होटल व्यवसाय को भी आमतौर पर पुरूष प्रधान व्यवसाय माना जाता है, लेकिन इस क्षेत्र में अपनी विलक्षण प्रतिभाा से अपनी अलग पहचान बना रही हैं, जोधपुर निवासी चंद्रा बूब। वे न सिर्फ शहर के तीन प्रतिष्ठित होटलों का संचालन सफलता पूर्वक कर रही हैं, बल्कि समाजसेवा में भी उनका योगदान अपने आपमें एक मिसाल है।
स्व श्री लक्ष्मीनारायण चितलांग्या के यहाँ 27 अगस्त 1964 में जन्मी चंद्रा बूब का विवाह जोधपुर निवासी जे.एम. बूब के साथ हुआ। इसके साथ ही उनकी कर्मभूमि जोधपुर बन गई। जोधपुर वि.वि. से युनिवर्सिटी में द्वितीय स्थान के साथ एम.कॉम. की उपाधि प्राप्त की और अपने पारिवारिक व्यवसायों के प्रबंधन से सम्बद्ध होती चली गईं। वर्तमान में श्रीमती बूब कम्पनी ‘‘बूब होटल्स एण्ड रिसॉर्ट्स प्रा.लि.’’ की डायरेक्टर हैं। यह कम्पनी चंद्रा इन, चंद्रा इंपीरियल तथा चंद्रा ग्रांड जैसे प्रतिष्ठित होटलों का संचालन कर रही हैं।
समाजसेवा ने भी दिलाया सम्मान
अपनी व्यावसायिक व्यस्तता के बावजूद श्रीमती बूब समाजसेवा में अपना योगदान देने में पीछे नहीं हैं। आप श्रीहनुमान कृपा चेरिटेबल ट्रस्ट की ट्रस्टी के रूप में विभिन्न समाजसेवी गतिविधियों में योगदान दे रही हैं। इसके साथ ही आप जोधपुर में कई स्थानों पर प्याऊ का संचालन करते हुए गरीब व जरूरतमंदों को चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध करवा रही हैं। सेवा सदन में भी कमरों का निर्माण करवाया।

लायंस क्लब जोधपुर द्वारा नेत्र व स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन भी किया जाता रहा है। इस क्लब की आप सचिव व अध्यक्ष रही हैं। विभिन्न धार्मिक आयोजनों में भी अहम भूमिका निभाई। माहेश्वरी समाज के जनवरी 2019 में आयोजित महाधिवेशन के ‘नीलकंठ’ कार्यक्रम में अहम भूमिका निभाई। विभिन्न कार्यक्रमों में वक्ता तथा संचालक की भूमिका भी निभाती रही हैं।
‘‘हमेशा रहें सकारात्मक’’
श्रीमती बूब जीवन की सफलता का सूत्र बताती हुई कहती हैं, जो हमारे पास है उसका आनंद न उठाना और जो नहीं है उसके लिए गिला-शिकवा करना या अतीत के दुःख के क्षणों को याद कर विचलित रहना और भविष्य की महत्वाकांक्षाओं के स्वप्न लेना दोनों गलत है। इन दोनों मन की अवधारणा के बीच सुन्दर वर्तमान को नजर अंदाज करने के नजरियें को विराम देने का प्रयास करना चाहिये।

यदि हम सकारात्मक हैं, तो खुद से जीत लेगें, क्योंकि इंसान हारता स्वयं से ही है। खुद से ‘ऑल इज वैल’ कहना सिखने का प्रयास करना होगा। स्थितियां हमारे बस में नहीं होती। चीजों और लोगों के साथ तालमेल यानि एडजस्ट करने की आदत डालने पर जीना आसान हो जाता है। जिन्दगी ईश्वर और कुदरत का अमूल्य तोहफा है। संवर गई तो दुल्हन और बिगड़ गई तो तमाशा है।
अतः जिन्दगी के हर लम्हें, हर दिशा को शत प्रतिशत देने का प्रयत्न करना चाहिए। भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में योगदान दे रही संस्था ‘‘स्वर सुधा’’ की भी आप अध्यक्षा हैं। श्रीमती बूब को उनके योगदानों के लिये 15 अगस्त 2016 को जिला प्रशासन द्वारा सम्मानित किया गया। लायंस इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3233 ई-2 द्वारा भी कई बार सम्मानित किया गया।










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