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ममता का दरिया- यशोदा माहेश्वरी

नारी का विशिष्ट सम्मान ही उसकी ममत्व भरी कोमल भावनाओं के लिये है, और जब यह ममत्व स्वयं की संतान के साथ अन्य के लिये उमड़ने लगे तो फिर वह नारी ‘‘श्रद्धेय’’ हो जाती है। ऐसी ही नारी हैं, जोधपुर निवासी यशोदा माहेश्वरी जो गरीब बच्चों पर भी अपना स्नेह न्यौंछावर कर उनका भविष्य संवारने की कोशिश कर रही हैं।

‘वही उदार है परोपकार जो करे वहीं मनुष्य है, जो मनुष्य के लिए मरे।’ जोधपुर (राजस्थान) निवासी यशोदा माहेश्वरी, मैथलीशरण गुप्त की इन पंक्तियों को अपने जीवन का आधार मानती हैं। श्रीमती माहेश्वरी ने पिछले कई सालों से गरीब बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा अपने कंधों पर उठाया हुआ है।

वहीं लॉकडाउन के दौरान उन्होंने अपने यहां पढ़ने वाले गरीब बच्चों के घर महीने भर का राशन पहुंचा की उनकी मदद की है। उन्होंने बताया कि वे आज भी शहर की झुग्गी झोपड़ियों में जाकर गरीबों को राशन बांट सेवा कार्य कर रही हैं। वहीं लॉकडाउन के दौरान बच्चों के लिए ऑनलाइन क्लासेस चलाने के साथ कॉपी किताबें भी उन्होंने उपलब्ध करवाई।


कोरोना वॉरियर सम्मान से हुई सम्मानित

कोरोना महामारी ही नहीं बल्कि इससे बचाव के लिये चला लॉकडाऊन भी किसी विपदा से कम नहीं था। इसने जहां हर व्यापार-व्यवसाय की कमर तोड़ दी, वहीं गरीब वर्ग को तो भूखमरी के कगार पर ही लाकर छोड़ दिया।

श्रीमती माहेश्वरी गरीब बच्चों को नि:शुल्क ट्यूशन तो पढ़ाती ही हैं, साथ ही प्रायवेट स्कूल में दाखिला करवाने में उनकी आर्थिक मदद भी करती हैं। कोरोना लॉकडाऊन के दौरान श्रीमती माहेश्वरी ने ऐसे परिवारों के घरों में नियमित रूप से राशन पहुँचाकर मानवता की जो सेवा की उसके लिये समाचार पत्र ‘‘दैनिक नवज्योति’’ द्वारा उन्हें ‘‘कोरोना वारियर’’ के सम्मान से भी नवाजा गया।


दूसरोेंं का जीवन संवारने का लिया संकल्प

श्रीमती माहेश्वरी गरीब बच्चों और उसमें भी खासकर बालिकाओं को शिक्षा प्रदान करवाने में जो योगदान दे रही हैं, उसका कारण उनका स्वयं का परिस्थितिवश अधिक शिक्षा ग्रहण न कर पाना भी है।

श्रीमती माहेश्वरी का जन्म 27 मई 1964 को अजमेर (राज.) के छोटे से गांव ब्यावर में हुआ था। ग्रामीण परिवेश में उनकी शादी कम उम्र में ही जोधपुर निवासी गोविंद माहेश्वरी के साथ हो गई। वर्तमान में उनके परिवार में दो बच्चे 1 पुत्र व 1 पुत्री हैं। इन परिस्थितियों के कारण श्रीमती माहेश्वरी न तो उच्च शिक्षा ग्रहण कर पायी और न ही नृत्य तथा गायन आदि का अपना शोक पूर्ण कर पाईं।

अत: वे अपने बच्चों के साथ ही अन्य बच्चों की प्रतिभा को भी संवारने का प्रयास कर रही हैं। इसके लिये भविष्य में एनजीओ का पंजीयन करवाना भी उनकी योजना में शामिल है।