जोधपुर में एक समय सिर्फ पुरूष दंत चिकित्सकों का ही बोलबाला था। ऐसे में डॉ. सूरज माहेश्वरी (Dr. Sooraj Maheshwari) ने प्रथम महिला दंत चिकित्सक के रूप में बड़े साहस के साथ इस क्षेत्र में कदम रखा। बस फिर क्या था, उनके सधे हाथ लोगों के चेहरे को मुस्कान देते चले गये और उनकी लेखनी साहित्य सृजन द्वारा लोगों के जीवन को दिशा देती रहीं।
नागपुर के पास धामनगांव में किसान परिवार में डॉ. सूरज माहेश्वरी का जन्म हुआ। स्कूली शिक्षा गांव में ही हुई। ननिहाल में पली बढ़ी। यहां उन्हें अच्छे संस्कारों की प्रेरणा मिली। बचपन से ही वे मेधावी रही है। पढ़ाई में विशेष रूचि व घरवालों का हौंसला पाकर उन्होंने डॉक्टर बनने का सपना देखा। इस सपने की पूर्ति के लिए इन्होंने कठिन परिश्रम किया। कई सालों के परिश्रम के बाद अपनों के व्यक्तिगत सहयोग और सपनों की दस्तक ने उनमें रंग भरे और वर्ष 1990 में डेंटल सर्जन बन गई। नागपुर राजकीय डेंटल कॉलेज से उन्होंने बी.डी.एस. की उपाधि हासिल की।
ऐसे रखा चिकित्सा जगत में कदम
अपने कार्य के प्रति निष्ठा, समर्पण का जज्बा लिए हुए वे 21 जून 1991 को जोधपुर के प्रसिद्ध निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. भरत माहेश्वरी संग परिणय सूत्र में बंधकर जोधपुर आयी। डॉ. सूरज ने जोधपुर में अपना प्राइवेट क्लिनिक खोलकर सेवाएं देनी शुरू की। शुरूआती सफर काफी कठिन रहा। नया परिवेश, नये लोग, नयी सोच से रूबरू होना पड़ा। लोगों के ताने भी सुनने पड़े परंतु दृढ़ इच्छा शक्ति ने कदमों को रूकने नहीं दिया।
पति का साथ, सास-ससुर का आशीर्वाद और जोधपुर के अपनेपन ने आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उनका कहना है कि डेंटिस्ट्री सिर्फ प्रोफेशन ही नहीं एक आर्ट है जिसमें चेहरे की मुस्कान के साथ सुंदरता जुड़ी हुई है। उन्होंने अब तक कई लोगों की मुस्कान लौटाई है जो मुस्कुराना तक भूल गए थे। पिछले 33 वर्षों से सौम्य व शालीन व्यवहार से वे माहेश्वरी डेंटल केयर के माध्यम से अपनी सेवाएं दे रही हैं और सबका दिल जीत रहीं हैं।
चिकित्सा में भी सेवा का कीर्तिमान
अपने प्रोफेशन के साथ डॉ. सूरज माहेश्वरी समाज सेवा के क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं। समय-समय पर उनके द्वारा किए गए कार्यों ने लोगों को काफी राहत पहुंचाई है। वे बताती हैं कि स्कूलों व गांव में जाकर लोगों को हेल्थ के प्रति अवेयर करती हैं। अब तक उन्होंने करीब 900 से ज्यादा हेल्थ अवेयरनेस कैंप कंडक्ट किए हैं। इससे लोगों को काफी फायदा पहुंचा है। उन्होंने बालिकाओं में जागरूकता के लिए स्कूलों में जाकर उनके लिए पर्सनल हाइजीन पर मोटीवेशनल कार्यक्रम भी आयोजित किए।
डॉ. सूरज इंडियन डेंटल एसोसिएशन जोधपुर की अध्यक्षा रह चुकी है। उन्होंने अंध विद्यालय संस्थान में सराहनीय सेवाएं दीं। डॉ.सूरज ने कई आयोजन करवाकर जरूरतमंदों को राहत प्रदान की है। परित्यक्त बंधुओं के सहजीवन, बाल बसेरा संस्थान, इंटरनेशनल संस्थान व स्वयंसेवी संगठनों आदि में सराहनीय सेवाएं दीं। जोधपुर जिला एवं प्रदेश माहेश्वरी महिला मंडल की सक्रिय सदस्य भी हैं। परिवार परिवेदना प्रकोष्ठ के तत्वावधान में विधुर, विधवा, उम्रदराज आदि युवक युवतियों के परिचय सम्मेलन का आयोजन आपकी विशिष्ट उपलब्धि है। रंगोली, पाककला, गायन में भी आपकी रूचि है।
पति हमेशा बने सम्बल
उनके दो पुत्र हैं बड़े पुत्र देवांक हैं जो एन.एल.एस. बैंगलौर से लॉ ग्रेजुएट है तथा उसकी पत्नी अमी सुप्रीम कोर्ट में लॉयर है। उन्होंने इंडियन जूनियर शूटिंग वर्ल्ड चैम्पियनशिप तथा ओपन वर्ल्ड चैम्पियनशिप में मेडल भी प्राप्त किए हैं।

छोटे पुत्र शुभांक बिट्स पिलानी से इंजीनियर है पत्नी सुधांशी के साथ बेंगलोर में कार्यरत है। डॉ. माहेश्वरी बताती हैं कि जीवन के हर मोड़ पर उनके पति डॉ. भरत माहेश्वरी का भरपूर सहयोग मिला है। हर कदम पर उन्होंने हौसला अफजाई की और निरंतर कर रहे हैं।
चिकित्सा व साहित्य दोनों से सम्मान
डॉ. सूरज को चिकित्सा, साहित्यिक, सांस्कृतिक सेवाओं के लिये कई संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया है। आपको भास्कर नारी सम्मान, राष्ट्रीय सुलेखा समिति द्वारा सम्मान, राजस्थान पत्रिका द्वारा वूमन ऑर्गेनाइजेशन सम्मान, अंतराष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन विज्ञान भवन नई दिल्ली में श्रेष्ठ सृजन विभूति राष्ट्रीय सम्मान- 2023 से नवाजा जा चुका है।
डॉ. सूरज ने साहित्य की लगभग सभी विधा में अपनी कलम चलाई। हिन्दी गजल का प्रथम संग्रह ‘अक्षर सूरज के’, प्रकाशित हो चुका है। इसके साथ 5 से अधिक साझा काव्य संग्रह में उनकी कविताएं प्रकाशित हो चुकी हैं। विभिन्न विधाओं में उनकी रचना का देश के प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन होता रहा है।










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