आमतौर पर जनता और पुलिस के बीच एक बड़ी खाई है, विश्वास की कमी। अगर दोनों इस कमी को दूर कर एक दूसरे का सहयोग करेंं, तो अपराध नियंत्रण की गति अति तीव्र हो जाऐ। इसी सोच के साथ कार्य कर रही है, संस्था पब्लिक पुलिस, जो जरूरतमंदों का संबल भी बनी हुई है। इसकी स्थापना एनजीओ के रूप में नई दिल्ली के सीए राकेश कुमार माहेश्वरी (चाण्डक) के प्रयास से हुई थी। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश सहित कई न्यायवेत्ता व कानूनविद् सहित 100 से अधिक प्रशासनिक अधिकारी इस संस्था से सम्बद्ध है।
पुलिस का कार्य जनता को सुरक्षा प्रदान करना और अपराध को रोकना है। वह देश में कानून-व्यवस्था बनाये रखने के लिये जिम्मेदार है। लेकिन पुलिस की वास्तविक सफलता मात्र अपराधियों की गिरफ्तारी ही नहीं है बल्कि अपराधिक गतिविधि की पूर्ण रोकथाम तथा कानून का पालन करवाना है। यह सबकुछ बिना जनता के सहयोग के सम्भव नहीं है, लेकिन स्थिति यह है कि लोग किसी भी अपराध की शिकायत लेकर पुलिस के पास जाने तक से घबराते हैं। कारण है, परस्पर विश्वास की कमी।
आम व्यक्ति के सामने पुलिस की सही तस्वीर नहीं है। इसी कमी को दूर कर आम व्यक्ति तक पुलिस की सही छवि पहुँचाने का ही कार्य जनता और पुलिस के बीच सेतु की तरह कर रही है, संस्था पब्लिक पुलिस। इसके लिये संस्था के कार्यकर्ता आम लोगों के बीच जाकर विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन द्वारा उन्हें यह समझाने की कोशिश करते हैं कि पुलिस हमारे लिये और हमारी है तथा पुलिस वाले भी हममें से ही हैं।
ऐसे हुई थी संस्था की शुरुआत
पब्लिक पुलिस की स्थापना की सोच माहेश्वरी समाज के 40 वर्षों से आर्थिक क्षेत्र में चार्टड अकाउण्टेंट के रूप में सेवा दे रहे राकेश कुमार माहेश्वरी की सोच का नतीजा है। इस सोच में ऐसे लोगों की नि:शुल्क कानून सहायता करना भी शामिल था, जो अपनी आर्थिक परेशानियों के कारण किसी एडवोकेट तक की सहायता प्राप्त करने में असमर्थ होते हैं। ऐसे लोग मात्र इस कमी के कारण जमानत न मिलने से ही जेल की सलाखों में अपनी उम्र का कीमती समय गवाँ देते हैं।

श्री माहेश्वरी को सेवानिवृत्त आईएएस देव दत्ता का एवं अन्य लोगो का साथ मिला, जो अपने कॅरियर के 4 दशक पुलिस एवं अन्य सेवाओं में गुजार चुके थे। बस फिर क्या था, उनकी सोच साकार रूप लेने लगी और उन्होंने इसे दिल्ली में ट्रस्ट (एनजीओ) के रूप में पंजीकृत करवा लिया, जिसका कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण राष्ट्र था।
इस संस्था में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति के.जी. बालकृष्णन् चेयरमेन एवं मार्गदर्शक के रूप में हो गये। फिर तो संस्था अपने कार्य को तेजी से गति देने लगी। अब इसमें धीरे-धीरे हाईकोर्ट के पूर्व जज, 100 से अधिक पूर्व वरिष्ठ आईएसएस व आईपीएस अधिकारी, कई पूर्व लॉ सचिव आदि कई हस्तियाँ सम्बद्ध होती चली गईं। वर्तमान में संस्था सेवा के एक वटवृक्ष का रूप ले चुकी है।
आम व्यक्ति की मदद
वर्तमान में संस्था की देशभर में शाखाऐं (चेप्टर) हैं। इनके द्वारा मांगे जाने पर संस्था जरूरतमंद लोगों एवं बंदियों के लिये कानूनी सहायता भी नि:शुल्क उपलब्ध करवाती है। विभिन्न आयोजनों द्वारा संस्था द्वारा जनता और पुलिस के बीच की दूरी को पाटने का कार्य किया जाता है। इसके साथ संस्था का प्रमुख लक्ष्य जनता व पुलिस के सहयोग से बैंकिंग क्षेत्र तथा वरिष्ठजनों को सुरक्षा प्रदान करना भी है।
अभी तक कई पुलिस स्टेशनों में संस्था द्वारा सीसीटीवी तथा रिकॉर्डिंग मशीनें लगवाने का तथा शारदा यूनिवर्सिटी, 1 करोड़ से अधिक सदस्यों वाले सिक्योरीटी गार्ड्स के संगठन सीएपीएसआई, सरदार वल्लभ भाई पुलिस युनिवर्सिटी जोधपुर (राज.), वर्ल्ड कांस्टीट्यूशन एण्ड पार्लियामेंट एसोसिएशन (डब्ल्यूसीपीए), मणिपाल लॉ स्कूल तथा संस्कृत विश्वविद्याल आदि कई प्रतिष्ठित संस्थाओं से भी पब्लिक पुलिस सम्बद्ध होकर सेवा दे रही है।










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