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padmshree banshilal rathi

समाजसेवा के “वटवृक्ष”- पद्मश्री बंशीलाल राठी

समाजसेवा के क्षेत्र में ‘‘खींवसर के लाल’’ तथा चैन्नई के ‘‘कर्मवीर’’ पद्मश्री बंशीलाल राठी का नाम हमेशा ही अत्यंत गरिमामय ढंग से लिया जाता है। कारण यह है कि उनके योगदानों से वटवृक्ष की तरह न सिर्फ कई स्वयंसेवी संस्थाओं को संबल प्राप्त हुआ अपितु आप सदैव सेवा पथ के पथिकों के लिये प्रेरणा स्त्रोत भी बने। आगामी 14 अगस्त को 89वाँ जन्मदिवस मना रहे ऐसे ‘‘सेवापथ के वटवृक्ष’’ पद्मश्री बंशीलाल राठी को श्री माहेश्वरी टाईम्स परिवार नमन करता है।

व्यवसाय ही नहीं बल्कि समाजसेवा के क्षेत्र में भी चैन्नई निवासी पद्मश्री बंशीलाल राठी एक ऐसा नाम है, जिनका जिक्र आते ही, हर कोई नतमस्तक हुए बिना नहीं रहता। इसका कारण है, उनकी वह अद्भूत सेवा भावना जिसने सदैव मानवता की सेवा ही की।

उम्र के 89वाँ पड़ाव पार कर चुके होने पर भी उनका जज्बा किसी युवा से भी 100 कदम आगे ही है। उनके पास यदि किसी भी संगठन के पदाधिकारी किसी मदद के लिये पहुंचते हैं, तो उनकी वह मदद करने में उन्हें मात्र चंद घंटे लगते हैं। जबकि वे लोग सभी मिलकर भी प्रयास करें तो उसे करने में महीनों लग जाएँ। बस, यह दृढ़ संकल्प और जज्बे का ही अंतर होता है।


व्यवसाय जगत में भी प्रेरणा स्त्रोत

14 अगस्त 1933 को नागौर (राजस्थान) के खींवसर ग्राम में सेठ श्री गंगाधर राठी के यहां जन्मे बंशीलाल राठी वास्तव में एक अद्भुत व्यक्तित्व हैं। मात्र प्रायमरी स्तर तक शिक्षा ग्रहण करने के बावजूद उन्होंने शून्य से अपने व्यवसाय की शुरूआत की और आज शिखर की ऊँचाई पर हैं।

वर्तमान में स्टील, फायनेंस, एक्सपोर्ट आदि कई व्यवसाय व उद्योगों का संचालन कर रहे हैं। समाजसेवा के अंतर्गत अ.भा. माहेश्वरी महासभा के सभापति जैसे शीर्ष पद की जिम्मेदारी भी निभाई। समाज की कई संस्थाओं व ट्रस्टों के लिये तो आप जीवनदाता ही रहे।

जाजू ट्रस्ट के कायाकल्प व रामगोपाल माहेश्वरी ट्रस्ट के विकास के मूल में आपका अभूतपूर्व योगदान है। उन्होंने समाज को राह दिखाई कि सिर्फ संस्था बना कर छोड़ देना तो वैसा ही है, जैसे पौधा रोपकर उसे प्यासा छोड़ देना, उसकी देखरेख कर उसे बड़ा करना भी हमारा कर्त्तव्य होता है। ऐसी अनगिनत संस्थाएं हैं, जिनमें प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से बाबूजी श्री राठी सहयोगी बने हुए हैं।


आर्थिक संबल में भी बढ़ाये हाथ

वर्तमान में श्री आदित्य विक्रम बिड़ला व्यापार सहयोग केंद्र समाज के आर्थिक विकास की धुरी बन चुका है। इसकी स्थापना श्री राठी के अ.भा. माहेश्वरी महासभा के सभापतित्वकाल में वर्ष 1997 में हुई थी। इसके पश्चात यह बिड़ला उद्योग समूह की चेयरपर्सन राजश्री बिड़ला की अध्यक्षता में सतत रूप से कार्य कर रहा है।

प्रारंभ से ही श्रीमती बिड़ला ने श्री राठी को इस संस्था का नेतृत्व कार्याध्यक्ष के रूप में सौंप दिया था। तब से ही इसे शून्य से शिखर की ऊंचाई देने में श्री राठी के नेतृत्व का बहुत बड़ा योगदान है।

महासभा की नागपुर बैठक के समय महाराष्ट्र प्रदेश के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं ने प्रदेश की असहाय महिलाओं की सहायता हेतु अपील की जिस पर आप महाराष्ट्र प्रदेश की 40 ऐसी महिलाओं को वर्ष 2009-10 से प्रतिमाह रु 1000/- की नियमित रूप से सहायता राशि भेज रहे हैं।


कोरोना काल में भी बने थे सहयोगी

श्री राठी अपने चिरपरिचित अंदाज में कोरोना महामारी की इस दूसरी लहर के दौरान भी विपदा में फंसे अपनों के लिये देवदूत की तरह ‘‘अपने’’ बनकर सामने आये थे। इस दौरान उन्होंने महाराष्ट्र के 108 सहित देशभर के कई जरूरतमंद परिवारों को ससम्मान आर्थिक सहायता प्रदान कर अपनत्व का परिचय दिया।

विगत वर्ष कोरोना महामारी की प्रथम लहर व उसके फलस्वरूप हुए लॉकडाउन में श्री राठी द्वारा देश के अनेक असहाय परिवारों को प्रति परिवार रू 3000/- की राशी भेजी गई थी।

कोरोना की इस दूसरी लहर में भी भामाशाह बन श्री राठी ने स्वयं आगे आकर महाराष्ट्र के कोरोना प्रभावित दुर्बल परिवारों को प्रति परिवार रू 10000/- (दस हजार) की सहायता अति शीघ्रता से जिला सभा एवं कार्यकर्ताओं के माध्यम से करीब 108 परिवारों को पहुंचाई थी।