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rakhi bang

ज्वेलरी व्यवसाय में उभरता नाम – राखी बंग

इरादे बुलंद हों और सभी को साथ लेकर चलने की क्षमता हो तो कठिन राह भी आसान बन जाती है। इन्हीं पंक्तियों को चरितार्थ कर रही हैं, दिग्रस निवासी राखी बंग, जो पुरूषों के वर्चस्व वाले ज्वेलरी व्यवसाय में विश्वास का नया नाम बनकर उभरती जा रही हैं।


दिग्रस में हर कोई ज्वेलरी शॉप फर्म हीरालाल-मोतीलाल पर ग्राहकों की भीड़ से घिरी राखी बंग को देखकर आश्चर्यचकित हुए बिना नहीं रहता। कारण यह है कि अन्य सोने-चांदी की दुकानों पर आमतौर पर पुरूषों का ही वर्चस्व है लेकिन यहाँ की जिम्मेदारी राखी ने सम्भाल रखी है। वैसे पति अजय बंग भी इस व्यवसाय में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर सहयोगी बने हुए हैं।


परिवार का मिला सम्बल

नंदुरबार (महाराष्ट्र) के प्रतिष्ठित समाजसेवी रमेश बांगड़ की सुपुत्री, दिग्रस (महाराष्ट्र) के पूर्व नगराध्यक्ष समाज सेवी विजय बाबू बंग की कुलवधु तथा सहृदय व्यवसायी अजय की जीवनसंगिनी राखी, विदर्भ ही नहीं अपितु पूरे महाराष्ट्र में ज्वेलरी की दुनिया में चिरपरिचित नाम बन चुकी हैं।

गौर करने लायक यह भी है कि संस्कारों से परिपूर्ण राखी में अपनी सहजता, सरलता, कार्यकुशलता से सभी का मन जीत लेने के गुण के साथ उनमें कुछ करने का जज्बा भी है। कई प्रकार के विचारों के पश्चात स्व. श्री माणिकलालजी बंग द्वारा स्थापित तकरीबन 150 साल पुरानी प्रतिष्ठित फर्म हीरालाल मोतीलाल (सोने-चाँदी की दुकान) को और नया कलेवर देकर संभालने का प्रस्ताव परिजनों ने राखी के सामने रखा था।


व्यवसाय के गुर को गहराई से समझा

आमतौर पर ज्वेलरी हर भारतीय नारी की पहली पंसद रहती हैं। राखी भी उनमें से एक हैं। अत: उनका नारी होना उनके लिये सहयोगी सिद्ध हुआ। उन्हें परिजनों का साथ मिला और देखते ही देखते उन्होंने लंबी उड़ान भर ली।

वाकपटुता में माहिर राखी ग्राहक की नब्ज पकड़कर अपनेपन और आत्मविश्वास के साथ पुराने और नए उम्दा एंटीक आभूषणों को बाजार से कम दामों में देकर उनकी अच्छी खासी बचत भी कराती हैं। यही कारण है कि बड़े-बड़े शहरों के लोग आभूषणों की खरीदी के लिए दिग्रस की ओर रूख कर लेते है। यह वाकई में अविश्वसनीय, मगर शत् प्रतिशत सच बात है।


पूरा परिवार भी साथ-साथ

उनकी पारिवारिक सुप्रसिद्ध हीरालाल मोतीलाल फर्म की बागड़ोर संभालने में सहयोग दे रहे उनके पति अजय के साथ पाँचवी पीढ़ी के युवा उनके पुत्र विराज भी बड़ी शिद्दत से विरासत को नए आयाम देने का दायित्व बखूबी निभा रहे हैं।

पूजा पाठ से लेकर हर कार्य दक्षता से करने में निपुण, राखी अपनी सफलता का श्रेय सभी परिजनों के साथ को देकर यही कहती हैं, मैं भाग्यविधाता की शुक्रगुजार हूँ कि मायका और ससुराल इतना बेहतरीन देकर मुझ पर उपकार किया। वर्तमान में आपका सम्पूर्ण परिवार सहित पुत्र विराज व पुत्री ऐश्वर्या भी इसमें सहयोगी बने हुए हैं।