साहित्य जगत की ‘कुमुद’- शशि लाहोटी

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नारी वैसे ही भावना का सागर होती हैं और जब ये भावनाऐं कविता की सुर-लहरी में स्थापित हो जाती हैं तो फिर वे माधुर्य की खुशबू फैलाने में पीछे नहीं रहतीं। कोलकाता निवासी शशि लाहोटी एक ऐसी ही कवयित्री हैं, जिनकी कविताऐं श्रोताओं और पाठकों के सिर चढ़कर बोलती हैं।

कोलकाता निवासी शशि लाहोटी की पहचान एक ऐसी समाजसेवी कवयित्री के रूप में है, जो अपनी कलम से न सिर्फ कविताओं का माधुर्य प्रसारित करती हैं, बल्कि समाजसुधार का अलख भी जगाती है। वैसे तो उनकी लेखनी हमेशा ही चलती रहीं लेकिन अगस्त 2022 में उनका प्रथम काव्य संकलन ‘क्या छिपा सन्दूकची में’ प्रकाशित हुआ। इसमें जीवन के रंगों बचपन, युवावस्था, शादी, रिश्ते, मौसम और उत्सव, यादें जीवन की, अध्यात्म और ज्ञान, सात खण्डो में विभाजित करके कविताओं के माध्यम से जीवन यात्रा को दर्शाया है।

इस पुस्तक को अपने ही 50वें जन्मदिन पर स्वयं को ही उपहार देकर उन्होंने समाज के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महिला संगठन केराष्ट्रीय महिला अधिवेशन ‘शंखनाद 2022′ कोटा में साहित्य चिन्तन मनन समिति के अंतर्गत ‘जागृति कवयित्री सम्मेलन’ में अपनी लिखी कविता ‘शादियों में दिखावा’ प्रस्तुत की, जिसे श्रोताओं की तालियों की गड़गड़ाहट से भरपूर प्यार मिला।


कई साहित्यिक संस्थाओं से सम्बद्ध

इन सबके साथ ही कई साहित्यिक संस्थाओं से जुड़ने का अवसर मिला। अभ्युदय अंतर्राष्ट्रीय संस्था की सह अध्यक्ष बनी, वहाँ संयोजक और मुख्य संयोजक का कार्यभार भी संभाला। वहाँ से ‘गुल्की बन्नो’ की समीक्षा के लिए प्रथम पुरस्कार मिला। पश्चिमी बंगाल साहित्य संगम संस्थान की सचिव का पदभार सम्भाल रही हैं।

अन्तर्राष्ट्रीय महिला काव्य मंच दक्षिण कोलकाता इकाई की उपाध्यक्ष हैं। कई साझा संकलन जैसे ‘मीमांसा-2′, ‘यह उन दिनों की बात है’, ‘चेतना साझा काव्य संग्रह’, ‘शब्ददीप’, ‘कबीर शाश्वत चिन्तन यात्रा’, ‘प्रेमचन्द कथन और संदर्भ’, ‘वह जो गुमनाम रहे’ आदि में रचनाएँ प्रकाशित हुई।

ई-उत्कंठा, काव्यरंगोली, लायंस क्लब की पत्रिका ‘जुनून’, आदि कई पत्रिकाओं और सन्मार्ग, प्रभात खबर, दैनिक विश्वामित्र आदि समाचार पत्रों में भी रचनाएँ प्रकाशित होती रही हैं। कई बार मंच संचालन भी किया है। ‘कविता दिल की’ नाम से फेसबुक पेज बनाया है, जहाँ अपने भाव कविता के रूप में अभिव्यक्त करती रहती हैं, जिसे पाठकों द्वारा बहुत पसन्द किया जा रहा है।


साहित्य सेवा ने दिलाया सम्मान

श्रीमती हालोटी ने नवम्बर 2022 में ‘अभ्युदय अन्तर्राष्ट्रीय संस्था’ और ‘बौद्धायन सोसाइटी वाराणसी’ के तत्वावधान में आयोजित ‘अन्तर्राष्ट्रीय कवयित्री सम्मेलन’ में काव्य पाठ किया। उन्हें ‘कलम के जादूगर’ मंच द्वारा जनवरी 2022 के ‘केकेजे साहित्य रत्न’ सम्मान से सम्मानित किया गया।

