शक्ति पर्व नवरात्रि बड़े ही जोर शोर से हम सबने मनाया है। दो वर्ष के कोविडीय वातावरण के बाद इस वर्ष इस पर्व में लोगों का उत्साह उफनता नजर आया। हमारे त्यौहार रोजमर्रा की जिंदगी में केवल उत्साह ही नहीं उत्पन्न करते अपितु वे जिंदगी की राह का सही रास्ता भी दिखाते हैं। नवरात्रि पर्व गौर से शक्तिअर्जन कर शक्तिशाली बनने की गाथा का पर्व है। यह पर्व समझाता है कि जीवन में सफल होने के लिये अपने साध्य को प्राप्त करने के लिये साधक का शक्तिशाली होना आवश्यक है।
यदि आप जीवन में सफल होना चाहते हैं या जीवन को सहज रूप से जीना चाहते हैं तो आपको शक्ति केंद्रित करनी होगी व आवश्यकतानुसार उपयोगी शक्तियों का विस्तार करना होगा।
जिंदगी की राह के लिये यह शक्ति अनेकों प्रकार की हो सकती हैं- ज्ञान की शक्ति, ध्यान की शक्ति, धन की शक्ति, जन की शक्ति, तन की शक्ति, मन की शक्ति, बुद्धि की शक्ति, कला कौशल की शक्ति।
सुप्त रूप में ये शक्तियाँ ईश्वर प्राप्त होती हैं परंतु इनका विकास व्यक्ति की मेहनत और लगन से होता है। केवल भाग्य के भरोसे रहकर इन्हें प्राप्त नहीं किया जा सकता।
पाठक कहेंगे कि अब उम्र के इस दौर में या अब बड़ी उम्र में यह पाठ पढ़ने से क्या फायदा? उनसे मेरा निवेदन है कि उम्र के बढ़ते दौर में शक्ति की अधिक आवश्यकता होती है। समय-समय पर शक्ति विशेष की अधिक आवश्यकता होती है। बढ़ती उम्र में मन की शक्ति को सशक्त करने की अधिक आवश्यकता होती है। धन की शक्ति के उचित नियोजन की आवश्यकता होती है और तन में उम्र के अनुरूप जो शक्ति बची है, उसे अनुशासित तरीके से ऊर्जावान बनाये रखने की आवश्यकता है। नियमित घूमना, व्यायाम और योग-अभ्यास से तन को शक्तिशाली बनायें और सकारात्मक विचार, अध्ययन, मनन चिंतन से मन को शक्तिशाली बनायें।
शक्ति पर्व से ‘‘राह जिंदगी की’’ शक्तिशाली बनाने का प्रण लें और पूजा की तरह उसे नियमित करें।










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