माताजी के प्रति गहरी आस्था रखते हैं। मनोरथ पूर्ति करने वाले माताजी के रूप में प्रतिदिन होने से ये जन-जन की आराध्य बन चुकी हैं।
प्रमाणित दस्तावेजों व शिलालेख अनुसार मंदिर का प्रथम जीर्णोद्धार सं. ९४७ में हुआ। इसके बाद भी लगभग तीन बार जीर्णोद्धार हो चुके हैं।
विगत लगभग ५० वर्षों से पाढ़ाय माताजी मंदिर में दोनों नवरात्रियों में अष्टमी के दिन देवीयाग अर्थात चण्डी यज्ञ किया जाता है और विशाल मेला लगता है। यहाँ तीन बार शतचंडी यज्ञ का आयोजन भी हो चुका है। मंदिर में वंशानुगत रूप से शाकद्वितीय ब्राह्मण पूजा करते आये हैं। यहाँ गणेश, शिव व भैरव की प्रस्तर प्रतिमाऐं भी स्थापित हैं।
यहाँ आने वाले दर्शनार्थियों के ठहरने के लिये यहाँ चार कमरे बने हुए हैं जिनका निर्माण डीडवाना के सारडा परिवार ने करवाया है। भोजन की व्यवस्था माँग पर न्यूनतम शुल्क पर उपलब्ध हो जाता है।
विशेष:
यहाँ तीन आरती होती हैं प्रथम प्रातः कालीन मंगला आरती, शाम को संध्या आरती व रात्रि में शयन आरती। यहाँ माताजी का विशेष भोग तो हलवा है मगर इच्छानुसार मावे-बुंदी या अन्य मिष्ठान का भोग भी लगाया जा सकता है।
समीपस्थ दर्शनीय स्थल:
डीडवाना से मात्र ७ कि.मी. की दूरी पर श्री शाकम्भरी माताजी का प्रसिद्ध मंदिर भी है। किवदंती के अनुसार भक्त के इच्छा व्यक्त किये जाने पर माताजी ने यहाँ पर नमक की झील की उत्पत्ति की थी।
कैसे पहुँचे:
यह स्थल नागोर जिले का डीडवाना तहसील मुख्यालय है। मीटर गेज लाइन पर बेगाना व रतनगढ़ जंक्शन के बीच ही डीडवाना रेल्वे स्टेशन स्थित है। सड़क मार्ग से जाने पर यह नागोर अजमेर मार्ग पर नागौर व सुजानगढ़ के बीच आता है। नागौर से दूरी ९० कि.मी. है।










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