जनवरी 2023 में श्रीनाथद्वारा में आयोजित भगवती प्रसाद देवपुरा स्मृति समारोह 2023 में ‘साहित्य मण्डल नाथद्वारा’ द्वारा साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘काव्य कुसुम मानद उपाधि’ से सम्मानित किया गया। यहाँ माहेश्वरी साहित्यकार मंच से कलावती करवा, स्वाति जैसलमेरिया, मधु भूतड़ा, स्वाति मानधना के साथ मंच साझा करने का अवसर मिला।

लायंस क्लब 322 बी2 द्वारा ‘एक्सीलेंट क्लब सेक्रेट्री अवार्ड’ 2020-21 दिया गया। इसके साथ ही अनेक मंचों से सम्मान प्राप्त हुआ। प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी के लिए दो पेज से भी अधिक बड़ी एक कविता लिखी ‘मेरे मन की- मोदी मेरी कलम से’ और उसके लिए उनको प्रधानमन्त्री कार्यालय से धन्यवाद पत्र भी मिला और लेखनी को एक पहचान मिली।


यथार्थ को किया चित्रण

जो भी जीवन में आसपास घटित होता था उसी विषय को लेकर कविता लिखती और उसे लोगों तक पहुँचाती, कभी समाचार पत्र के माध्यम से तो कभी सोशल मीडिया के माध्यम से। इस क्रम को कभी बीच में छोड़ा नहीं और यात्रा अनवरत चलती रही। धीरे-धीरे लेखनी और प्रखर होती गई। कोरोना काल में लिखी गई कविताएँ जैसे ‘शुक्रिया कोरोना’, ‘मुझे अपने गाँव जाना है’, ‘जान है तो जहान है’ आदि कई रचनाएँ समाचार पत्र में प्रकाशित होती रही।

सोशल मीडिया के माध्यम से कई मंचों से जुड़ी और बहुत बार विजेता भी रही। इसी क्रम में एक कविता ‘जी बिजनेस’ के पैनलिस्ट पर लिखी और उसे जी बिजनेस के एडिटिंग मैनेजर अनिल सिंघवी द्वारा ‘वर्ल्ड वुमन्स डे 2022′ को जी बिजनेस चैनल पर दिखाया गया और बहुत सराहा गया।

‘कश्मीर फाइल्स’ फिल्म के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री द्वारा इनकी कविता ‘मूवी हॉल का आँखों देखा हाल’ को ट्वीट किया जिसे हजारों लोगों ने देखा। अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महिला संगठन की साहित्य चिन्तन मनन समिति द्वारा आयोजित की गई प्रतियोगिताओं में भी भाग लिया जिसमें ‘कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन’, ‘कोरोना पर मुकदमा’, ‘क्षणिकाएँ’ जैसी प्रतियोगिताओं में राष्ट्रीय स्तर पर स्थान बनाया।


बचपन से रही साहित्यिक रुचि

श्रीमती कृष्णा देवी और मदन गोपाल बियानी की सुपुत्री शशि लाहोटी का बचपन राजस्थान के एक छोटे से गाँव में बीता और सीकर जिले से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूर्ण की। छापर निवासी सुशील लाहोटी से शादी हुई और कोलकाता बस गई। शुरू से ही कुछ नया सीखने का और करने का जुनून था।

बंगाली भाषा लिखना और पढ़ना सीखा। कोलकाता में रामकृष्ण मिशन इंस्टीट्यूट ज्वाइन करके इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स किया। लेकिन अधिकतम समय अपने बच्चे और परिवार में ही बिताया। कभी-कभी बच्चों की स्कूल पत्रिका के लिए छोटी-छोटी रचनाएँ लिखती थीं। जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते गए, बच्चे ही उनके लिए प्रेरणा बने और कुछ नया करने के लिए हमेशा उत्साहित करते रहे।

किसी के जन्मदिन या सालगिरह पर छोटी-छोटी तुकबंदी से शुरू की गई लेखनी अब दोहा, मुक्तक, गीत, छंद हर विधा में चलने लगी है। हमेशा कुछ नया करने की इच्छा रखना, हर काम को एक जुनून के साथ करने की आदत शुरू से ही थी। बच्चों के साथ कई बार मैराथन में भाग लिया, बास्केटबॉल खेला और ट्रॉफी भी जीती। 30 सेकंड में 8 बास्केट करके हजारों लोगों के सामने तालियाँ भी बटोरी।


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