मन में यदि अपना लक्ष्य प्राप्त करने का जुनून हो तो कोई भी बाधा रोक नहीं सकती। इन्हीं पंक्तियों को साकार कर रही हैं, जोधपुर की फूलकौर मूंदड़ा (Phoolkaur Mundra), जिन्होंने अपने जीवन के उद्देश्य को पूरा करने में न तो उम्र या जिम्मेदारियों से हार मानी, न ही कोई बाधा उन्हें रोक पाई। आईये जानें उनकी कहानी।
रचनात्मक कार्यों में अटूट श्रद्धा रखने वाली फूलकौर मूंदड़ा का जन्म 7 सितम्बर 1948 को स्व. श्री नंदकिशोर एवं स्व. श्रीमती गोदावरी देवी राठी के यहाँ जोधपुर में हुआ। युवावस्था में प्रवेश करते ही श्री मूंदड़ा के साथ 9 दिसम्बर 1965 को वैवाहिक सूत्र में बंध अपने गृहस्थ जीवन का शुभारम्भ किया। अपने दो पुत्रों ललित एवं दीपक मूंदड़ा तथा एक पुत्री उषा को अपने संस्कारों की शीतल छाया में बड़ा किया और शादी के तेरह वर्ष बाद आजीविका के लिए नौकरी की।
वैवाहिक एवं पारिवारिक जीवन की गाड़ी को सफलता से चलाते हुए आपने एम ए, बी एड, एम कॉम एवं पीएचडी तक की उच्च शिक्षा प्राप्त कर उन महिलाओं के लिए आदर्श प्रस्तुत किया जिनका मानना है कि गृहस्थ जीवन में पड़ने के बाद शैक्षिक योग्यता बढ़ाना मुश्किल होता है। 2008 में आप ओंकारमल सोमानी कॉलेज ऑफ कॉमर्स से प्रोफेसर के पद से सेवानिवृत्त हुई हैं।
100 से अधिक परिवारों को संवारा
उन्होंने समाज एवं गैर समाज के पिछड़े परिवारों को न सिर्फ यथायोग्य सहयोग दिया बल्कि अपने दिशा-निर्देशों से भी आगे बढ़ाया। परिवारों में बिगड़ते रिश्तों की डोर को टूटने से बचाने एवं पति-पत्नी के संबंधों में आई दरारों को पाटने जैसे असहज कार्यों को भी अपनी सूझबूझ द्वारा बड़ी सहजता से कर पाने में सिद्धहस्त श्रीमती मूंदड़ा विघटन नहीं, सबको एक सूत्र में बांधने में विश्वास करती है।
अब तक 100 से अधिक परिवारों के रिश्तों को टूटने से बचाया और उनका मिलाप करवाया हैं। जरुरतमंद व्यक्तियों की मदद करने में भी आप सदैव अग्रणी रही है। आत्यधिक रूप से पिछड़े व्यक्तियों की भी कभी स्वयं तो कभी इस क्षेत्र में काम कर रही विविध संस्थाओं के माध्यम से मदद करवाकर उनकी राह एवं मुश्किलों को आसान किया है।
समाजसेवा में भी सदैव सक्रिय
पिछले 25 वर्षों से अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महिला संगठन से जुड़ी हैं। श्रीमती मूंदड़ा माहेश्वरी समाज के साथ अन्य समाज सेवी संस्थाओं से भी जुड़ी हुई है। माहेश्वरी समाज जोधपुर, माहेश्वरी महिला संगठन, अखिल भारतीय माहेश्वरी महिला संगठन, रोटरी क्लब, इनर व्हील क्लब आदि इकाईयों से जुड़े होने के साथ श्रीमती मूंदड़ा कम्युनिटी वेलफेयर एंड क्रिएटिविटी ट्रस्ट की ट्रस्टी भी हैं।
आप अखिल भारतीय माहेश्वरी महिला संगठन पश्मिांचल की राष्ट्रीय संयुक्त मंत्री व परिवार परिवेदना प्रकोष्ठ के संयोजक पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। रोटरी क्लब, इनर व्हील, अध्यक्ष वैश्य फेडरेशन तथा जाइंट्स ग्रुप ऑफ़ संस्कृत की दो बार २ अध्यक्ष रह चुकी हैं। 2024 में जाइंट्स कौंसिल लिस्ट में आपको नया फेडरेशन अधिकारी बनाया गया।
समाजसेवा में वे वृद्धाश्रम, गौशाला, अनाथ आश्रम, जरूरतमंद गरीब कन्याओं की शादी में आर्थिक सहयोग में निरंतर कार्यरत रहती हैं। आप पद को प्रतिष्ठा नहीं बल्कि सेवा का अवसर मानती हैं। धार्मिक क्षेत्र में भी 12 ज्योर्तिलिंग यात्रा, अष्टविनायक यात्रा, पुष्कर में सहस्त्रधारा रूद्राभिषेक और हवन आदि में अपना तन-मन-धन से सहयोग देती रही हैं।
युवा पीढ़ी को दें संस्कार
आत्मविश्वास, दृढ़ निश्चय, पारिवारिक सहयोग, पिता एवं पति का हर कदम पर साथ जैसे महत्वपूर्ण घटकों को अपनी सफलता का राज बताने वाली श्रीमती मूंदड़ा का मानना है कि वर्तमान में युवा पीढ़ी भटक रही है और उन्हें सही राय देने वालों की कमी है। ऐसे में बच्चों को बचपन से ही अच्छे संस्कारों में ढाला जाय तो वे अच्छे नागरिक बन परिवार, समाज व राष्ट्र की उन्नति कर सकेंगे।

युवा पीढ़ी को संस्कारवान एवं सेवा भावी बनाना होगा। श्रीमती मूंदड़ा किसी से अपेक्षा करने के बजाय देने में विश्वास करती हैं। उनका मानना है कि समाज से अपेक्षाएं तब रखी जाती है जब हम समाज को कुछ देने की ताक़त रखते है। अतः जो भी परिवर्तन समाज में चाहते हैं उसके लिए शुरुआत स्वयं से करें तो बेहतर होगा। रीति-रीवाजों को लेकर छींटाकसी करना ठीक नहीं है। परिवर्तन प्रकृति का नियम है उसे सहर्ष स्वीकार करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।










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